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गांव की कुंवारी विधवा बहू के साथ सुहागरात

Village suhagrat sex story, Widowed virgin chudai sex story, Pehli suhagrat chudai sex story: हेलो यूजर्स, मैं रवि कांत शर्मा एक बार फिर से आप लोगों के सामने अपनी एक और गर्मागर्म कहानी लेकर आ गया हूं। लेकिन सबसे पहले एक बात बहुत साफ-साफ कह देना चाहता हूं। मेरी पिछली कहानियों पर बहुत सारी मेल आई थीं और उनमें से ज्यादातर सिर्फ इसलिए थीं कि भाई लोग पूछ रहे थे – उस लड़की का कॉन्टैक्ट नंबर दे दो या कोई सेफ जगह बता दो जहां हम अपनी गर्लफ्रेंड को लेकर चोद सकें। मैं सबको एकदम क्लियर कर दूं – जिसे भी चोदा है उसका राज रखना मेरी पहली शर्त है। इसलिए मैं कभी भी किसी लड़की के बारे में किसी को कुछ नहीं बताऊंगा। प्लीज अब इस तरह की मेल मत भेजना।

अब ज्यादा टाइम वेस्ट नहीं करते, सीधे कहानी पर आते हैं। ये घटना आज से करीब दो महीने पहले की है। मैं ऑफिस के काम से एक दूर-दराज के गांव में गया हुआ था। वहां गांव के प्रधान से मिलना था। जैसे ही मैं उनके घर पहुंचा और दरवाजा खटखटाया, दरवाजा खुला और सामने एक 25 साल की बेहद खूबसूरत औरत खड़ी थी। उसकी लंबाई करीब 5 फीट 6 इंच, गोरा चिकना रंग, नीली साड़ी में लिपटी वो इतनी आकर्षक लग रही थी कि मैं एक पल के लिए देखता ही रह गया। उसकी आंखें बड़ी-बड़ी, होंठ गुलाबी और कमर पतली लेकिन कूल्हे भरे हुए। मैंने खुद को संभाला और कहा, “प्रधान जी से मिलना है।”

उसने मुस्कुराकर मुझे अंदर आने को कहा, एक कमरे में बिठाया और बोली, “आप यहां बैठिए, पापा अभी आते हैं।” मैं समझ गया कि ये प्रधान की बेटी ही होगी। थोड़ी देर बाद वो मेरे लिए पानी लेकर आई। गिलास देते वक्त उसकी उंगलियां मेरी उंगलियों से छू गईं। वो झटके से हाथ खींचकर चली गई। फिर प्रधान आए। मैंने प्रोजेक्ट के बारे में पूरी बात बताई। सरकार गांव में बड़ा डेवलपमेंट प्रोजेक्ट लाने वाली थी। प्रधान बहुत खुश हुए क्योंकि इससे गांव का नाम होगा और क्रेडिट उन्हें मिलेगा। उन्होंने कहा, “जो भी मदद चाहिए, मैं तुरंत कर दूंगा।”

मैंने कहा कि प्रोजेक्ट के सिलसिले में मुझे कुछ दिन यहां रुकना पड़ेगा। इसलिए अलग कमरा, खाना बनाने और कपड़े धोने का इंतजाम चाहिए। प्रधान ने पहले तो घर में रहने को कहा लेकिन मैंने मना कर दिया। आखिरकार उन्होंने गांव से थोड़ा बाहर खेतों के पास एक अलग मकान दिया। बोले, “ये मकान बिल्कुल अकेला है, कोई डिस्टर्ब नहीं करेगा। खाना और कपड़े धोने का काम मेरी विधवा बेटी रागिनी कर देगी। बचपन में उसकी शादी हो गई थी लेकिन गौना होने से पहले ही पति की मौत हो गई। वो अब तक कुंवारी है। उसका टाइम भी नहीं कटता, वो खुशी-खुशी कर लेगी।”

अगले दिन मैं अपना सामान लेकर वहां शिफ्ट हो गया। शाम को पहुंचा। कुछ आदमी प्रधान के कहने पर मेरा सामान सेट कर गए। रात के 9 बज चुके थे। प्रधान बोले, “मैं जा रहा हूं, खाना भिजवा देता हूं। आप नहा लीजिए।” मैंने दरवाजा बंद किया, नहाया और टी-शर्ट शॉर्ट पहनकर टीवी देखने लगा। तभी दरवाजे पर नॉक हुई। दरवाजा खोला तो रागिनी खड़ी थी। आज उसके चेहरे पर हल्की मुस्कान थी। थाली हाथ में लिए बोली, “साहब, मैंने खुद खाना बनाया है। शहर वालों को पता नहीं आएगा पसंद आएगा कि नहीं।”

मैंने उसे अंदर आने को कहा। वो खाना लगाने लगी। मैं उसकी बॉडी को घूरता रहा। साड़ी का पल्लू थोड़ा सरक गया था, ब्लाउज से उसके भरे हुए स्तन उभरे हुए दिख रहे थे। कमर में गहरी नाभि, कूल्हे लहराते हुए। मेरा लंड तनने लगा। मन कर रहा था अभी पीछे से पकड़ लूं। लेकिन खुद को कंट्रोल किया। खाना खाते हुए उसकी बहुत तारीफ की। वो शरमाकर मुस्कुरा रही थी।

कुछ दिन ऐसे ही बीते। वो अब मुझसे खुलकर बात करने लगी थी। हंसी-मजाक भी होने लगा। एक सुबह वो चाय-नाश्ता लेकर आई। मैंने दरवाजा खोला और बेड पर लेट गया। बोली, “क्या हुआ साहब, आज कुछ ठीक नहीं लग रहे?” मैंने कहा, “आज बदन टूट रहा है, सिर भारी है।” वो पास आई, माथा छुआ और बोली, “बुखार नहीं है। बहुत थक गए हो। आइए मैं मालिश कर दूं, आराम मिलेगा।” मैंने मना किया लेकिन वो नहीं मानी। चटाई बिछाई, तेल लिया और बोली, “टी-शर्ट उतारकर लेट जाइए।”

मैं सिर्फ शॉर्ट्स में लेट गया। वो पिंक साड़ी में झुककर मेरे पैरों पर तेल लगाने लगी। झुकने से उसके ब्लाउज से गहरी दरार दिख रही थी। गुलाबी निप्पल हल्के से झांक रहे थे। मेरा लंड पूरी तरह खड़ा हो गया, शॉर्ट्स में उभार साफ दिख रहा था। वो तिरछी नजरों से देख रही थी। मैंने पूछा, “रागिनी, तुम्हारी उम्र क्या है?” बोली, “25 साल।” मैंने कहा, “क्या मन नहीं करता दोबारा शादी का?” वो बोली, “साहब, कौन औरत नहीं चाहेगी कि उसका मर्द उसे प्यार करे, उसे छुए, उसे संतुष्ट करे। मैं भी तो औरत हूं। लेकिन मेरा मर्द बिना मुझे टच किए मर गया। अब तो बस तरसती रहूंगी।”

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मैंने कहा, “क्या शादी के बिना प्यार नहीं हो सकता?” वो बोली, “आप तो जानते हैं, मैं गांव में रहती हूं, प्रधान की बेटी हूं। यहां कोई ऐसा नहीं जो मुझे प्यार कर सके।” मैंने कहा, “और मैं?” वो शरमाकर बोली, “धत्त… आप क्यों मुझे जैसी गांव की लड़की को प्यार करेंगे?” मैं कुछ नहीं बोला। उठकर बैठ गया और उसकी आंखों में देखने लगा। वो कुछ पल मुझे देखती रही, फिर शरमाकर आंखें बंद कर ली। मैंने उसे अपनी बाहों में खींच लिया, सीने से लगा लिया। उसके नरम स्तन मेरे सीने से दब रहे थे। वो भी मुझे कसकर हग करने लगी।

मैंने उसके गरम होंठों पर अपने होंठ रख दिए। धीरे-धीरे चूसने लगा, पहले ऊपरी होंठ को मुंह में लेकर हल्के से खींचा, फिर निचले होंठ को चाटा। वो मेरे होंठों की गर्माहट से थर्रा रही थी, उसका सांस तेज हो गया था। मैंने अपनी जीभ उसके मुंह में डाली, धीरे से उसकी जीभ से खेलने लगा, उसके मुंह का मीठा रस चखा, जैसे कोई मीठी अमृत पी रहा हूं। वो भी अब जीभ से जवाब देने लगी, हमारी जीभें एक-दूसरे से लिपट रही थीं, गहरा किस चल रहा था। एक हाथ से मैंने उसके बालों में उंगलियां फंसाईं, सिर को और करीब खींचा, जबकि दूसरे हाथ से उसके स्तन को दबाने लगा, पहले हल्के से सहलाया, फिर कसकर दबाया। उसके निप्पल ब्लाउज के अंदर से तनकर महसूस हो रहे थे। वो “उफ्फ… साहब…” करके सिसकारी ले रही थी, उसका बदन मेरे स्पर्श से गर्म होने लगा था।

उसने मेरा हाथ पकड़ा और बोली, “प्लीज अभी ये मत करो। मैं पूरी तरह कुंवारी हूं। मेरा एक अरमान है कि जब पहली बार चुदाई हो तो बिल्कुल सुहागरात की तरह हो। आज दोपहर पापा रिश्तेदारी में जा रहे हैं। रात को मैं खाना लेकर आऊंगी और यहीं रुक जाऊंगी। घर पर कोई नहीं होगा। तब आप मुझे अपनी दुल्हन बनाकर भरपूर प्यार करना।”

मैंने कहा, “ठीक है, लेकिन अभी जब शुरुआत हो गई है तो कम से कम कुछ तो पिला दो।” मैंने उसका ब्लाउज थोड़ा सरकाया, धीरे से बटन खोले, एक स्तन बाहर निकाला, वो गोरा, भरा हुआ, गुलाबी निप्पल तना हुआ था। मैंने पहले निप्पल को उंगली से सहलाया, फिर मुंह में लेकर जोर से चूस लिया, जीभ से घुमाया, हल्के से दांतों से काटा। वो “आह्ह… साहब… ओह्ह…” करके कराह रही थी, उसका हाथ मेरे बालों में था, कभी खींच रही थी, कभी दबा रही थी, जैसे दर्द और मजा दोनों मिल रहे हों। फिर वो उठी और चली गई।

शाम को 6 बजे दरवाजा खटखटाया। एक आदमी बड़ा पैकेट लेकर आया। बोला, “प्रधान जी के घर से ये सामान लाया हूं।” पैकेट खोला तो ढेर सारे फूल और एक चिट्ठी। रागिनी ने लिखा था – “ये फूल अपनी सुहागरात मनाने के लिए भेज रही हूं। इन फूलों से मेरी सुहागरात को यादगार बना देना।” दिल धड़क उठा। मैंने बेडरूम में नई सफेद चादर बिछाई, फूल बिखेर दिए। पूरे रूम को फूलों, अगरबत्ती और हल्की लाइट से सुहागरात जैसा सजाया। नहाया, अच्छे से शेव किया, कुर्ता-पजामा पहना और तैयार हो गया।

रात 8:30 बजे दरवाजा खटखटाया। रागिनी आई। मैंने हग करने की कोशिश की तो वो मुस्कुराकर बोली, “जानू, थोड़ा इंतजार तो करो। सब्र का फल मीठा होता है।” उसके हाथ में छोटा सा बैग था। वो रूम में चली गई और बोली, “जब मैं बुलाऊं तब आना। तब तक बाहर देखना भी मत।” मैं बाहर बैठा इंतजार करता रहा। करीब 30 मिनट बाद अंदर से आवाज आई, “जानू… आओ ना…”

मैं अंदर गया तो देखता रह गया। उसने लाल साड़ी पहनी थी, गहने पहने थे, हल्का मेकअप, आंखों में काजल, होंठों पर लिपस्टिक। घूंघट निकालकर बेड पर दुल्हन की तरह बैठी थी। मैंने दरवाजा अंदर से बंद किया। उसके पास जाकर बेड पर बैठ गया। धीरे से घूंघट उठाया। वो शरम से नजरें झुकाए हुए थी। मैंने उसकी आंखों पर होंठ रख दिए। वो पूरा बदन ढीला छोड़कर मेरे ऊपर झुक गई। मैंने उसे सीने से लगा लिया। उसकी धड़कन मेरे सीने पर महसूस हो रही थी।

वो उठी और बैगल से गरम दूध का ग्लास उठाकर बोली, “ये पी लीजिए।” मैंने ग्लास साइड में रख दिया और कहा, “जानू, इस वक्त दूध पीने का टाइम नहीं है। मुझे तो कुछ और पीना है।” वो शरमाकर बोली, “क्या?” मैंने उसके दोनों स्तनों को सहलाते हुए कहा, “ये पीना है।” वो बोली, “धत्त… आप तो बहुत शैतान हैं।” मैंने उसके स्तनों को सहलाना जारी रखा। धीरे-धीरे पल्लू सरकाया, ब्लाउज के बटन खोलने लगा। वो दोनों हाथों से चेहरा ढककर बोली, “मुझे बहुत शर्म आ रही है।”

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मैंने पूरा ब्लाउज उतार दिया। फिर साड़ी खोलकर अलग रखी। वो अब सिर्फ पेटीकोट और सफेद ब्रा में थी। मैंने धीरे से उसके पीछे हाथ ले जाकर ब्रा का हुक खोला। जैसे ही हुक खुला, ब्रा ढीली हो गई और उसके भरे हुए स्तन आजाद हो गए। गुलाबी निप्पल पूरी तरह तने हुए थे, जैसे मेरे स्पर्श की प्रतीक्षा कर रहे हों। मैंने उसके कंधों से ब्रा को सरकाकर नीचे गिरा दिया। अब उसके स्तन मेरी आंखों के सामने थे, भरे हुए, नरम और उत्तेजित। मैंने अपनी उंगलियों से धीरे से उसकी पीठ सहलाई, ऊपर से नीचे तक, उसकी रीढ़ की हड्डी पर उंगलियां फिराईं। वो थरथरा उठी। फिर मैंने उसके गर्दन पर होंठ रखे, धीरे-धीरे चूमते हुए, जीभ से चाटते हुए। उसके कान के पास पहुंचा, कान की लौ पर जीभ फिराई और अंदर हल्का सा फूंक मारा। वो “आह्ह… उफ्फ… जानू… ये क्या कर रहे हो…” कहकर सिसकारी ले रही थी, उसका बदन गर्म हो रहा था। मेरा एक हाथ नीचे सरका, पेटीकोट के अंदर डाला और उसकी नरम, गोल गांड को दबाया। उंगलियां उसकी गांड की दरार में फिराईं। वो कमर हिलाने लगी। फिर मैंने पेटीकोट का नाड़ा पकड़ा, जोर से खींचा और तोड़ दिया। पेटीकोट ढीला होकर उसके पैरों पर गिर गया। अब वो सिर्फ पैंटी में थी, जो उसकी गुलाबी चूत को ढक रही थी, लेकिन हल्का सा गीला हो चुका था।

मैंने उसे धीरे से बेड पर लिटाया, उसकी कमर पकड़कर सहारा दिया ताकि वो आराम से लेट सके। खुद खड़े होकर कुर्ता उतारा, फिर पजामा। अब सिर्फ अंडरवियर में था, जिसमें मेरा लंड पूरी तरह तना हुआ उभार बना रहा था। मैं उसके ऊपर लेट गया, अपना वजन संभालते हुए। गहराई से उसके होंठ चूमने लगा, जीभ अंदर डालकर उसके मुंह का रस चखा, होंठों को चूसा और काटा। दोनों हाथों की उंगलियां उसकी उंगलियों में फंसा लीं, कसकर पकड़ लिया जैसे हम एक हो गए हों। मेरा खड़ा लंड उसकी पैंटी पर रगड़ रहा था, ऊपर-नीचे घिसता हुआ, उसकी चूत की गर्मी महसूस कर रहा था। वो आंखें बंद करके “ह्म्म… आह्ह… जानू… कितनी गर्मी है…” कर रही थी, उसकी सांसें तेज हो रही थीं। मैंने अपना अंडरवियर नीचे सरकाया, पूरी तरह नंगा हो गया। मेरा लंड आजाद होकर लहरा उठा, गर्म और सख्त। फिर मैंने उसकी पैंटी के किनारों को पकड़ा, धीरे से नीचे खींचा, उसके कूल्हों से सरकाते हुए पैरों से उतार दिया। अब हम दोनों पूरी तरह नंगे थे, उसकी चूत मेरे सामने थी, गुलाबी और हल्की गीली।

उसके माथे से चूमते हुए मैं धीरे-धीरे नीचे आया। पहले आंखें चूमीं, फिर गाल, फिर गर्दन, फिर उसके स्तनों पर रुका। एक स्तन को मुंह में लिया, निप्पल को जीभ से घुमाया, चूसा। दूसरा हाथ से दबाया। वो कराह रही थी। फिर पेट पर चूमा, नाभि में जीभ डाली। जब जीभ उसकी चूत पर पहुंची तो उसने दोनों हाथों से मेरा सिर पकड़ लिया, जैसे रोकना चाहती हो लेकिन रोक नहीं पा रही हो। चूत गुलाबी, बिल्कुल साफ, हल्का रस बह रहा था, जो उसकी उत्तेजना बता रहा था। मैंने जीभ से पहले चूत के ऊपरी हिस्से को चाटा, क्लिट पर जीभ घुमाई, हल्का सा दबाया। वो “आह्ह… ओह्ह… जानू… कितना अच्छा लग रहा है… ऊंह्ह… और करो…” कर रही थी, उसकी कमर हिलने लगी। फिर जीभ को चूत के छेद पर रखा, अंदर डाली, अंदर-बाहर की। वो कमर उछालने लगी, “आह्ह… और अंदर… ओह्ह… हां ऐसे ही…” मैंने जोर-जोर से चाटा, क्लिट को चूसा, उंगलियों से चूत की पंखुड़ियां खोलीं और जीभ गहराई में डाली। उसका रस बहने लगा। अचानक उसका बदन अकड़ गया, वो पहली बार झड़ गई। “आआह्ह… चूत झड़ रही है…! ओह्ह… जानू… उफ्फ…” उसकी चूत से रस निकला, मैंने उसे चाट लिया।

फिर मैं उसके सिर के पास गया। उसके सिर के नीचे हाथ डाला, थोड़ा सा उठाया। लंड उसके होंठों पर रगड़ा, ऊपर-नीचे घिसा। वो शरमाकर लेकिन उत्तेजित होकर मुंह खोल दिया। मैंने लंड धीरे से अंदर डाला। वो प्यार से चूसने लगी, जीभ से टिप चाटी, मुंह में अंदर-बाहर किया। “ग्ग्ग्ग… गी… गों… गोग…” आवाजें आ रही थीं, जैसे गीला लंड मुंह में घुस रहा हो। मैं उसके स्तनों को दबा रहा था, निप्पल मसल रहा था। 10 मिनट तक चुसवाया, कभी गहरा डाला, कभी बाहर निकाला। वो थक रही थी लेकिन रुक नहीं रही थी।

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फिर उसे सीधा लिटाया। टांगें घुटनों से मोड़ीं, फैलाईं। उसके दोनों हाथ पकड़ लिए, ऊपर की तरफ दबाए। बोला, “अब थोड़ा दर्द होगा, तैयार हो?” वो बोली, “हां जानू, तैयार हूं। मुझे अपना बना लो।” मैंने लंड की टिप उसकी चूत के कट पर रगड़ी, ऊपर-नीचे, गोल घुमाया। वो “आह्ह…” करके थर्राई, उसकी चूत और गीली हो गई। मैंने उसकी कमर पकड़ी, कंधे पकड़े, हल्का सा धक्का मारा। लंड की टिप अंदर घुसी। वो “आआह्ह!” चीखी, दर्द से उसकी आंखें बंद हो गईं। मैंने झुककर उसके निप्पल चूसा, दबाया, ध्यान बंटाने के लिए। वो “दर्द हो रहा है… लेकिन रुकना मत… हां…” कह रही थी।

दर्द कम होने पर मैंने धीरे-धीरे लंड और अंदर किया, इंच दर इंच। अचानक सील टकराई। मैंने उसे कसकर पकड़ा, उसके होंठ अपने होंठों में दबा लिए ताकि चीख न निकले। फिर पूरी ताकत से धक्का मारा। लंड सील तोड़कर पूरा अंदर घुस गया। वो तड़प उठी, “आआह्ह्ह… बहुत दर्द…! उफ्फ… जानू…” आंसू निकल आए, उसका बदन कांप रहा था। मैं रुका रहा, उसके स्तनों को सहलाया, चूमा। धीरे-धीरे वो शांत हुई, दर्द कम हुआ। फिर मैंने धीरे चुदाई शुरू की, लंड थोड़ा बाहर निकाला, फिर अंदर। वो “उफ्फ… अब मजा आने लगा… और गहरा… हां…” कहने लगी। स्पीड बढ़ाई, जोर-जोर से धक्के मारे। वो गांड उछाल-उछालकर चुदवा रही थी, “आह्ह… और जोर से चोदो… ओह्ह… जानू… मेरी 25 साल की तरसती चूत को संतुष्ट कर दो… आह्ह… हां ऐसे ही…” उसकी सिसकारियां कमरे में गूंज रही थीं।

10 मिनट बाद उसका बदन फिर अकड़ गया, वो फिर झड़ी। “आह्ह… चूत फिर झड़ रही है… जोर से चोदो…! ओह्ह… उफ्फ…” मैंने चादर देखी – खून से सनी थी, उसकी कुंवारापन की निशानी। उसे घोड़ी बनाया, घुटनों और हाथों पर। पीछे से उसकी गांड पकड़ी, गोल-गोल दबाई। लंड उसकी चूत पर सेट किया, धक्का मारा। जोर-जोर से ठोके, हर धक्के में लंड पूरा अंदर-बाहर। हाथों से उसके लटकते स्तन पकड़े, दबाए, निप्पल मसले। वो “हां… ऐसे ही… मेरी चूत फाड़ दो… आह्ह… बहुत मजा आ रहा है… ओह्ह… और जोर से…” कह रही थी, उसकी गांड मेरे धक्कों से थप-थप की आवाज कर रही थी। फिर वो फिर झड़ी, “आआह्ह… फिर आ रहा है…!” मुझे लगा मैं भी आने वाला हूं। लंड निकालकर उसकी गांड पर झड़ दिया, गरम वीर्य की पिचकारी मारी।

हम नंगे एक-दूसरे को हग करके लेटे रहे, सांसें संभालते हुए। वो बाथरूम गई, लेकिन चल नहीं पा रही थी, चूत फट गई थी, दर्द से लंगड़ा रही थी। मैं पीछे गया। बोला, “मेरा लंड भी साफ करो।” उसने पानी से धोया, हाथ से सहलाया। लंड फिर खड़ा हो गया। वो घुटनों पर बैठी, लंड लॉलीपॉप की तरह मुंह में लिया, चूसा। “ग्ग्ग्ग… गों… गोग…” मैंने उसे उठाया, बेडरूम में टेबल पर चढ़ाया, गांड टेबल पर टिकी। टांगें ऊपर उठाकर मेरे कंधों पर रखीं, सामने खड़े होकर लंड उसकी चूत में डाला। जोर-जोर से चोदा, हर धक्के में गहराई तक। वो “आह्ह… ओह्ह… बहुत गहरा जा रहा है… जानू… फाड़ दो मेरी चूत… ऊंह्ह… हां और…” कर रही थी, उसकी चूत फिर गीली हो गई।

उस रात हमने सुहागरात की तरह 4 बार चुदाई की। सुबह उसकी हालत ऐसी थी कि मुश्किल से चल पा रही थी। उसके पापा 3 दिन बाद आने वाले थे। इसलिए अगले 3 दिन वो दिन में नहीं आती थी लेकिन रात को जरूर आती। मेरी बीवी बनकर। अगले दिन मैंने उसकी गांड भी मारी। बहुत दर्द हुआ, खून निकला लेकिन वो मजे ले रही थी। “आह्ह… गांड में भी डालो… मुझे पूरी तरह अपना बना लो… चोदो मुझे जहां चाहो…”

अब जब भी मैं उस गांव जाता हूं, वो मेरी वाइफ का रोल प्ले करके आती है और मेरी लंड की प्यास बुझाती है।

दोस्तों, प्लीज कमेंट करके जरूर बताना कि ये कहानी आपको कैसी लगी?

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