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मां को चोदा, फिर नानी और बहन भी

Maa beta sex story, nani chudai kahani, behan bhai chudai, mother son sex story, grandma sex story, sister brother sex story: मेरा नाम रमन है और मैं दिल्ली में रहता हूं। मैं एक गिगोलो हूं। मेरे गिगोलो बनने की कहानी बहुत लंबी है। मेरी अपनी मम्मी और बड़ी मासी ने मुझे गिगोलो बनाया है। ये कहानी बहुत लंबी है इसलिए मैं इसे कई पार्ट में लिख रहा हूं, पहला पार्ट ये है। मेरी ये कहानी तब की है जब मैं 18 साल का था और कॉलेज में पढ़ता था। मेरी बहन की उमर 19 साल की थी।

मेरे पापा की उमर 42 साल और मम्मी की उमर 36 साल की थी। पापा-मम्मी की हमेशा लड़ाई होती रहती थी। मेरी दो मासियां हैं। एक मम्मी से बड़ी हैं, उनकी दो बेटियां और एक बेटा है और दूसरी मासी की शादी नहीं हुई है। मेरी बड़ी मासी मेरे पापा-मम्मी को लड़ाती रहती थीं। इसी कारण मम्मी पापा से अलग हो गईं और अपने मायके अपनी मां यानी नानी के पास चली गईं और हमें भी साथ ले गईं।

नानी के घर में सिर्फ नानी और मासी रहती थीं। बड़ी मासी अलग घर में रहती थीं। मामा-मामी को नानी ने घर से अलग कर दिया था, वो उसी घर में एक कमरे में अलग रहते थे। नानी बहुत गरीब थीं। इसलिए मासी ही कमाती थीं। वो नाइट क्लब में डांस करती थीं। शाम को निकलतीं और सुबह 4 बजे वापस आतीं, फिर सारा दिन सोती रहतीं। अब मम्मी भी मासी के साथ काम पर जाने लगीं।

घर में सिर्फ दो कमरे थे। एक कमरे में हम सब नीचे बिस्तर लगाकर सोते थे। दूसरे कमरे में बेड था, वो मेहमानों के लिए था। घर में अजनबी आदमियों का आना-जाना लगा रहता था। वो रात में मासी के साथ उसी कमरे में रुकते और सुबह हमारे उठने से पहले चले जाते। अब मम्मी भी रात को उसी कमरे में जातीं और वहीं सोतीं। उस दिन मासी हमारे साथ सो जातीं।

हमें पता चल गया था कि मासी और मम्मी उस कमरे में क्या करती हैं, पर हम कुछ नहीं कह सकते थे। गरीबी में हम सब उसी माहौल में ढल गए। मम्मी और मासी के पास कपड़े बहुत कम थे। मेरे और बहन के पास भी पुराने कपड़े। दिन में पहनने के लिए सिर्फ एक जोड़ी मिलती थी, रात को धोकर सुबह पहन लेते।

मासी और मम्मी रात को सिर्फ ब्रा और छोटी कच्छी में सोती थीं। मेरे और बहन के पास अंडरवियर नहीं था, इसलिए हम रात को नंगे सोते थे। बहन की चूत पर हल्के बाल थे, चूचियां नॉर्मल साइज की। मम्मी और मासी की चूचियां बड़ी-बड़ी थीं। मेरा लंड 8 इंच का था। सोने की लाइन में सबसे पहले नानी, फिर बहन, फिर मैं और मेरे साथ मम्मी या कभी मासी।

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रात को मैं मम्मी से चिपककर सोता। मम्मी मेरे मुंह को अपनी चूची में दबा लेतीं, टांगें खोलकर मेरे चूतड़ अपनी टांगों के बीच दबा लेतीं। मेरा लंड उनकी चूत पर चिपका रहता। उनकी ब्रा इतनी छोटी कि सिर्फ निप्पल ढकते, पूरी चूची नंगी। कच्छी सिर्फ चूत ढकती, मोटे चूतड़ खुले रहते।

एक रात मैंने मम्मी की ब्रा और कच्छी उतार दी, उन्हें पूरी नंगा किया। पहले मैंने धीरे से उनकी ब्रा के हुक खोले, चूचियां आजाद हो गईं, निप्पल सख्त हो चुके थे। फिर कच्छी नीचे सरकाई, उनकी गीली चूत सामने आ गई, बालों से हल्की ढकी हुई। मैंने अपना लंड उनकी चूत पर रखा और धीरे-धीरे रगड़ने लगा, ऊपर-नीचे घिसता रहा, उनकी चूत के होंठ मेरे सुपारे से रगड़ खा रहे थे। मम्मी की सांसें तेज हो रही थीं, लेकिन वो सोती हुईं लग रही थीं। मैंने स्पीड बढ़ाई, लंड की नसें फूलने लगीं, घिसाई से गर्मी बढ़ती गई। दो घंटे तक ये सिलसिला चला, कभी धीरे, कभी जोर से, उनकी चूत गीली होकर चिकनी हो गई। आखिर मेरा पानी छूट गया, गर्म-गर्म वीर्य उनकी चूत और पेट पर फैल गया, कुछ बूंदें उनकी जांघों पर भी गिरीं। मैं डर गया और चुपचाप सो गया। सुबह मम्मी ने कुछ नहीं कहा।

अगले दिन फिर वही। मैंने उन्हें नंगा किया, ब्रा और कच्छी उतारकर साइड रखी। चूत पर लंड रगड़ा, लेकिन इस बार मम्मी ने आंखें खोल लीं। उन्होंने अपनी टांगें और चौड़ी कीं, हाथ से मेरा लंड पकड़ा, सुपारे को सहलाया, फिर अपनी चूत के मुहाने पर रखकर धक्का दिया। मेरा लंड धीरे-धीरे अंदर सरकने लगा, उनकी चूत गर्म और टाइट थी, दीवारें मेरे लंड को जकड़ रही थीं। पूरा अंदर जाने पर मैं रुक गया, सांस ली, फिर धक्के मारने लगा, पहले धीरे-धीरे, बाहर निकालकर फिर अंदर। मम्मी की सिसकारियां निकलने लगीं, आह्ह… ओह्ह… मैंने स्पीड बढ़ाई, हर धक्के में फच-फच की आवाज, उनकी चूत का रस मेरे लंड पर लग रहा था। मैं उनकी चूचियां दबाता रहा, निप्पल चूसता रहा। एक घंटे बाद मेरा क्लाइमैक्स आया, मैंने जोर से धक्का मारा और पानी उनकी चूत के अंदर छोड़ दिया, गर्म वीर्य भर गया। फिर लंड अंदर डालकर सो गया। अब ये रोज हो गया।

सुबह बहन जगाने आती तो हम चिपके हुए नंगे सोते। घर में शर्म खत्म हो गई। मम्मी-मासी या तो ब्रा-कच्छी में या पूरी नंगी रहतीं। मैंने मासी को कई बार चोदने की कोशिश की लेकिन मौका नहीं मिला। वो नंगी रहतीं पर चुदाई का मौका नहीं आया।

एक रात मम्मी नहीं थीं। मुझे चुदाई के बिना नींद नहीं आती थी। मैंने बहन के चूतड़ पर हाथ रखा। पहले हल्के से सहलाया, फिर धीरे-धीरे उसकी चूत की तरफ बढ़ा, उंगली से होंठ रगड़े। एक हाथ से चूची दबाई, निप्पल मसला। बहन जाग गई, लेकिन रुकी नहीं, गर्म हो गई, सांसें तेज। रोज मम्मी-मेरी चुदाई देखकर वो उंगली डालकर मुठ मारती थी। आज वो पूरी गर्म हो गई।

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वो मेरे लंड को मुंह में लेने लगी। पहले सुपारे को चाटा, जीभ घुमाई, फिर मुंह में लिया, अंदर-बाहर करने लगी। 30 मिनट तक चूसी, कभी धीरे, कभी गले तक ठूंसती, ग्ग्ग्ग… गी… गों… गोग… मैंने उसके बाल पकड़कर मुंह में धक्के मारे, वो गले तक लेती रही, आह्ह… इह्ह… ओह्ह… लार बह रही थी, मेरे लंड पर चिपक रही थी।

फिर मैंने उसकी चूत चाटी। पहले जांघें चाटीं, फिर जीभ से होंठ फेरे, क्लिट को चूसा, हल्का काटा। उंगली अंदर डाली, धीरे-धीरे घुमाई, अंदर-बाहर। वो कमर उछाल रही थी, आह्ह… भैया… और चाटो… ओह्ह… इह्ह… चूत गीली हो गई, रस बहने लगा। मैंने तेज चाटा, जीभ अंदर डाली, उंगली तेज की, वो कांप रही थी, ऊउइ… आऊ… उसकी चूत सिकुड़ने लगी।

फिर मैंने चूत पर लंड रखा। धीरे सुपारा अंदर किया, वो सिकुड़ी, आह्ह… धीरे भैया… मैंने हल्का धक्का मारा, आधा लंड अंदर, फिर पूरा धक्का मारा, लंड पूरी गहराई में। फच… फच… की आवाज। वो नीचे से कमर उछाल रही थी, आह्ह… बड़ा है तेरा… चोदो जोर से… मैंने स्पीड बढ़ाई, धक्के जोर-जोर से, चूचियां चूसीं, निप्पल काटे, गर्दन चाटी। वो बोली, फाड़ दो मेरी चूत… आह्ह… ऊई… मैं 20 मिनट तक पेलता रहा, हर धक्के में उसकी चूत जकड़ती। वो दो बार झड़ गई, चूत सिकुड़ रही थी, रस बह रहा था। आखिर मैंने जोर से धक्का मारा और अंदर पानी छोड़ दिया। हम हांफ रहे थे।

तभी नानी जाग गईं। उन्होंने रोक दिया। नानी ने बहन की चूत में उंगली डाली, पहले एक, फिर दो, तेज घुमाई, क्लिट रगड़ी। बहन सिसकारी, आह्ह… नानी… ओह्ह… कमर उछालकर झड़ गई, रस निकला।

फिर मैंने नानी को चोदा। धीरे-धीरे हाथ जांघों के बीच ले गया। कपड़े ऊपर उठाए, जांघें सहलाईं, फिर खींचे, जांघें पूरी नंगी। चूत बालों से भरी, गीली लग रही थी। हाथ से सहलाया, होंठ रगड़े, चूत मसली, उंगली अंदर डाली। मेरा लंड खड़ा हो गया। नानी ने लंड पकड़ा, हथेली से मसला, ऊपर-नीचे किया।

नानी फुसफुसाईं, चल मेरे साथ। मैं उनके पीछे गया। कमरे में दरवाजा बंद किया। नानी बिस्तर पर लेटीं, टांगें फैलाईं। चूत खुली, ढीली चूचियां बाहर लटक रही थीं। नानी ने मुझे बुलाया। लंड हाथ में लिया, सहलाया, सुपारे का घूंघट हटाया, मुठ मारी। चूची से रगड़ा, अंडे दबाए, हल्के से मसले।

फिर मुझे ऊपर खींचा, लंड चूत पर रगड़ा, सुपारे को गीला किया। मैंने टांगें और फैलाईं, सुपारा मुहाने पर रखा, जोर का झटका मारा। आधा लंड अंदर, उनकी चूत ढीली लेकिन गर्म। फिर पूरा धक्का, लंड गहराई में उतर गया। नानी बोलीं, “दिनू वाकई तुम्हारा लंड जांदार है रे…”

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काफी दिनों से चूत को लंड नहीं मिला, चोद मेरे राजा चोद… उफ्फ्फ… मैं धक्के मारने लगा, पहले धीरे, बाहर निकालकर फिर अंदर। नानी नीचे से कमर उछाल रही थीं, आह्ह… ओह्ह… 15 मिनट पेलने के बाद नानी दो बार झड़ीं, चूत सिकुड़ी, रस बहा। मैंने जोर से धक्का मारा और अंदर पानी छोड़ दिया। थोड़ी देर शांत रहे।

फिर नानी बोलीं, “क्यों, फिर अपनी नानी को चोदेगा?” मैं फिर चिपक गया, लंड उनकी चूत में डाला, धीरे-धीरे धक्के मारे। उस रात चार बार चुदाई की, हर बार फोरप्ले से शुरू, चूचियां चूसकर, चूत चाटकर। आखिरी बार घोड़ी बनाईं, पीछे से लंड डाला, चूत में ठूंसकर धक्के मारे, चूतड़ दबाए, थप्पड़ मारे, चूचियां मसलीं। रोज रात नानी को तीन-चार बार चोदता रहा।

सुबह मम्मी-मासी आईं। हम नंगे सो रहे थे। मम्मी कपड़े उतारकर मेरे पास लेटीं, लंड सहलाने लगीं। हाथ में लेकर बोलीं, “तुम मेरे boobs चूसो…” मैं चूसने लगा, एक चूची मुंह में ली, निप्पल काटा, जीभ फेरी, फिर दूसरी, नीचे नाभि तक जीभ ले गया, पेट चाटा। लंड खड़ा हो गया। मम्मी बोलीं, “हाय कितना शानदार लंड है… मैं तो इसकी दीवानी हूं…”

मम्मी ने लंड चूसा, लॉलीपॉप की तरह, सुपारे को चाटा, मुंह में लिया, अंदर-बाहर, ग्ग्ग्ग… गी… गों… आह्ह… ओह्ह… जीभ घुमाई, गले तक ठूंसकर। फिर लंड चूत पर रखा, रगड़ा, धक्का मारा, घचाक… अंदर। मम्मी चिल्लाईं, “ओओउई… naughty boy… मार दिया रे… और तेज…” मैं तेज धक्के मारने लगा, हर ठोकर में चूत जकड़ती। मम्मी नीचे से उछाल रही थीं, “जोर से चोद… अपनी मां की चूत लूट ले… आह्ह… स्वर्ग पहुंचा दिया…”

मैंने जोर-जोर से पेला, चूचियां दबाईं, गर्दन चूसी, 20 मिनट तक सिलसिला चला, मम्मी झड़ीं, फिर मैंने पानी अंदर छोड़ा। मम्मी बोलीं, “ऐसे ही हमेशा चोदना… मैं जन्मों की प्यासी हूं…” मैंने कहा, “तुम जब चाहो, मैं तैयार मिलूंगा…”

मम्मी को चोदने के बाद मैं बाथरूम गया। लौटते वक्त मासी का कमरा देखा, वो नंगी सो रही थीं।

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