अंधेरे में पेड़ के पीछे लेस्बियन सेक्स

Naked walk sex story – Night out sex story – outdoor sister lesbian sex story: हेल्लो दोस्तों, मैं कनिका अपनी कहानी का अगला भाग लेकर फिर हाजिर हूँ तथा आपने पिछली कहानी में पढ़ा था कि हम दोनों बहनों ने बाथरूम में पहली बार लेस्बियन सेक्स किया था तथा रितिका लंड लेने के लिए पूरी तरह पागल हो गई थी तथा बस में जाने की जिद कर रही थी।

कहानी का पिछला भाग: बहनों की लेस्बियन चुदाई और लंड की तलब

अब आगे की कहानी सुनिए, थोड़ी देर में मम्मी पापा मार्केट से लौट आए तथा मम्मी ने आते ही मुझे पूरी दोपहर सोने के लिए डांट लगाई तथा फिर पूछा कि रितिका कहाँ है तो मैंने कहा कि रूम में है तथा मम्मी बोली कि देखो हम लोग डिनर करके आए हैं तथा तुम्हारा डिनर पैक करा लाए हैं तथा अब तुम देख लो कहाँ खाना चाहती हो या तो रूम में ले जाकर खा लो या यहीं खा लो तुम्हारी मर्जी तथा हम बहुत थक गए हैं तथा सोने जा रहे हैं तथा मैंने कहा ठीक है।

फिर मैंने सारा डिनर प्लेट में लगाया तथा रितिका को आवाज दी लेकिन वो नहीं आई तो मैं समझ गई कि अब ऊपर जाकर ही उसे मनाना पड़ेगा तथा फिर मैं डिनर प्लेट में लगाकर ऊपर ले गई तथा रितिका एक कोने में गुस्सा होकर बैठी थी तथा उसने अभी तक कुछ नहीं पहना था तथा उसकी गोरी त्वचा रूम की लाइट में चमक रही थी।

मैंने उससे बोला पागल ऐसे गुस्सा नहीं होते तथा कुछ पहन ले मम्मी पापा आ गए हैं तथा वो गुस्से में बोली न मुझे कुछ खाना है न ही मैं कुछ पहनूंगी तथा मैंने मजाक करते हुए कहा तो तू सारी जिंदगी ऐसे ही नंगी रहेगी तथा वो मुँह फेर कर बैठ गई तथा मैं उसके पास गई तथा उसकी नंगी पीठ पर हाथ फेरते हुए बोली जो तू सोच रही है वो कभी नहीं हो सकता रितिका बहुत ज्यादा रिस्की काम है तो इस बात पर वो गुस्सा होकर बोली रिस्की माई फुट।

मैं भी उसे समझा समझाकर हार गई थी तथा मैंने थक हार कर कहा चल कल देखते हैं तथा उसके होठों पर मुस्कान आ गई तथा वो तुरंत मुझसे लिपट गई तथा बोली सच कल चलेगी तू तथा मैंने कहा हाँ देखते हैं कल चल सकते हैं कि नहीं तथा फिर वो बोली कि नहीं कल पक्का चलेंगे तथा अगर वो ही बस मिल गई तो अंदर चलकर मजे लेंगे तथा तू चिंता मत कर हमें कुछ नहीं होगा तथा मैंने बोला चल ठीक है चल तू अब कुछ पहन ले तथा फिर डिनर करते हैं तथा उसने टॉप और शॉर्ट्स पहन लिया तथा फिर हम लोगों ने डिनर किया तथा फिर उसने कहा चल डिनर के बाद बाहर एक राउंड घूम कर आते हैं।

तो मैं बोली मम्मी पापा नहीं जाने देंगे तो वो बोली अरे अपनी कॉलोनी में क्या डर यहाँ तो घूम ही सकते हैं तथा फिर मैंने कहा चल मैं पूछती हूँ तथा फिर मैं पूछने मम्मी के रूम में गई तो देखा कि गेट हल्का सा खुला था तथा मैंने गेट और दरवाजे के बीच की हल्की सी दरार से अंदर देखा तो काफी अंधेरा दिखा तथा मैंने सोचा शायद पापा मम्मी सो गए हैं तो मैंने हल्के से दरवाजा बंद किया तथा रितिका को नीचे आने का इशारा किया।

फिर रितिका नीचे आ गई तथा उसने सफेद कलर का टॉप और नीचे छोटे शॉर्ट्स पहन रखे थे तथा मैंने भी गुलाबी टॉप और नीचे लाल कलर का पायजामा पहन रखा था तथा मैंने रितिका को देखा कि वो शॉर्ट्स में ही उतरकर आ रही है तो मैंने उससे धीरे से बोला पागल है क्या तू तथा वो बोली क्यों तथा मैंने कहा शॉर्ट्स में ही बाहर चलेगी क्या तथा उस पर वो हंसी और फिर बोली हाँ तथा मैंने उसकी ओर देखा और फिर बोली इतने छोटे शॉर्ट्स पहनकर बाहर निकलेगी तो सड़क पर सब तुझे ही देखेंगे तुझे शर्म नहीं आएगी।

वो बोली अरे यार इतनी रात को बाहर कोई नहीं होगा तथा ऊपर से कोई देख भी लेगा तो क्या तथा मैंने उसकी ओर देखा तथा उसके बेफिक्र चेहरे पर चुदने की इच्छा को देखकर मैं मुस्कुरा दी तथा उसके चूतड़ों पर हल्का सा थप्पड़ मारा तथा बोली तू तो बिल्कुल रंडी हो गई है तथा उसने मेरी ओर देखा तथा मुस्कुराते हुए मेरे चूतड़ पर हल्का सा जोर का थप्पड़ मारा तथा बोली आखिर हूँ तो तेरी छोटी बहन ही ना तथा फिर हम दोनों एक दूसरे की तरफ हंस पड़े तथा मैंने मेन गेट खोला तथा हम दोनों बाहर आ गए तथा बाहर रोड बिल्कुल खाली था तथा हमारे घर से हर बीस मीटर के अंतराल में एक रोड लाइट थी।

रोड पर पांच स्ट्रीट लाइट लगी हुई थीं तथा फिर उसके बाद तो पूरे रोड पर अंधेरा था तथा फिर एक दूसरे के साथ मजाक करते हुए हम दोनों उसी रोड पर चल दिए तथा धीरे धीरे हम सारी स्ट्रीट लाइट पार कर गए तथा फिर अंधेरे वाले रोड देखकर मैंने रितिका से कहा कि चल लौट चलते हैं तो इस पर वो बोली अरे लाइट में घूमने का क्या मजा अंधेरे में घूमते हैं मजा आएगा तथा मैंने फिर रितिका को देखा तथा मुस्कुरा दी तथा फिर हमने घूमना जारी रखा तथा अंधेरे में चलते चले गए।

फिर बात करते करते रितिका अपना टॉप उतारने लगी तथा मैं देखती रह गई कि वो क्या पागलपन कर रही है तथा मैं जब तक कुछ बोलती उससे पहले उसने अपने बूब्स बिल्कुल नंगे कर दिए तथा उसके गोरे बूब्स ठंडी हवा में काँप रहे थे तथा मैंने उसे धीरे से कहा कि क्या पागलपन कर रही है रितिका तू मरवाएगी क्या कोई देख लेगा तुझे ऐसे तो तथा वो बोली अरे रोड पर कोई नहीं है तथा अपने बदन को ताजी हवा खिला रही हूँ तथा मैंने कहा पागल हो गई है तू तो वो बोली तू भी उतारकर देख बड़ा अच्छा सा महसूस हो रहा है तथा मैंने कहा नहीं मैं तेरी तरह पागल नहीं हूँ।

इसे भी पढ़ें  बुआ के घर में बुआ की चूत चुदाई

फिर उसने अपने शॉर्ट्स भी उतार दिए तथा बिल्कुल नंगी हो गई तथा अब मैं क्या बोलती वो तो बिल्कुल पागलपन कर रही थी तथा मैंने गुस्से में रितिका से बोला क्या पागलपन कर रही है तू अरे किसी ने देख लिया तो क्या होगा तुझे कोई नहीं बचा पाएगा लेकिन उसे तो किसी बात का डर ही नहीं था वो बोली अरे इस रोड पर कोई नहीं आता कनिका कुछ नहीं होगा तथा मैंने कहा तू पागल है तथा यह कहकर मैंने उससे उसके कपड़े लिए तथा जबरदस्ती उसे कपड़े पहनाने लगी लेकिन वो कहाँ मानने वाली थी वो मुझसे दूर भागने लगी तथा मैं उसके पीछे कपड़े लेकर भाग रही थी तथा वो आगे आगे नंगी भाग रही थी तथा उसकी गांड हिल रही थी।

मैं आखिरकार थक कर बोली कि रुक रितिका पागलपन मत कर मेरे लिए कपड़े पहन ले तथा वो बोली तू पागल है मैं नहीं पहन रही तो तुझे क्या तथा देख रोड पर अब तक कोई नहीं आया तथा तू फालतू में परेशान हो रही है तथा फिर मैंने भी देखा कि रोड सुनसान ही था यह देखकर मेरी थोड़ी हिम्मत बढ़ी तभी रितिका ने पीछे से आकर मेरा पायजामा नीचे कर दिया तथा मेरा पायजामा नीचे होते ही मैं पैंटी में आ गई लेकिन अगले ही सेकंड उसने मेरी पैंटी भी नीचे खींच दी तथा फिर मैं पीछे मुड़ी तथा पैंटी और पायजामा ऊपर करते हुए रितिका को मारने भागी।

लेकिन फिर मैंने भी सोचा कि ट्राई करते हैं शायद बाहर नंगा होने का अलग ही मजा हो यह सोचकर मैंने अपना पायजामा और पैंटी उतारकर अपने कंधे पर रख लिए तथा फिर मैं अपना टॉप उतारकर बिल्कुल नंगी हो गई तथा यह देख रितिका मुस्कुराते हुए मेरे पास आई तथा बोली कि देख आया ना मजा तथा मैंने उसे ऊपर से नीचे देखा तथा उसे देख मुस्कुरा दी तथा बोली हाँ मजा तो आ रहा है लेकिन बस कोई देख न ले तथा फिर रितिका बोली कि तू पागल है यहाँ पर कोई नहीं आता है तथा वो मुझे पूरी सड़क दिखाने लगी।

फिर हम नंगे ही घूमने लगे तथा पूरे बदन पर ठंडी ठंडी हवा महसूस हो रही थी तथा जब मेरे चूतड़ और चूत पर हवा का स्पर्श होता तो पूरा बदन सरसरा उठता तथा घबराहट तो थी कि कोई देख न ले लेकिन उससे ज्यादा अब उत्तेजना होने लगी थी तथा मेरी चूत गीली हो रही थी तथा फिर रितिका जानबूझकर धीरे धीरे चलने लगी तथा मैं उससे आगे हो गई तथा फिर वो मेरे पीछे चलती हुई बोली कि हाय तेरी क्या गजब चाल है बिल्कुल मॉडल्स जैसी।

फिर मैंने कहा अच्छा तथा फिर मैं रितिका के पीछे गई तथा बोली कि नहीं तेरी चाल है बिल्कुल मॉडल्स जैसी तथा फिर उसके कूल्हों को हल्का सा नोचा तथा मेरे नोचते ही उसके मुँह से हल्की सी आह्ह निकली तथा वो जैसे ही मेरी तरफ मुड़ी तो मैंने उसे कसकर अपनी ओर खींचा तथा फिर उसका स्मूच ले लिया तथा वो पहले तो पीछे हटने की कोशिश करने लगी लेकिन फिर वो भी मेरा साथ देने लगी तथा मैं स्मूच करते हुए उसके चूतड़ों को मसलने लगी तथा उसके चूतड़ों की नरमी मेरी हथेलियों में महसूस हो रही थी।

फिर उसने भी पंजे उठाकर अपनी चूत मेरी चूत से बिल्कुल चिपका दी तथा हम दोनों ऐसे ही एक दो मिनट तक स्मूच करते रहे तथा हमारे मुँह से चपचप चूम्म्म की आवाजें आ रही थीं तथा तभी मुझे किसी के पैरों की आहट सुनाई दी तथा मैं एकदम डर गई तथा रितिका से दूर हट गई तथा फिर मैंने रोड के किनारे लगे एक पेड़ के पीछे उसे खींच लिया तथा फिर आहट तेज होती गई तथा उधर मेरे दिल की धड़कन भी तेज होती जा रही थी तथा रितिका भी यह सोच रही थी कि पता नहीं कौन है तथा चिंता उसके चेहरे पर भी साफ दिख रही थी तथा वो चौकीदार था वो हमारी परछाई देखकर शायद यहाँ आ गया था तथा फिर वो देखने लगा कि कौन है।

मैं बुरी तरह डर गई थी तथा रितिका को बिल्कुल अपनी बाहों में जकड़ लिया था तथा पेड़ में कम से कम जगह में हम दोनों सिमटने की कोशिश करने लगी जिससे कि हम पेड़ के पीछे छुप जाएँ तथा वो हमें देख न पाए तथा रितिका के बूब्स पेड़ के तने से सट गए तथा मैं बिल्कुल रितिका के पीछे उसकी गांड से अपनी चूत सटा कर खड़ी हो गई तथा मेरी चूत उसकी गांड की दरार में रगड़ खा रही थी।

कुछ देर उसने देखा लेकिन कोई नहीं दिखने पर वो जाने लगा तब मेरी जान में जान आई लेकिन पता नहीं क्या सोचकर वो वापस मुड़ा तथा फिर वापस हमारे पेड़ की तरफ आने लगा तथा मेरी धड़कन फिर से तेज हो गई तथा रितिका को भी डर लग रहा था तथा उस समय मैं यह उसके बदन के थरथराने से महसूस कर सकती थी तथा चौकीदार हमारे पेड़ के आगे आकर खड़ा हो गया तो मुझे लगा कि अब बस हम पकड़े गए तो यह अब हमारे साथ सेक्स करके ही हमें छोड़ेगा या हमारे पापा मम्मी को सब बता देगा तथा यह सोच मैंने अपनी आँखें बंद कर बस बचने की मन्नत करने लगी।

इसे भी पढ़ें  भाई बहन की करतूतें (long story)

फिर तभी मुझे चेन खुलने की आवाज आई तथा मैंने और रितिका ने पेड़ के पीछे से देखा तो चौकीदार ने अपनी पैंट की चेन खोली हुई थी तथा अपनी पैंट का बटन खोलकर अपनी चड्डी नीचे सरका रहा था तथा फिर उसने जैसे ही अपनी चड्डी नीचे सरकाई तो उसका कम से कम सात इंच बड़ा लंड झूलता हुआ बाहर आ गया तथा हम दोनों का मुँह फटा का फटा रह गया तथा जब उसका लंड बाहर आया था तो खड़ा था तथा उसकी मोटाई देखकर मेरी चूत में सनसनी सी दौड़ गई।

फिर उसके लंड से पेशाब बाहर आने लगा तथा जैसे ही पेशाब गिरने की मात्रा कम हुई वैसे वैसे उसके लंड का आकार भी छोटा होता गया तथा फिर आखिरी में उसने अपने लंड को हिला कर अपनी बची हुई दो चार बूंद भी गिरा दी तथा मैं यह देख अपना डर तो भूल गई थी ऊपर से गर्म भी हो गई थी तथा रितिका बिल्कुल पेड़ के तने से सटकर खड़ी थी तथा उससे बिल्कुल चिपककर मैं खड़ी थी तथा मेरी चूत उसकी गांड से चिपकी हुई थी तथा मेरे बूब्स उसके कंधे को टच कर रहे थे तथा लंड देखकर मेरा हाथ अपने आप रितिका की चूत को सहलाने लगा लेकिन रितिका का ध्यान चौकीदार के लंड पर ही था तथा फिर चौकीदार ने अपनी चड्डी वापस पहनी तथा पैंट ऊपर की तथा वो वापस चला गया।

फिर तब रितिका को मेरे हाथ का स्पर्श अपनी चूत पर होने का पता चला तथा वो मेरी ओर मुड़ी तथा फिर हमने एक दूसरे के होंठ से होंठ मिला दिए तथा वो मेरे होठों को चूसने लगी तथा फिर मैंने उसकी एक टाँग उठाकर अपनी कमर पर टिका ली जिससे मुझे उसकी चूत के दरवाजे का आसानी से रास्ता मिल गया तथा फिर मैं उसकी चूत को तेजी से रगड़ने लगी तथा रगड़ते रगड़ते वो झड़ने की कगार पर आ गई लेकिन मैं उसकी चूत को और तेजी से सहलाने लगी तथा वो मेरे बूब्स को मसलने लगी तथा उसकी सिसकारियाँ निकलने लगीं आह्ह ह्ह्ह कनिका और जोर से।

फिर मैंने उसके होंठ चूसना छोड़ा तथा हल्का सा नीचे झुककर उसके निप्पल्स को चूमा तथा फिर धीरे धीरे उसके निप्पल्स को चूसना शुरू कर दिया तथा दूसरी ओर उसकी चूत में अपनी एक उंगली डालकर अंदर बाहर करने लगी तथा हम दोनों अभी तक वर्जिन थे इसलिए उसकी चूत बड़ी टाइट थी तथा उंगली ज्यादा अंदर तक नहीं जा रही थी लेकिन मैंने भी अधिक कोशिश न करते हुए जितनी उंगली अंदर गई थी उसे ही अंदर बाहर करने लगी तथा उसको हल्का सा दर्द तो हुआ लेकिन बाद में उसे मजा आने लगा तथा फिर उसने अपनी आँखें बंद कर ली तथा मजे में खो गई तथा मैं उसके निप्पल को चूसने के बाद धीरे धीरे उसकी नाभि को चूसते हुए उसकी चूत तक पहुँच गई।

फिर मैंने रितिका को अपने पैर छोड़ने को कहा तथा उसने मेरे दोनों पैर छोड़ दिए तथा मैं उसके दोनों पैरों के बीच बैठ गई तथा फिर मैंने उसकी चूत के होठों से अपने होंठ मिला दिए तथा दो चार बार उनको चूमा तथा फिर मैंने उसकी चूत को चूसना शुरू कर दिया तथा वहाँ ऐसे बैठने से मेरी गांड खुल गई थी तथा उसमें ताजी ताजी हवा लग रही थी तथा रितिका की चूत को चूसते चूसते बड़ा मजा आ रहा था तथा उसकी चूत की गीली महक मेरी नाक में भर रही थी।

मैंने अपने दोनों हाथों से उसके चूतड़ की दरार को फैलाया तथा फिर अपनी उंगली से उसकी गांड के छेद को सहलाने लगी तथा वो सिसकारियाँ भरने लगी आह्ह्ह ह्ह्ह तथा फिर मैंने उसकी चूत में अपनी जीभ डाल दी तथा मेरी जीभ का स्पर्श पाते ही वो थरथरा उठी तथा चूत में अंदर कुछ देर तक जीभ फेरने के बाद तथा मैंने अपनी जीभ उसकी चूत से बाहर निकाल दी तथा दो चार बार फिर से चूत को चूमा तथा फिर उसकी कमर पकड़ कर मैंने उसको पलट दिया जिससे अब उसकी गांड मेरे सामने थी तथा फिर मैंने उसे पंजों पर खड़ा होने को कहा उसने वैसा ही किया तथा मैंने उसकी चूत से लेकर गांड के छेद पर दो चार बार जीभ फेरी।

वो पागल हो उठी तथा फिर मैंने उसकी गांड के छेद को चूसना शुरू कर दिया तथा वो कुछ ही देर में झड़ गई तथा उसकी चूत बिल्कुल गीली हो गई तथा पेड़ से लिपटते हुए जमीन पर चूतड़ों के बल बैठ गई तथा उसकी साँसें बहुत तेज चल रही थीं तथा फिर मैं भी उसके बगल में बैठकर उसके बूब्स को सहलाने लगी तथा वो कुछ देर में नॉर्मल हो गई तथा फिर उसने मुझसे उसके ऊपर खड़े होने को कहा मैं खड़ी हो गई तथा वो मेरे पैरों के बीच में बैठ गई तथा मेरी चूत को चूसने लगी तथा मैं भी उसके होठों का स्पर्श अपनी चूत पर होने की वजह से पागल हो गई तथा मैं उसके सिर को पकड़ कर अपनी चूत से उसके मुँह को सटा दिया।

इसे भी पढ़ें  बहन ने भाई की गांड मारते देखा और खुद चुत मरवाई

फिर कुछ देर तक वो मेरी चूत चूसती रही तथा मैं अपने हाथों से अपने ही बूब्स को सहलाती रही तथा फिर उसने मेरी चूत को चूसते चूसते मेरी चूत में उंगली डाल दी तथा उंगली डालते ही मैं हल्का सा उछल पड़ी तथा फिर वो अपनी उंगली अंदर बाहर करने लगी तो मुझे भी मजा आने लगा तथा और वो अपने मुँह को मेरी गांड के छेद के ऊपर ले गई तथा अपने दोनों होठों को मेरी गांड के छेद पर रख दिया तथा चूसने लगी तथा इस तरह कुछ देर में ही मैं झड़ गई तथा रितिका के ऊपर ही गिर गई तथा उसके होठों को चूमने लगी तथा वो भी मेरे होठों को चूमने लगी तथा कुछ देर में रितिका के ऊपर ही पड़ी रही।

फिर हम दोनों उठे तथा रितिका ने मुझसे पूछा कि बाहर सेक्स करने में कैसा मजा आया तो मैंने कहा यार तू सही थी बहुत मजा आया तथा फिर हम दोनों नंगे ही रोड पर चल दिए तथा वॉक करते हुए मेरी गांड में ताजी ताजी हवा लग रही थी बड़ा मजा आ रहा था तथा चलते चलते कभी मैं रितिका के चूतड़ को मसल देती तो कभी वो मेरी चूत मसल देती तथा फिर हम एक दूसरे को नंगे देखकर हंस रहे थे तथा तभी पता नहीं कब हम लाइट के उजाले में आ गए तथा हमने ध्यान नहीं दिया कि हम अब सबको नजर आ सकते हैं तथा जब हम अपने पड़ोसी के घर के सामने थे तथा जब हमने उनके गेट खोलने की आवाज सुनी तो हमें होश आया तथा हम सीधे अपने घर की ओर भागे।

लेकिन इतने में उनका गेट खुला तथा श्रीमती अग्रवाल जो कि हमारे पड़ोसी हैं वो बाहर आई लेकिन वो हमारा चेहरा देख पाती उससे पहले हम भाग गए तथा उनको लगा शायद कोई जानवर होगा तथा फिर हम भागते भागते अपने घर में घुस गए तथा फिर रितिका ने मेन गेट बंद किया तथा लेकिन दरवाजा लगाने में हल्की सी आवाज हो गई तो मैंने उससे कहा कि धीरे धीरे नहीं तो मम्मी पापा जाग जाएंगे तथा अगर उन्होंने हमें ऐसे देख लिया तो पता नहीं क्या होगा तथा फिर हम गेट को लॉक करके ऊपर अपने रूम में भाग गए तथा अपना रूम लॉक कर हम एक दूसरे को देखकर इतना हँसे कि पेट में दर्द ही होने लग गया तथा फिर रितिका ने अपने कपड़े एक तरफ फेंके तथा बेड पर कूद गई।

फिर मैंने कहा कपड़े नहीं पहनेगी तो वो बोली जब बाहर नहीं पहने तो अंदर रूम में क्यों पहने आज ऐसे ही नंगे सोते हैं तथा मैंने कहा और जब सुबह माँ आएंगी तो चूतड़ों पर डंडे देंगी तो वो बोली अरे माँ नॉक करके आएंगी ना तथा रूम तो लॉक है जब तू खोलने जाए तो मुझे जगा देना तभी कपड़े पहन लेंगे तथा माँ भी जानती हैं दिल्ली की गर्मी को तो कुछ नहीं बोलेगी तथा मैंने भी सोचा कि रितिका सही कह रही है तथा मैंने भी अपने कपड़े एक तरफ फेंके तथा अपने बेड पर लेट गई।

फिर रितिका बोली मेरे बेड पर ही आ जा रात भर मजे करेंगे तथा मैं बोली नहीं मैं अब थक गई हूँ अब मैं सोने जा रही हूँ तथा कितने मजे करेगी तू तो वो बोली तू पूरे दिन तो सोई है तुझे अब रात में नींद कहाँ से आएगी तथा फिर मैं अपने बेड से उठी तथा रितिका के बगल में जाकर लेट गई तथा उसने अपना एक हाथ फिर से मेरी चूत पर रख दिया तथा मेरी चूत की दरार में अपनी हल्की सी उंगली अंदर कर दी तथा चूत को अपनी उंगली से सहलाने लगी तथा मैंने भी उसे जो कर रही थी करने दिया तथा फिर उसने मेरी ओर देखा तथा पूछा फिर कल कब चलेगी तू तथा मैंने कहा यार तू भी तथा वो बोली क्या तू भी।

फिर मैंने कहा हम मजे ले तो रहे हैं इतना रिस्क लेने की क्या जरूरत है तो वो बोली यार वो मजा अलग ही होगा उसके आगे यह सब तो कुछ नहीं है वो तो अपने लिए मस्त माहौल होगा तथा मैंने कहा ठीक है चल कल शाम को देखते हैं वो बोली ठीक है फिर उसने लाइट ऑफ कर दी तथा थोड़ी देर बाद ऐसे ही चिपके चिपके हम कब सो गए पता ही नहीं चला।

आगे की कहानी अगले भाग में।

कहानी का अगला भाग: दो कुँवारी बहनों की पहली सामूहिक चुदाई बस में

Related Posts

Leave a Comment