Mature housewife gangbang sex story – Mom son incest sex story – Shop sex story: ये कहानी तब की है जब आँचल अपनी बड़ी बहन की बेटी की शादी के लिए शॉपिंग करने निकली थी। आँचल एक हाउसवाइफ है, उम्र 46 साल, उसका पति अमित बैंकर है और अच्छी कमाई करता है, जिसके पैसे आँचल खुशी-खुशी शॉपिंग और फिटनेस पर खर्च करती है। जिम में रोज़ वर्कआउट करने की वजह से 46 साल की उम्र में भी उसका जिस्म किसी कामदेवी से कम नहीं लगता। उसके 34D के भरे-भरे स्तन, 28 इंच की पतली कमर, गहरी नाभि और 40 इंच की गोल-मटोल गाँड हर मर्द को पागल कर देती है। वो अपनी कामुकता दिखाने में कभी पीछे नहीं हटती।
उसका बेटा शिखर 22 साल का जवान लड़का है, जो अपनी माँ को नंगा देखने और चोदने के सपने देखता रहता है। वो अपनी 19 साल की बहन अनन्या को भी चोद चुका है, लेकिन वो कहानी फिर कभी।
शादी का समय नजदीक था, इसलिए डिनर के वक्त आँचल ने अमित से कहा, “वर्षा की शादी तय हो गई है, अगले हफ्ते है, हमें शॉपिंग कर लेनी चाहिए।” अमित ने कहा, “ठीक है, मेरा क्रेडिट कार्ड ले लो और कल शिखर के साथ जाकर शॉपिंग कर लो।” आँचल ने मुस्कुराते हुए शिखर से पूछा, “चलोगे ना बेटा?” शिखर तुरंत राज़ी हो गया।
अगले दिन दोपहर बारह बजे आँचल ने कहा, “शिखर चलो, देर हो जाएगी, मैं कपड़े बदलने जा रही हूँ, तुम भी बदल लो।” कपड़े बदलने का नाम सुनते ही शिखर चुपके से माँ के कमरे की तरफ बढ़ा। आँचल ब्लाउज़ और पेटिकोट में थी, उसने धीरे-धीरे ब्लाउज़ और ब्रा उतार दी। उसके गोरे-गोरे मोटे स्तन देखकर शिखर का लंड तुरंत खड़ा हो गया। फिर आँचल ने पेटिकोट और पैंटी भी उतार दी और पूरी नंगी होकर अलमारी की तरफ गई। ये नजारा देख शिखर बर्दाश्त न कर सका, उसने मूठ मारना शुरू कर दिया और जल्दी ही झड़ गया। फिर वो अपने कमरे में कपड़े बदलने चला गया।
लिविंग रूम में बैठे शिखर ने आवाज़ लगाई, “माँ, मैं तैयार हूँ, तुम जल्दी आओ।” आँचल ने मुस्कुराते हुए कहा, “हाँ बेटा आ रही हूँ, दरवाजे पर तुमने जो सफेद पानी गिराया है, उसे साफ तो कर दूँ।” ये सुन शिखर के पसीने छूट गए। तभी आँचल लिविंग रूम में आई। काली साड़ी और काला लो-कट ब्लाउज़ पहने वो कयामत लग रही थी। साड़ी इतनी नीचे बंधी थी कि एक इंच और नीचे होती तो चूत के बाल दिखने लगते। ब्लाउज़ में गहरी क्लीवेज और पीठ पूरी नंगी। शिखर का लंड फिर खड़ा हो गया, आँखें फटी की फटी रह गईं।
आँचल ने मुस्कुराकर पूछा, “कैसी लग रही हूँ?” शिखर ने हकलाते हुए कहा, “अच्छी।” आँचल ने फिर पूछा, “अच्छी या बहुत अच्छी?” शिखर बोला, “बहुत अच्छी माँ।” आँचल ने शरारत से कहा, “बहुत अच्छी या माल?” शिखर घबरा गया, “ये क्या कह रही हो माँ, मैं तुम्हारा बेटा हूँ।” आँचल हँसकर बोली, “अच्छा? इस बेटे को अपनी नंगी माँ देखकर मूठ मारने में शर्म नहीं आई?” शिखर ने सर झुकाकर कहा, “सॉरी माँ, सच में सॉरी।” आँचल ने पास आकर उसके होंठों पर अपने लाल होंठ रख दिए और दोनों किस करने लगे। शिखर ने माँ के एक स्तन को दबाना शुरू किया तो आँचल ने रोक दिया।
शिखर ने गिड़गिड़ाते हुए कहा, “प्लीज़ माँ, करने दो ना।” आँचल ने मुस्कुराकर कहा, “आज नहीं, आज शॉपिंग करनी है, माँ का दूध पीने के लिए पूरी रात पड़ी है, वैसे भी तुम्हारे डैडी आज घर नहीं आएंगे और अनन्या होस्टल में रुक रही है, रात भर मजे कर लेना।” शिखर खुश हो गया और फिर किस करने लगा। दोनों शॉपिंग के लिए निकल पड़े।
एक घंटे बाद मॉल में पहुँचकर आँचल बोली, “आज मॉल में बिल्कुल भीड़ नहीं है।” शिखर ने कहा, “शायद ऑफ-सीज़न की वजह से।” पहले उन्होंने मेन्स वेयर शॉप में शिखर के कपड़े खरीदे। शॉपकीपर्स आँचल के जिस्म को आँखों से चोद रहे थे, आँचल ये सब नोटिस कर रही थी और मन ही मन मुस्कुरा रही थी। वो भी थोड़ी मस्ती करने लगी, शॉपकीपर से बोली, “भैया जरा वो ब्लू पैंट निकालना।” शॉपकीपर घबरा गया तो आँचल हँसकर बोली, “अरे आप तो नर्वस हो गए, मैंने आपकी पैंट उतारने को तो नहीं कहा।” ऐसे मज़ाक करके वो अगली दुकान पर चले गए। करीब चालीस मिनट में शिखर के कपड़े हो गए।
अब आँचल साड़ी की दुकान में जाने लगी तो शिखर से बोली, “बेटा तुम यहाँ बोर हो जाओगे, फिल्म देख आओ या कुछ खा लो, शॉपिंग खत्म होने पर कॉल कर दूँगी।” शिखर चला गया। आँचल साड़ी की दुकान में घुसी, वहाँ पाँच शॉपकीपर्स और कुछ महिला ग्राहक थे। एक शॉपकीपर माधव आगे आया और बोला, “हेलो मैम, मैं माधव, आपकी क्या मदद करूँ?” आँचल ने कहा, “शादी के लिए कुछ साड़ियाँ चाहिए।” माधव ने दस-पंद्रह साड़ियाँ दिखाईं, आँचल ने तीन पसंद करके कहा, “इन्हें ट्राय कर सकती हूँ?” माधव ने ट्रायल रूम दिखाया।
ट्रायल रूम से बाहर आकर माधव अपने दोस्त रिंकू से फुसफुसाया, “अबे क्या माल है यार, साड़ी इतनी नीचे पहनी है कि चूत के बाल दिख रहे हैं।” रिंकू बोला, “पीछे से गाँड की दरार साफ नज़र आ रही है, मैंने फोटो भी ले ली।” दोनों ने प्लान बनाया कि आज इसे चोदेंगे। आँचल ने तीन साड़ियाँ फाइनल कीं और बिल बनाने निकली। माधव बोला, “मैम हमारे यहाँ नया ब्रा-पैंटी सेक्शन भी खुला है, इन साड़ियों के लिए मैचिंग ब्रा-पैंटी देखेंगी?” आँचल को थोड़ा शक हुआ, लेकिन वो भी मूड में थी, बोली, “ठीक है चलिए।”
माधव उसे एक अलग कमरे में ले गया जहाँ ढेर सारी ब्रा-पैंटी लगी थीं। आँचल ने कहा, “ग्रीन साड़ी के लिए मैचिंग ब्रा दिखाइए।” माधव ने ब्रा दी। आँचल ने पूछा, “ट्राय कहाँ करूँ?” रिंकू बोला, “सॉरी मैम यहाँ ट्रायल रूम नहीं है।” आँचल ने शरारत भरी नज़रों से कहा, “तो मुझे कैसे पता चलेगा साइज़ सही है या नहीं?” माधव बोला, “कोई बात नहीं मैम, यहीं ट्राय कर लीजिए।” आँचल ने मुस्कुराकर पूछा, “तुम दोनों के सामने?” रिंकू बोला, “अरे मैम परेशान न हों, ये तो हमारा रोज़ का काम है।”
आँचल ने पल्लू गिराया, लो-कट ब्लाउज़ से आधे स्तन चमका दिए। दोनों के मुँह में पानी आ गया। फिर आँचल ने माधव की आँखों में देखकर एक हुक खोला, रिंकू की आँखों में देखकर दूसरा। मादक अंगड़ाई लेकर ब्लाउज़ उतारा और माधव को पकड़ा दिया। फिर ब्रा का हुक खोलकर दोनों स्ट्रैप्स नीचे सरका दीं और कप्स हाथ से पकड़कर नीचे कर दिए। उसके भरे हुए गोरे स्तन दोनों के सामने लहराने लगे। दोनों के लंड पैंट में तंबू बना चुके थे।
आँचल आगे बढ़ी और माधव से बोली, “मेरी साड़ी उतारने में मदद करोगे?” माधव ने उत्साह से कहा, “क्यों नहीं।” आँचल ने पल्लू उसके हाथ में दिया और कहा, “खींचो।” माधव खींचता गया और आँचल गोल-गोल घूमते हुए साड़ी उतारती गई। साड़ी पूरी उतरते ही आँचल ने पेटिकोट का नाड़ा खोला और वो नीचे गिर गया। उसकी गोरी मांसल जाँघें चमकने लगीं। फिर पीठ फेरकर पैंटी उतारते हुए गाँड का पूरा नजारा दिखाया। पूरी नंगी होकर वो दोनों की तरफ मुड़ी और बोली, “तो अब ब्रा-पैंटी ट्राय करें या?”
उससे पहले ही माधव ने उसके होंठ चूसने शुरू कर दिए, रिंकू पीछे से गाँड चाटने लगा और चूत में उंगली करने लगा। आँचल पहले से ही गीली थी। माधव ने उसके स्तनों को जोर-जोर से दबाया और फिर चूसने लगा। आँचल सिसकियाँ भरने लगी, “आह्ह चूस मेरे राजा, जोर से चूस्स्स, ओह्ह्ह।” रिंकू बोला, “साली रांड, आज तुझे मसल देंगे।” दोनों ने अपने टाइट लंड बाहर निकाले, आँचल घुटनों पर बैठ गई और एक-एक करके चूसने लगी, ग्ग्ग्ग ग्ग्ग्ग गी गी गों गों गोग, दोनों का रस उसने पी लिया।
माधव ने आँचल को टेबल पर लिटाया और चूत चाटने लगा। आँचल की सिसकियाँ तेज हो गईं, “आह्ह्ह इह्ह्ह ओह्ह्ह माधव, जीभ अंदर डाल, चाट मेरी चूत को, ऊउइइ ऊईईई।” रिंकू ने अपना लंड उसके मुँह में ठूँस दिया। दस मिनट तक चूसने-चटवाने के बाद आँचल तड़प उठी, “चलो अब लंड घुसाओ, प्लीज़ सहन नहीं होता, चोदो मुझे हरामियों।” रिंकू ने उसकी एक टांग कंधे पर रखी और एक झटके में पूरा लंड चूत में घुसेड़ दिया। आँचल चीख उठी, “हे भगवान मादरचोद निकाल, दर्द हो रहा है भड़वे।” माधव ने अपना लंड मुँह में डालकर चुप करा दिया।
थोड़ी देर बाद दर्द कम हुआ और आँचल मजे लेने लगी, “आह ह ह ह ह्हीईई फक मी, जोर से फक मी, फास्टर रिंकू, ऊओह्ह्ह आअह्ह्ह।” रिंकू ने स्पीड बढ़ाई, आँचल झड़ गई, चूत से पानी की फव्वारा सा निकला, वो मछली की तरह तड़पने लगी। फिर माधव ने जगह ली और अपना मोटा लंड घुसेड़ दिया। आँचल फिर सिसकियाँ भरने लगी, “कम ऑन माधव, फक मी हार्ड, मुझे रंडी बना दो, और जोर से, फाड़ दे मेरी चूत।” माधव ने पूरी ताकत लगाई, आँचल फिर झड़ गई।
आँचल ने कहा, “माधव ज़मीन पर लेट जाओ।” माधव लेट गया, आँचल उसके लंड पर बैठ गई और ऊपर-नीचे होने लगी। दोनों किस करने लगे। तभी रिंकू ने पीछे से गाँड में सुपाड़ा घुसेड़ दिया। आँचल फिर चीखी, “मादरचोद अपनी माँ की गाँड मार, मेरी क्यों, हीईए भगवान।” लेकिन रिंकू ने रहम नहीं किया और गाँड मारने लगा। आँचल रोते-रोते चुदाई का मज़ा लेने लगी। दोनों ने जगह बदली, अब रिंकू चूत में और माधव गाँड में। पच्चीस-पैंतीस मिनट तक दोनों चूत-गाँड बदल-बदलकर ठोकते रहे। आँचल की गाँड ढीली हो चुकी थी, वो भी साथ देने लगी, “और जोर से, मुझे ऐसे चोदो जैसे अपनी माँ को चोदते हो, आह्ह्ह ऊओह्ह्ह।” आखिर दोनों ने एक साथ चूत और गाँड में झड़ दिया। तीनों नंगे एक-दूसरे पर पड़े रहे।
माधव बोला, “वाह मज़ा आ गया।” रिंकू ने कहा, “साली तुझे तो रंडी होना चाहिए।” आँचल हँसकर बोली, “चलो अब कपड़े पहनो।” कपड़े पहनते हुए आँचल ने पूछा, “तुम्हारी दुकान में सभी औरतों को ऐसी सर्विस मिलती है?” माधव बोला, “सबको नहीं, सिर्फ खास कस्टमर्स को।” आँचल ने रिंकू से कहा, “और तू रिंकू, अपनी माँ को ऐसे ही चोदता है क्या, हरामी।” रिंकू ने सॉरी कहा। आँचल बोली, “मैचिंग ब्रा-पैंटी का बिल?” दोनों ने कहा, “फ्री।” आँचल मुस्कुराकर साड़ियाँ लेकर बाहर आई और शिखर को पार्किंग में बुलाया।
शिखर ने देखकर पूछा, “माँ तुम्हारे बाल बिखरे हुए हैं, ऐसा लग रहा है किसी ने जबरदस्ती की।” आँचल बोली, “जबरदस्ती नहीं, बस थोड़ा मज़ा।” शिखर ने पूछा, “किससे चुदकर आई हो?” आँचल ने कहा, “बस दो शॉपकीपर्स थे।” ये सुन शिखर माँ पर टूट पड़ा। एक मिनट में साड़ी, पेटिकोट, ब्लाउज़ उतार दिया और पूछा, “ब्रा-पैंटी कहाँ है?” आँचल बोली, “वहीं छोड़ दी।” शिखर ने खड़े-खड़े चूत में लंड घुसेड़ दिया और ठोकने लगा।
आँचल ने कहा, “बेटा घर चलकर करो प्लीज़।” शिखर बोला, “नहीं माँ अब सहन नहीं होता।” आँचल ने हार मान ली, “आह्ह्ह चोद बेटा चोद, तू सच में बड़ा हो गया, जोर से ठोक अपनी माँ को, आह ह ह ह्हीईई।” शिखर बोला, “माँ तुम बहुत गर्म हो, मैं ज्यादा देर नहीं टिक पाऊँगा।” आँचल बोली, “बस चोदता रह, लंबी चुदाई घर पर करेंगे, ऐसे ही बेटा ऐसे ही, वाह मेरा बेटा, आअह्ह्ह।” शिखर झड़ने लगा, आँचल बोली, “अंदर ही झड़ बेटा, भर दे अपनी माँ की चूत।” शिखर ने पूरा रस चूत में डाल दिया। रस जाँघों पर बहने लगा, आँचल ने हाथ पर लिया और चाट लिया, “उम्म्म तेरा रस तो टेस्टी है, चल घर चल, आज इस कुएँ का सारा पानी पी जाऊँगी।”
घर पहुँचकर शिखर ने माँ को हर कोने में, हर पोज़ीशन में चोदा। लिविंग रूम में, बेडरूम में, किचेन में खाना बनाते वक्त, खाते वक्त, बाल्कनी में, यहाँ तक कि मूतते वक्त भी। पूरी रात माँ-बेटे की चुदाई चलती रही। आँचल कॉलेज के दिनों के बाद पहली बार इतना चुदी थी और शिखर की वो रात सबसे यादगार रही।