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प्रेग्नेंट बनाया पापा ने मुझे

हेलो, मेरा नाम रूपा है। मेरी उम्र 21 साल है, और मैं अभी अनमैरिड हूँ। मेरा फिगर 36C-28-35 है, और मैं दिखने में काफी हॉट हूँ, ऐसा मेरे दोस्त और सहेलियाँ कहती हैं। मेरी स्किन गोरी है, लंबे काले बाल हैं, और मेरी आँखें भूरी हैं, जो हर किसी को अपनी ओर खींच लेती हैं। मैं एक 4 बेडरूम वाले फ्लैट में रहती हूँ, जिसमें एक ड्रॉइंग रूम भी है। एक कमरा मेरा है, एक मेरे भाई का, एक मम्मी-पापा का, और एक गेस्ट रूम है। मेरे पापा, जिनका नाम रमेश है, 45 साल के हैं, लंबे-चौड़े, गठीले बदन वाले, और चेहरे पर हमेशा एक गंभीर सी मुस्कान रहती है। मेरी मम्मी, सुनीता, 42 साल की हैं, स्लिम और खूबसूरत हैं। मेरा भाई, राहुल, 23 साल का है, इंजीनियरिंग स्टूडेंट है, और पुणे में हॉस्टल में रहता है।

जब मैं 11वीं क्लास में थी, तब से मैं पोर्न मूवीज देखने लगी थी। शुरुआत में सहेलियों ने कुछ वीडियो शेयर किए, और फिर ये मेरी आदत बन गई। मैं अक्सर रात को अपने कमरे में पोर्न देखते हुए मास्टरबेट करती थी। कभी उँगलियाँ, तो कभी गाजर, मूली, ककड़ी, या फिर बेलन—जो भी मिलता, मैं अपनी चूत में डालकर अपनी वासना को शांत करने की कोशिश करती थी। लेकिन जितना मैं ऐसा करती, मेरी भूख उतनी ही बढ़ती जाती थी। मेरे मन में असली मर्द के लंड की चाहत जागने लगी थी, पर डर और शर्म की वजह से मैंने कभी किसी से कुछ कहा नहीं।

12वीं क्लास में थी, तभी मेरी नानी की तबीयत खराब हो गई। मम्मी को उनके पास गाँव जाना पड़ा। भाई पहले से ही पुणे में था, तो घर में सिर्फ मैं और पापा रह गए। मम्मी के जाने के बाद दूसरी रात थी। मैंने किचन से सारा काम खत्म किया और एक गाजर और मूली अपने कमरे में ले गई। अपने रूम में जाकर मैंने दरवाजा बंद किया, कंप्यूटर पर एक हॉट पोर्न मूवी लगाई, और अपने सारे कपड़े उतार दिए। मैं बिल्कुल नंगी होकर बिस्तर पर बैठ गई। स्क्रीन पर एक लड़की जोर-जोर से चिल्ला रही थी, “आह्ह… और जोर से… चोदो मुझे!” और मैंने धीरे-धीरे अपने बूब्स दबाना शुरू किया। मेरे निपल्स टाइट हो गए थे, और मेरी चूत में गीलापन बढ़ने लगा था। मैंने मूली उठाई, उसे अपनी चूत के मुँह पर रगड़ा, और धीरे-धीरे अंदर डाल लिया। “उफ्फ… आह्ह…” मैं सिसकियाँ लेने लगी। मूली को अंदर-बाहर करते हुए मैं पूरी तरह मस्त हो गई थी। मेरी आँखें बंद थीं, और मैं बस उस पल में खोई हुई थी।

तभी अचानक दरवाजे पर खट-खट की आवाज आई। “रूपा, दरवाजा खोल!” पापा की आवाज थी। मैं एकदम घबरा गई। मेरी साँसें रुक सी गईं। मैं नंगी थी, मूली मेरी चूत में थी, और स्क्रीन पर पोर्न मूवी चल रही थी। मैंने जल्दी से मूली निकाली, बेडशीट से चूत साफ की, और फटाफट कपड़े पहनने लगी। जल्दबाजी में मैंने सिर्फ रेड लोअर और व्हाइट टॉप पहना, ब्रा-पैंटी पहनना भूल गई। मैंने कंप्यूटर बंद करना भी भूल गई। डरते-डरते मैंने दरवाजा खोला।

पापा ने गुस्से में पूछा, “इतनी देर क्यों लगाई? क्या कर रही थी?”

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मैं हड़बड़ाई, “क…कुछ नहीं पापा, बस पढ़ाई कर रही थी।”

पापा ने भौंहें चढ़ाईं, “नींद नहीं आ रही थी, सोचा तुझसे थोड़ी बात कर लूँ।”

मैंने कहा, “पापा, मैं थक गई हूँ, सोने जा रही हूँ।”

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पापा ने कहा, “बस 5 मिनट, बेटी,” और वो अंदर आ गए। जैसे ही वो अंदर आए, उनकी नजर कंप्यूटर स्क्रीन पर पड़ी। पोर्न मूवी जोर-शोर से चल रही थी। एक लड़की स्क्रीन पर चिल्ला रही थी, “ऊह्ह… हाँ… और जोर से!” पापा और मैं दोनों शॉक्ड रह गए।

पापा ने गुस्से में कहा, “ये क्या है, रूपा? ये है तेरी पढ़ाई?”

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मैं कुछ बोल ही नहीं पाई। मेरी नजर बिस्तर पर पड़ी, जहाँ गीली मूली, गाजर, और मेरी ब्रा पड़ी थी। पापा की नजर भी वहाँ गई। उन्होंने मूली उठाई, जो मेरे चूत के रस से गीली थी।

पापा ने सख्त आवाज में कहा, “ये सब क्या है? कपड़े ठीक से पहन और मेरे रूम में आ!” उन्होंने पोर्न मूवी की सीडी निकाली और अपने साथ ले गए।

मैंने जल्दी से ब्रा पहनी, वही रेड लोअर और व्हाइट टॉप डाला, और पापा के रूम में गई। पापा ने वो सीडी अपने डीवीडी प्लेयर पर लगा रखी थी। स्क्रीन पर फिर वही हॉट सीन चल रहा था। पापा ने मुझे रूम लॉक करने को कहा। मैंने डरते-डरते दरवाजा लॉक किया।

पापा ने पूछा, “रूपा, ये सब क्या है? तू ब्लू फिल्में देखती है?”

मैं शर्म से सिर झुकाए बोली, “वो… पापा, बस…”

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“कब से देख रही है ये सब?”

“11वीं से,” मैंने धीमी आवाज में कहा।

“ओह माय गॉड!” पापा हैरान थे। “ये सीडी कहाँ से मिली?”

“मेरी सहेलियाँ लाती हैं,” मैंने सच बोला।

“मजा आता है ये देखने में?”

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मैंने शरमाते हुए कहा, “हाँ।”

पापा ने पूछा, “तू जानती है, ये सब शादी के बाद होता है?”

मैंने कहा, “हाँ, पर मेरी सहेलियाँ कहती हैं कि शादी से पहले सब जानना जरूरी है।”

पापा ने गहरी साँस ली और बोले, “अच्छा, तो तू क्या-क्या करती है ये देखने के बाद? बता, शरमाओ मत।”

मैंने हिचकते हुए कहा, “मैं अपने बूब्स दबाती हूँ… और…”

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“और क्या? बोल!”

“पहले उँगलियाँ डालती थी, अब गाजर, मूली, ककड़ी डालती हूँ।”

“मजा आता है?”

“हाँ,” मैंने सिर हिलाया।

पापा ने मुझे अपने पास बुलाया और अपनी गोद में बिठा लिया। उनका स्पर्श गर्म था, और मेरे दिल की धड़कन तेज हो गई।

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पापा ने धीरे से कहा, “रूपा, आज हम इस मूवी की तरह करेंगे। मेरा साथ देगी?”

मैं हड़बड़ा गई, “प…पापा, लेकिन…”

“कोई लेकिन-वेकिन नहीं। मैं जानता हूँ, तेरी वासना बहुत बढ़ गई है। मैं तुझे सब सिखा दूँगा।”

मैंने हल्का सा सिर हिलाया, “ठीक है, पापा। वैसे भी मैं किसी से सेक्स करना चाहती थी।”

पापा ने मेरे होंठों को चूमना शुरू किया। उनके होंठ गर्म और नरम थे। वो मेरे होंठों को चूस रहे थे, जैसे कोई भूखा शेर अपनी शिकार को खा रहा हो। उनके दोनों हाथ मेरे बूब्स पर थे, और वो उन्हें जोर-जोर से दबा रहे थे। “उम्म… आह्ह…” मेरी सिसकियाँ निकलने लगीं। मेरे निपल्स टाइट हो गए, और मेरी चूत गीली होने लगी। करीब 10 मिनट तक वो मेरे होंठ चूसते रहे, मेरी जीभ को अपनी जीभ से चाट रहे थे। फिर उन्होंने मेरा टॉप उतार दिया। मेरी ब्लैक ब्रा में मेरे बूब्स उभरे हुए थे। पापा ने मेरे गले, कंधों, और छाती को चूमना शुरू किया। उनकी गर्म साँसें मेरी स्किन पर महसूस हो रही थीं।

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धीरे से उन्होंने मेरी ब्रा के हुक खोले, और मेरे बूब्स आजाद हो गए। मेरे निपल्स गुलाबी और टाइट थे। पापा ने एक निपल को मुँह में लिया और चूसना शुरू किया। “आह्ह… पापा… उफ्फ…” मैं सिसक रही थी। उनकी जीभ मेरे निपल पर गोल-गोल घूम रही थी, और दूसरा हाथ मेरे दूसरे बूब को दबा रहा था। वो मेरी गांड को भी सहला रहे थे, मेरी पैंटी के ऊपर से ही मेरी गांड को मसल रहे थे। मैं पूरी तरह मदहोश हो रही थी। पापा ने अपनी बनियान उतारी। उनका सीना चौड़ा और मस्कुलर था। करीब 15 मिनट तक वो मेरे बूब्स चूसते रहे, मेरे निपल्स को हल्के से काट रहे थे। मेरी चूत अब पूरी तरह गीली थी, और मेरी पैंटी चिपचिपी हो चुकी थी।

पापा ने मेरा लोअर नीचे खींचा, और अब मैं सिर्फ ब्लैक पैंटी में थी। उन्होंने मुझे बिस्तर पर लिटाया और अपनी लुंगी उतार दी। मैं शॉक्ड रह गई। पापा ने अंदर कुछ नहीं पहना था। उनका लंड 8 इंच लंबा और मोटा था, पूरी तरह टाइट। उसकी नसें उभरी हुई थीं, और टोपा गुलाबी और चमक रहा था।

मैंने डरते हुए पूछा, “पापा, इसे लंड कहते हैं ना?”

पापा हँसे, “हाँ, बेटी। इसी से तेरा जन्म हुआ है।”

वो मेरे ऊपर झुके और मेरे पूरे बदन को चूमने लगे। मेरे गले से लेकर मेरे पेट तक, उनकी जीभ मेरी स्किन पर फिसल रही थी। मैं सिसक रही थी, “आह्ह… पापा… उफ्फ…” मेरी पैंटी अब पूरी तरह भीग चुकी थी। पापा ने मेरी पैंटी उतारी और मेरी चूत को देखकर बोले, “क्या मस्त चूत है तेरी, बेटी!”

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उन्होंने अपनी जीभ मेरी चूत पर रखी और चाटना शुरू किया। उनकी जीभ मेरी चूत के दाने को छू रही थी, और मैं पागल हो रही थी। “आह्ह… ओह्ह… पापा… उफ्फ…” मैं सिसकियाँ ले रही थी। पापा ने मेरी चूत के रस को चाटा, और उनकी उँगलियाँ मेरी चूत के अंदर-बाहर होने लगीं। मैं झड़ गई। मेरी साँसें तेज थीं, और मेरा बदन काँप रहा था।

पापा ने कहा, “अब तेरी चूत को असली लंड का मजा देता हूँ।”

मैंने डरते हुए कहा, “पापा, आपका लंड बहुत बड़ा है। मेरी चूत छोटी है, दर्द होगा।”

पापा ने मेरी टाँगें चौड़ी कीं और अपने लंड का टोपा मेरी चूत पर रगड़ा। मैं मदहोश हो रही थी। “उफ्फ… आह्ह…” मेरी सिसकियाँ तेज हो गईं। अचानक पापा ने अपने लंड का टोपा मेरी चूत में डाल दिया। मैं चिल्लाई, “आह्ह… माँ… दर्द हो रहा है!”

पापा रुके और बोले, “बस, थोड़ा दर्द होगा, फिर मजा आएगा।”

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उन्होंने एक और जोरदार झटका मारा, और उनका पूरा लंड मेरी चूत में समा गया। मैं चीख पड़ी, “उह्ह… माँ… मर गई!” मेरी आँखों में आँसू आ गए। पापा 2 मिनट तक रुके, फिर धीरे-धीरे लंड को अंदर-बाहर करने लगे। दर्द धीरे-धीरे कम होने लगा, और मजा आने लगा। “आह्ह… पापा… उफ्फ…” मैं सिसक रही थी। पापा ने स्पीड बढ़ाई, और अब वो जोर-जोर से झटके मार रहे थे। “चप… चप… चप…” मेरी चूत से आवाजें आ रही थीं।

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“आह्ह… पापा… और जोर से… उफ्फ…” मैं चिल्ला रही थी। पापा बोले, “ले बेटी, तुझे रंडी बना दूँगा आज!”

करीब 10 मिनट की चुदाई के बाद, पापा की पिचकारी छूट गई। उनका गर्म वीर्य मेरी चूत में भर गया। मैं जन्नत में थी। पापा मेरे ऊपर ढेर हो गए। 20 मिनट बाद, वो फिर उठे और बोले, “मेरा लंड चूस, बेटी।”

मैंने उनके लंड को मुँह में लिया। उसका स्वाद नमकीन और गर्म था। मैंने ब्लू मूवी की तरह उनके लंड को चूसा। थोड़ी देर बाद उनका लंड फिर टाइट हो गया। पापा ने मुझे कुतिया बनाया और पीछे से मेरी चूत में लंड डाल दिया। “आह्ह… उफ्फ… पापा…” मैं फिर सिसकने लगी। वो जोर-जोर से झटके मार रहे थे। “चप… चप… चप…” मेरी चूत की आवाज कमरे में गूँज रही थी। करीब 25 मिनट तक वो मुझे चोदते रहे। मैं फिर झड़ गई।

मैंने कहा, “पापा, मेरे मुँह पर वीर्य निकालो।”

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पापा ने लंड बाहर निकाला और मेरे चेहरे के पास लाए। उनकी पिचकारी छूटी, और गर्म वीर्य मेरे होंठ, गाल, और आँखों पर गिरा। हम दोनों नंगे ही बिस्तर पर सो गए।

सुबह 5 बजे पापा ने मुझे फिर चोदा। दिन की छुट्टी थी, तो हम 9 बजे तक सोते रहे। मैं बाथरूम गई, और पापा भी मेरे साथ आ गए। हमने शावर में भी चुदाई की। मैंने नंगी ही चाय और नाश्ता बनाया। पापा और मैं डाइनिंग टेबल पर नंगे ही बैठे। कामवाली के आने से पहले मैंने नाइटी पहनी, और पापा ने लुंगी। उसके जाने के बाद हम फिर नंगे हो गए और दोपहर में दो बार चुदाई की।

जब तक मम्मी वापस नहीं आईं, हम रोज रात को चुदाई करते। एक रात मैं पापा के साथ नंगी सो रही थी, तभी मम्मी का फोन आया।

मम्मी: “कैसी हो, बेटी?”

मैं: “मैं ठीक हूँ, मम्मी। यहाँ सब ठीक है।”

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मम्मी: “मुझे और दिन रुकना पड़ेगा। तुम सब संभाल लोगी ना?”

मैं: “हाँ, मम्मी, चिंता मत करो।”

एक महीने तक पापा ने मुझे बिना कंडोम के चोदा। मेरा पीरियड मिस हो गया, और टेस्ट में पता चला कि मैं प्रेग्नेंट हूँ। मैंने एबॉर्शन पिल्स लीं, और सब ठीक हो गया। पापा ने फिर कंडोम के साथ चुदाई शुरू की, पर मुझे मजा नहीं आता था। मैंने पिल्स लेना शुरू किया, और पापा ने बिना कंडोम के चुदाई जारी रखी। पापा ने मुझे पूरी रंडी बना दिया।

जब मेरा भाई राहुल घर आया, उसने मुझे और पापा को देख लिया। उसने भी मुझे चोदा, और मैं उसके लंड की भी दीवानी हो गई।

तो दोस्तों, कैसी लगी मेरी कहानी? प्रेग्नेंट बनाया पापा ने मुझे, और फिर भाई ने भी मुझे रंडी बना दिया। अगर आपके लंड में दम है, मेरी चूत की गर्मी शांत करने की ताकत है, तो मुझे जरूर लिखें। मैं आपके कमेंट्स का इंतजार करूँगी।

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