Saheli ki chudai sex story, Jeeju saali sex story, Bivi ki saheli ki chudai kahani: हाय दोस्तो.. मेरा नाम आशु है। मैं ग्वालियर का रहने वाला हूँ और आज मैं अपनी कहानी भेज रहा हूँ। मजा लीजिए।
मेरी शादी को 3 साल हो चुके हैं। मेरी लव मैरिज हुई है। मैं और मेरी गर्लफ्रेंड, जो बाद में मेरी बीवी बनी, उसकी सहेली के घर हमारी शादी का कार्ड देने गए थे। जैसे ही उसकी सहेली ने दरवाजा खोला, मेरे तो होश उड़ गए।
माय गॉड, क्या पटाखा माल थी वो। उसने ब्लैक कलर की साड़ी पहनी हुई थी, जो उसके बदन पर बिल्कुल चिपकी हुई लग रही थी। उसके मम्मों के बीच की गहरी दरार बहुत ही मस्त दिख रही थी। साड़ी का पल्लू थोड़ा सा सरक गया था, जिससे वो गोरी, मुलायम त्वचा और गहरी खाई साफ नजर आ रही थी। उसके मम्मे इतने भरे-भरे और उभरे हुए थे कि मेरी नजरें बार-बार वहीं टिक जाती थीं। मैं उन्हें घूरता रहा, मन ही मन सोच रहा था कि कितने नरम और गरम होंगे ये।
उसने मेरी ये नजरें नोटिस कर लीं। वो हल्के से मुस्कुराई और उसकी आँखों में एक शरारती चमक आ गई। साथ ही वो भी मेरे आकर्षक जिस्म पर फिदा हो गई लगती थी। मेरी चौड़ी छाती, मजबूत बाजू और कसी हुई कमर को देखकर उसकी साँसें थोड़ी तेज हो गईं।
मैंने बातों-बातों में उसका नंबर ले लिया। कुछ हल्की-फुल्की बातें करते हुए मैंने कहा कि क्या मैं कभी कॉल कर सकता हूँ। उसने हँसते हुए अपना नंबर दे दिया और मैंने भी अपना नंबर उसे दे दिया।
दो दिन बाद मैंने उसे कॉल किया। मैंने कहा, “हैलो, रजनी जी?”
वो बोली, “हाँ जीजाजी, मैं रजनी ही बोल रही हूँ। मैं कब से आपके फोन का इंतजार कर रही थी। मुझे पता था कि आपका फोन आएगा।”
उसके बाद हम सामान्य बातें करने लगे – मौसम, काम-धंधा, दोस्तों के बारे में। लेकिन धीरे-धीरे बातें निजी होने लगीं।
उसने हँसकर कहा, “आप उस दिन बड़े गौर से मुझे देख रहे थे। क्या बात थी जीजाजी? आपकी आँखें तो जैसे मेरे ऊपर चिपक गई थीं।”
मैंने जवाब दिया, “आप उस दिन बहुत सेक्सी लग रही थीं। आपकी साड़ी में आपका फिगर इतना हॉट था कि बस देखते ही बनता था।”
तो वो बिंदास बोली, “तभी आपकी नजर मेरे मम्मों पर थी। मैंने देखा कि आप उन्हें घूर रहे थे, जैसे उन्हें छूना चाहते हों।”
मैं उसकी इतनी खुली बात से चौंक गया, लेकिन साथ ही मेरे अंदर की आग और भड़क गई। उसकी आवाज में एक कामुक लहजा था जो मुझे और उत्तेजित कर रहा था।
फिर क्या था, मुझे तो बस मौका चाहिए था। मैंने कहा, “रजनी यार, मुझे आपसे मिलना है। अकेले में, ताकि हम और खुलकर बात कर सकें।”
वो बोली, “कल दोपहर में मेरे घर पर 2 बजे आ जाना। मेरा पति उस वक्त जॉब पर रहेगा, घर पूरी तरह खाली होगा। पर तब भी मुझे कॉल करके आना, ताकि मैं दरवाजा खोल सकूँ।”
मैं ठीक दो बजे उसके घर पर पहुँच गया।
वो बहुत सेक्सी लग रही थी। जैसे ही मैं अंदर गया और दरवाजा बंद हुआ, मैंने बिना एक पल गँवाए उसे सीने से लगा लिया। उसके नरम, गरम बदन का स्पर्श पाकर मेरी साँसें रुक सी गईं।
उसने पहले तो हल्के से मुझे धक्का दिया और कहा, “जीजाजी… आप रिश्ते में मेरे जीजू लगते हो। ये क्या कर रहे हो?” उसकी आवाज में थोड़ी झिझक थी, लेकिन आँखों में शरारत साफ झलक रही थी।
मैंने उसके कान के पास मुँह ले जाकर धीरे से कहा, “साली आधी घरवाली होती है।” ये सुनते ही उसके होंठों पर हल्की सी मुस्कान फैल गई।
मैंने टाइम वेस्ट नहीं किया। मैंने उसके चेहरे को दोनों हाथों से पकड़ा और उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए। पहले तो हल्का-सा किस था, लेकिन जैसे ही उसके होंठ खुले, मैंने उसकी जीभ को अपनी जीभ से मिलाया। वो पहले थोड़ा सिकुड़ गई, फिर धीरे-धीरे मदहोश हो गई। उसकी साँसें तेज हो गईं और वो भी मुझे जोर से चूमने लगी। हम दोनों के होंठ एक-दूसरे में ऐसे घुल गए जैसे सालों से भूखे हों।
उसके मम्मों का साइज 36 रहा होगा, शायद 36D। ब्रा के ऊपर से ही वो इतने भरे-भरे और उभरे हुए लग रहे थे। मैंने एक हाथ से उसके ब्लाउज के अंदर हाथ डाला और ब्रा के ऊपर से उसके एक मम्मे को दबाया। वो गरम और मुलायम था। जैसे ही मैंने जोर से दबाया, वो सिहर उठी और एक हल्की सी सिसकारी निकली।
उसका कंट्रोल अब पूरी तरह खो चुका था। उसका एक हाथ मेरी कमर पर था, दूसरा धीरे-धीरे नीचे की तरफ सरकने लगा। फिर अचानक उसने मेरे लौड़े पर हाथ रख दिया। मेरी जींस के ऊपर से ही वो उसे सहलाने लगी। मैं सिहर उठा। उसने मेरी बेल्ट की बकल खोली, जींस का बटन खोला और ज़िप नीचे कर दी। मेरी जींस घुटनों तक खिसक गई।
मैंने भी अब इंतजार नहीं किया। मैंने उसके ब्लाउज के हुक खोले और ब्रा को पीछे से खींचकर उतार दिया। उसके मम्मे आजाद हो गए। गोरे, गोल, भरे हुए, निप्पल्स हल्के गुलाबी और सख्त। मैंने दोनों मम्मों को दोनों हाथों से पकड़ा और जोर-जोर से मसलने लगा। वो कराह रही थी, “आह… जीजाजी… धीरे… लेकिन रुकना मत…”
फिर मैंने उसकी पेटीकोट की डोरी खींची और साड़ी को नीचे सरका दिया। अब वो सिर्फ पैंटी में थी। मैंने उसकी पैंटी को उतारने की बजाय दोनों तरफ से पकड़कर एक झटके में फाड़ डाली। कपड़ा चीरने की आवाज आई और वो अब मेरे सामने पूरी तरह नंगी खड़ी थी। उसकी चिकनी, गोरी त्वचा, पतली कमर, भरी हुई जांघें और बीच में वो गीली, गुलाबी चूत – सब कुछ देखकर मेरी आँखें चकरा गईं।
मैं भी अब पूरी तरह तैयार था, कुश्ती के लिए।
हम दोनों बिस्तर पर आ गए। मैं उसकी चूत में अपना लंड पेलने को पूरी तरह तैयार था। मेरा लंड पहले से ही सख्त और फड़क रहा था, और उसकी चूत गीली होकर चमक रही थी।
वो बोली, “जीजू… पहले मेरी चूत तो चाटो… तब तक मैं आपका लंड चूसती हूँ।” उसकी आवाज में एक भूख थी, एक ऐसी ललक जो मुझे और उत्तेजित कर रही थी।
हम दोनों ने तुरंत 69 की पोजीशन बना ली। वो मेरे ऊपर थी, उसकी जांघें मेरे चेहरे के दोनों तरफ थीं, और उसकी गीली चूत मेरे मुँह के ठीक सामने। मैंने अपनी जीभ निकाली और पहले उसके क्लिटोरिस को हल्के से चाटा। वो सिहर उठी और एक लंबी सिसकारी ली। मैंने अपनी जीभ को और अंदर डाला, उसकी चूत की दीवारों को चाटते हुए, उसका रस चूसते हुए। उसका स्वाद मीठा-नमकीन था, जो मुझे और पागल कर रहा था।
इसी बीच वो मेरे लंड को मुँह में ले चुकी थी। उसने पहले सुपारे को जीभ से घुमाया, फिर धीरे-धीरे पूरा लंड मुँह में ले लिया। वो जोर-जोर से चूस रही थी, ऊपर-नीचे कर रही थी, कभी गहरे तक ले जा रही थी तो कभी बाहर निकालकर सुपारे को चाट रही थी। उसकी लार मेरे लंड पर बह रही थी, और मैं महसूस कर रहा था कि मैं कब तक रुक पाऊंगा।
वो बीच-बीच में मुँह से लंड निकालकर बोली, “आशु मेरी जान… प्लीज… मुझे हमेशा तुम ही चोदना… मेरा पति मुझे कभी ऐसा मजा नहीं देता है। वो बस दो मिनट में खत्म हो जाता है।” उसकी बातें सुनकर मेरी उत्तेजना और बढ़ गई।
अब मैं और इंतजार नहीं कर सका। मैंने उसे पीठ के बल लिटाया, उसकी जांघें फैलाईं और अपना लंड उसकी चूत पर रखा। पहले सुपारे से ही मैंने उसके क्लिटोरिस को रगड़ा, वो कराह रही थी, “आह… डाल दो जीजू… जल्दी…”
फिर मैंने एक झटके में पूरा लंड अंदर पेल दिया। उसकी चूत इतनी टाइट और गीली थी कि लंड पूरा अंदर चला गया। वो चीखी, “आह्ह्ह… कितना मोटा है तेरा…” मैंने धीरे-धीरे पंपिंग शुरू की, पहले हल्के झटके, फिर तेज। हर थ्रस्ट पर उसके मम्मे उछल रहे थे। मैंने उसके मम्मों को दोनों हाथों से पकड़ा और जोर-जोर से दबाते हुए चोदता रहा।
वो अपनी कमर उठा-उठाकर मेरे झटकों का जवाब दे रही थी। उसकी चूत मेरे लंड को कसकर पकड़ रही थी। मैंने स्पीड बढ़ाई, अब जोर-जोर से पेल रहा था। कमरे में सिर्फ चप्पड़-चप्पड़ की आवाज और उसकी सिसकारियाँ गूंज रही थीं।
कुछ मिनट बाद वो चीखी, “आशु… मैं झड़ रही हूँ… आह्ह्ह…” उसकी चूत सिकुड़ने लगी, वो ऑर्गेज्म में थी। मैं भी अब रुक नहीं पाया। मैंने आखिरी कुछ जोरदार थ्रस्ट दिए और उसके अंदर ही झड़ गया। गर्म-गर्म वीर्य उसकी चूत में भर गया।
हम दोनों थककर एक-दूसरे के बगल में लेट गए, सांसें तेज चल रही थीं।
उसके बाद मेरी शादी हो गई, लेकिन आज भी जब भी मैं ग्वालियर जाता हूँ, रजनी की चुदाई जरूर करता हूँ। वो इंतजार करती रहती है, और मैं उसे पूरा मजा देता हूँ।
यह थी मेरी पहली कहानी। मेरी चुदाई की कहानियाँ और भी हैं… आगे जरूर लिखूंगा।
आपको मेरी कहानी कैसी लगी?
टेलीग्राम चैनल जॉइन करें - रोज़ाना नई कहानी अपडेट के लिए
Related Posts