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तीन दिन तीन चुदाई सास साली भाभी

Sasural Foursome Sex Story – कभी कभी भगवान् कुछ देता है तो छप्पर फाड़ कर देता है। मेरे साथ भी यही हुआ है।

मुझे भी ऐसा ही मौक़ा मिल गया। मैं तीन दिन में तीन औरतों को चोदा। भाभी को चोदा, भाभी की बहन को चोदा और भाभी की माँ को चोदा।

आज मैं आपको अपने रिश्तेदार के तीन दिन की ट्रिप में तीन औरतों को कैसे चोदा, यह बताने जा रहा हूँ।

मेरा नाम विकास है। मैं 28 साल का हूँ और अपनी कंपनी चलाता हूँ।

दिल्ली में रहता हूँ। घर परिवार में काफी इज्जत है। पैसे हैं तो लोग मुझे अपने सलाहकार भी मानते हैं।

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मैं दिल खोलकर मदद भी करता हूँ। जब आप किसी की मदद करेंगे तो आपको भी कुछ न कुछ जरूर मिलेगा।

सबसे पहले निःस्वार्थ भाव से काम करना होता है और इसका फल धीरे धीरे इंसान की ज़िंदगी में आता है।

आप भी चाहते होंगे कि लोग आपको पसंद करें, खास कर लड़कियां और औरतें।

तो आपको उसके अनुसार थोड़ा होना पड़ेगा। आपको ऐसा होना पड़ेगा जो एक महिला को एक लड़की को पसंद होता है।

यह कहानी मेरे साले की बीवी यानी मेरी सरहज और उनकी बहन और उनकी माँ के बारे में है।

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मेरे ससुराल वाले बहुत प्यार करते हैं। इज्जत करते हैं। मेरी बातों को कोई भी नहीं टालता है।

तो बात यह हुई कि मेरे साले और उनकी बीवी यानी मेरी सरहज के बीच झगड़ा हो गया था।

बात काफी बिगड़ गई थी और वो घर छोड़कर अपने मायके आ गई थीं और वहां से नहीं आ रही थीं।

तो दिक्कत दोनों तरफ होने लगी थी।

मेरे ससुराल वाले भी मुझे कहने लगे कि आपको ही लड़ाई खत्म करवानी पड़ेगी।

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और उधर साले की बीवी और उनकी माँ का भी कहना था कि आप ही कुछ कर सकते हैं।

तो मैं सीधे अपने साले के ससुराल पहुंच गया।

उनके ससुराल में एक कुंवारी साली, उनकी सास और भाभी ही थीं।

बाकी भाभी के पापा और भाई शहर में नौकरी करते हैं।

तो वहां पर सिर्फ तीन औरतें ही थीं।

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मैं सुबह ही पहुंच गया था।

तो दिन भर उन लोगों से बातचीत हुई। गलतियां तो दोनों तरफ से ही थीं।

मैंने अच्छे से समझा दिया और सब कुछ ठीक भी हो गया।

शाम हुई। खाना पीना खाया और फिर सोने के लिए।

जो मेरा कमरा था वो छत पर का कमरा था।

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भाभी आकर बैठ गई और बातचीत होने लगी।

भाभी मुझे पहले से भी पसंद करती थी और कहती थी कि काश मुझे आप जैसा पति मिलता तो मेरी ज़िंदगी बदल जाती।

तो आप खुद ही सोचिए।

सर्दी का दिन हो। एक रजाई में एक औरत बैठी हो भले ही वो सोई हुई नहीं हो और रात के बारह बज जाएं तो जिस्मानी रिश्ते कायम होने का चांस बढ़ जाते हैं।

और उस पर भी सिचुएशन ऐसी हो कि जो महिला या लड़की आपको पसंद करती हो।

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हम दोनों कई मुद्दों पर बात करते करते मैं उनसे कह दिया।

आप कहती हैं कि काश मैं आपका पति होता तो…… वो बोली खुशनसीब है वो औरत जिसका पति आप हैं।

तो मैंने कह दिया तो हर्ज किस बात का है। आप मुझे अपना पति ही मान लें आज रात के लिए ही सही। उसकी आँखों में एक पल को संकोच की छाया घूम गई लेकिन फिर वही पुरानी चाहत भरी नजर वापस लौट आई। वो बोली एक रात से कुछ नहीं होगा। मैं तो आपके साथ जीना चाहती हूँ पर ये हो नहीं सकता। मेरी आवाज़ में गहरी चाहत भरकर मैंने जवाब दिया जब जो हो नहीं सकता है उसके बारे में क्या सोचना और जो हो सकता है उसके लिए तो आगे बढ़ ही सकते हैं। रात के बारह बज गए हैं। आपकी माँ और आपकी बहन भी नीचे सो गई हैं। हम दोनों एक कमरे में हैं। बस दरवाजा बंद करने हैं।

ऐसे कहते ही मेरे शब्द लड़खड़ा तो जरूर गए थे क्योंकि मैं डायरेक्ट किसी को चुदने के लिए कह रहा था। रिस्क तो होता है जब आप किसी महिला को चुदाई के लिए बोल रहे हो। आगे का जवाब ही आपको बदतमीज साबित करता है या आप मजे लेते हैं या तो रिश्ता बनता है या सदा के लिए टूट जाता है। पर रिश्ता टूटा नहीं। उन्होंने अपनी बाहें फैला दीं तो मैं भी बिना देर किए उनको अपनी आगोश में ले लिया। मैं पलंग से नीचे उतरा। वो भी उतरीं और उन्होंने दरवाजा बंद कर दिया। वो मेरी बाहों में। मैं उनकी बाहों में।

कब मेरे होंठ उनके होंठ पर जा टिके पता ही नहीं चला। हम दोनों ने लिप लॉक कर लिए और एक दूसरे के जिस्म को सहलाने लगे। मेरे होंठ उनके नरम गुलाबी होंठों को चूसने लगे। मेरी जीभ उनके मुंह के अंदर घुसकर उनकी जीभ से लिपट गई और दोनों जीभें एक दूसरे को चाटने लगीं। उनके मुंह से हल्की सिसकारी निकली और उनकी सांसें तेज हो गईं। मैंने तुरंत ही उनके ब्लाउज के हुक खोलते हुए उनकी साड़ी को भी उतार दिया। पेटीकोट उन्होंने खुद ही नीचे गिरा दी नाड़ा खोलकर। ब्रा बड़ी सेक्सी पहनी थी लाल कलर की और काली पैंटी बड़ी सेक्सी लग रही थी। मैंने तुरंत ही उनके ब्रा के हुक खोल दिए और बूब्स को दबाने लगा।

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अब वो बेड पर आ गईं और लेट गईं। मैंने उनके होंठ को चूसना शुरू किया। गाल पर चूमने लगा। बूब्स को दबाते हुए निप्पल दांतों तले ले लिया। मेरी उंगलियां उनके नरम मांसल स्तनों को पूरी ताकत से दबा रही थीं। उनके गुलाबी निप्पल मेरे मुंह में लेते ही मैंने उन्हें हल्का सा काटा और फिर जीभ से चाटने लगा। अब वो मदहोश होने लगीं। मेरी भी धड़कन तेज तेज चलने लगी। उन्होंने अपने बाल खोल दिए। ओह गोर बदन पर काले काले बाल जब बिखर गए तो मेरे तन बदन में आग लग गई।

मैंने तुरंत ही सरक कर नीचे आ गया। उनके नाभि में उंगलियां घुमाते हुए दोनों जांघों को चूमने लगा। मेरी जीभ उनके नाभि के गड्ढे में घुसकर चक्कर काट रही थी और मेरे होंठ उनकी जांघों की नरम त्वचा को चूस रहे थे। फिर उनकी पैंटी उतारी तो चूत बिना बाल की थी। मैंने तुरंत ही चूत में उंगली डाली तो गीली थी।

मैं तुरंत ही उनकी चूत को चाटने लगा। उन्होंने दोनों पैरों को फैला दिया। पहले तो मैंने उनकी चूत का रस खूब पिया और फिर जब उनकी अंतर्वासना भड़क गई और उन्होंने सिसकारियां लेती हुई अंगड़ाइयां लेने लगीं तो मेरे से भी रहा नहीं गया। मैंने अपना ९ इंच का लंड उनकी चूत में घुसा दिया और फिर तो ऊपर से धक्के पर धक्का।

ओह वो भी जोर जोर से नीचे से धक्के देती और मैं ऊपर से देता। मेरा मोटा लंड उनकी तंग गीली चूत को पूरी तरह फैलाते हुए अंदर बाहर हो रहा था। हर धक्के पर उनकी चूत से चिकचिक की आवाज़ निकल रही थी और उनके रस मेरे लंड को चिकना बना रहे थे। ओह उनकी बड़ी बड़ी चूचियां जो काफी टाइट थीं और कत्थई रंग का निप्पल। ओह क्या बताऊं दोस्तों कहानी लिखते लिखते भी मेरा लंड खड़ा हो रहा है।

फिर क्या दोस्तों आगे से ऊपर से नीचे से बैठा कर घोड़ी बना कर कुतिया बनाकर गांड़ की तरफ से खूब चोदा। मैंने भाभी को पहले तो ऊपर नीचे की मुद्रा में बिठाया जहां वो मेरे लंड पर सवार हो गई थीं। उनकी गीली चूत मेरे मोटे नौ इंच लंड को पूरी तरह निगल रही थी। हर बार वो नीचे बैठतीं तो मेरी गोद में उनकी बड़ी बड़ी चूचियां उछलतीं और मैं उन्हें दोनों हाथों से जोर से दबोचता। उनके निप्पल मेरी उंगलियों के बीच कठोर हो चुके थे और मैं उन्हें हल्का सा मरोड़ता। फिर मैंने उन्हें घोड़ी बनाकर खड़ा किया जहां उनकी पीठ मेरी तरफ थी।

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मेरा लंड उनकी चूत के ठीक पीछे से अंदर घुसा और मैं तेज तेज धक्के मारने लगा। हर धक्के पर उनकी चूत से चिकचिक की आवाज निकल रही थी और उनके रस मेरे लंड और जांघों को पूरी तरह भीगा रहे थे। उनकी कत्थई निप्पल वाली बड़ी चूचियां नीचे लटक रही थीं और मैं आगे झुककर उन्हें पकड़कर जोर से मसल रहा था।

फिर मैंने उन्हें कुतिया बनाकर पूरी तरह नीचे झुका दिया जहां उनकी गांड़ मेरे चेहरे के सामने थी। मैंने अपनी गांड़ की तरफ से लंड को उनकी चूत में पूरी ताकत से ठेला और लगातार पेलने लगा। मेरा पेट उनकी नरम गांड़ की चमड़ी से टकरा रहा था और हर टकराहट पर उनकी चूत मेरे लंड को कसकर जकड़ लेती। वो तीन बार झड़ी तब तक मैं पेलते रहा।

पहली बार जब वो झड़ीं तो उनकी चूत ने मेरे लंड को बार बार सिकोड़ा और गर्म रस की धार मेरे लंड पर बह निकली। उनका पूरा बदन कांप उठा था। उनके मुंह से लंबी सिसकारियां और चीख निकल रही थीं।

दूसरी बार उनकी आंखें बंद हो गईं और उन्होंने तकिए को मुंह में दबा लिया ताकि आवाज न निकले। तीसरी बार तो उनकी जांघें पूरी तरह थरथरा रही थीं और चूत से रस टपकता हुआ बेडशीट को गीला कर रहा था। मैं तब भी लगातार ऊपर से धक्के देता रहा और नीचे से उनकी चूत को पूरी तरह भरता रहा।

पर एक गड़बड़ हो गया।

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उन्होंने दरवाजा सिर्फ सटाया था कुंडी नहीं लगाई थी।

तभी वो अंदर आ गईं। उनको क्या पता कि अंदर उनकी बहन की पेलाई हो रही है। हम दोनों ही वस्त्रहीन थे नंगे थे। मेरा लंड अभी भी उफान पर था मोटा था लंबा था और भाभी की चूत के रस से चमक रहा था। उनकी चूचियों को मैं अभी भी दोनों हाथों से दबोचे हुए था। हमारे बदन पसीने से तर थे और कमरे में चुदाई की खास महक फैली हुई थी।

ये दृश्य देखकर वो चुपचाप खड़ी हो गईं। उनकी आंखों में वासना की आग मुझे दिखाई दे रही थी। उनकी सांसें तेज हो गई थीं और नजर मेरे खड़े लंड और भाभी की नंगी चूत पर अटकी हुई थी। पर वो तब तक कुछ नहीं बोलीं। भाभी उठीं अपनी ब्रा ढूंढने लगीं तो मिल नहीं रहा था। अक्सर ऐसा होता है चुदाई के बाद ब्रा ही खो जाता है। उनकी बहन नीचे से ब्रा उठाकर दी। तो पैंटी नहीं मिल रही थी। पैंटी कोने में गिरा था तो मैं उठाकर दिया।

फिर वो अपने कपड़े पहनीं और मैं अपने कपड़े।

फिर उनकी बहन ने एक बात बोली। भाभी का मुंह तो खुला का खुला रह गया पर मेरे चेहरे पर मुस्कान आ गई।

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अब मैं कल इस कहानी को पूरा करूंगा।

जो और भी ज्यादा सेक्सी होगा।

साली और सास की चुदाई एक ही रात में कैसे किया वो मैं बताऊंगा।

तब तक के लिए पाठकों को प्यार भरा नमस्कार।

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