अवनी दीदी ने पथरी के बहाने चुदवाई

Cousin ki chudai sex story – lesbian sisters sex story – ghar mein sex story: मेरी दो जवान चचेरी बहनें आई हुई थीं। मेरी एक सगी बहन है। तीनों रात को एक बेड पर सो रही थी कि मैंने उन्हें आपस में लेस्बियन करते देखा और उनकी बातें सुनी। उस रात के बाद मेरी जिंदगी में सेक्स की असली आग लग गई थी।

दोस्तो, आप सभी को मेरा नमस्कार। मेरा नाम अमन है। उस समय मेरी उम्र बीस साल की थी,्व मैं इंजीनियरिंग कॉलेज में तीसरे सेमेस्टर में था और गर्मी की छुट्टियों में घर आया हुआ था। मैं सेक्स कहानियां बहुत पढ़ता था, लेकिन जो मेरे साथ हुआ वो किसी फिल्म से भी ज्यादा गंदा और सच्चा था।

मैंने घर जाकर पाया कि मेरे घर में मम्मी-पापा, दादी और मेरी सगी बहन रिचा के अलावा अंकल की बेटी अवनी भी आई हुई थी। अवनी का हमारे यहां बचपन से आना-जाना था, वो मुझसे दो साल बड़ी थी और कॉलेज में पढ़ती थी। उसके साथ बुआ की बेटी आयुषी भी आई थी, आयुषी मुझसे एक साल बड़ी थी और बला की खूबसूरत थी। मेरी सगी बहन रिचा मुझसे डेढ़ साल बड़ी थी। मतलब घर में चारों तरफ सिर्फ जवान माल और मैं अकेला जवान लौंडा।

जब मैं घर पहुंचा तो सबके चेहरे खिल उठे। मैंने सबको प्रणाम किया, आशीर्वाद लिया, खाना खाया और फिर गरम दूध पीकर सोने की तैयारी करने लगा। मम्मी ने कहा कि आज सब बच्चे एक ही बड़े कमरे में सोएंगे क्योंकि सब साथ हैं, खुशी का माहौल है। कमरा वाकई बहुत बड़ा था, एक किंग साइज डबल बेड, एक सिंगल बेड, सोफा सेट और फिर भी काफी जगह बची हुई थी। avni, आयुषी और रिचा तीनों डबल बेड पर लेट गईं और मैं सिंगल बेड पर।

शुरू में सब बातें कर रहे थे, गर्मी की शिकायत, मच्छरों की मार, कॉलेज की बातें। उनकी आवाज धीमी थी और मुझे लगा कि मेरे कमरे में होने से वो थोड़ा असहज हैं। मैंने चादर ओढ़ ली और सोने की कोशिश करने लगा।

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लेकिन नींद कहां आनी थी। अचानक मुझे पच्च-पच्च, चप्प-चप्प की गीली आवाजें आने लगीं। वो लंबी-लंबी स्मूच की आवाज थी। मैंने चादर के अंदर से झांककर देखा तो दिमाग हिल गया। अवनी, आयुषी और रिचा तीनों एक-दूसरे को चूम रही थीं, हाथ एक-दूसरे की चूचियों पर थे, नाइटी ऊपर चढ़ी हुई थी। एसी की नीली एलईडी लाइट में सब साफ दिख रहा था। अवनी ने रिचा का मम्मा मुंह में लिया हुआ था और आयुषी नीचे से रिचा की पैंटी में हाथ डालकर कुछ कर रही थी। रिचा की हल्की-हल्की सिसकियां आ रही थीं, आह्ह्ह… ह्हा… अवनी… धीरे… मुझे भी तो चाट… आयुषी की जीभ चपचप कर रही थी। मेरा लंड तुरंत खड़ा हो गया, मैं बस देखता रहा, कुछ करने की हिम्मत नहीं हुई।

फिर उनकी हरकतें खत्म हुईं और हल्की-हल्की बातें शुरू हुईं। मैंने कान लगाए रखे। अवनी धीरे से बोली, “रिचा, तुझे कोई दिक्कत तो नहीं अगर मैं अमन का ले लूं?” रिचा हंसकर बोली, “मुझे क्या, छेद मेरा थोड़े है, ले ले जिसका मर्जी।” आयुषी चहक उठी, “अवनी तू पहले पटाकर चुदवा ले, फिर मेरी खुजली भी मिटवा देना।” अवनी बोली, “फिर रिचा भी अपने भाई का ले लेगी।” रिचा ने तकिया फेंका, “सो जा कुतिया।” तीनों हल्के से हंसीं और सो गईं। मैं रात भर लंड पकड़कर पड़ा रहा।

सुबह सब नॉर्मल थे, जैसे कुछ हुआ ही नहीं। मैं भी एक्टिंग करता रहा। थोड़ी देर बाद रिचा और आयुषी गार्डन चली गईं। मैंने पूछा, “अवनी दीदी कहां है?” आयुषी बोली, “उसे पथरी का दर्द हो रहा है, कमरे में लेटी है।”

मैं कमरे में गया तो अवनी कराह रही थी। मैंने पूछा, “बहुत दर्द है? दवा ली?” वो बोली, “ली तो है, आराम नहीं। सुई नहीं लगवाना।” मैंने कहा, “बता कहां दर्द है।” उसने पेट के नीचे हाथ रखा। मैंने हल्के से दबाया, वो तड़पी। उसकी आंखों में दर्द कम और शरारत ज्यादा थी। मुझे पिछली रात की बातें याद आ गईं। मैंने कहा, “दांत दर्द में दबाने से आराम आता है, यहां भी दबाऊं?” वो कुछ नहीं बोली। मैंने सूट ऊपर किया, नरम पेट पर हाथ फेरने लगा। आयुषी दरवाजे पर खड़ी थी, अवनी ने उसे आंख मारी और वो चली गई।

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अब मैंने हिम्मत बढ़ाई। सूट ऊपर किया, ब्रा दिखी, फिर हाथ नीचे सलवार के नाड़े में डाला। उसने टांगें फैला दीं। मेरी उंगलियां उसकी गीली पैंटी पर थीं। वो सिसकियाँ लेने लगी, आह्ह्ह… अमन… धीरे… मैंने पैंटी साइड की और उंगली अंदर डाली। चुत पूरी तर थी। दो उंगलियां अंदर-बाहर करने लगा। वो मेरे कंधे पर नाखून गड़ा रही थी, आह्ह्ह… ह्हा… और जोर से…

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फिर मैंने उसके मम्मे बाहर निकाले, गोल-गोल भूरे निप्पल एकदम टाइट। मैं चूसने लगा। वो मेरे सिर को दबा रही थी। तभी दरवाजे पर आहट हुई, आयुषी थी। अवनी ने मूंह बनाया और वो चली गई। मैंने कहा, “ऊपर अपने कमरे में जा रहा हूं, तू बाल साफ करके आ जाना।” वो मुस्कुराई, “मैं बहुत बहुत प्यासी हूं।” मैंने उसके होंठ चूसते हुए कहा, “मैं भी।”

मैं ऊपर गया, लंड की झांटें साफ कीं, शॉवर लिया और सिर्फ फ्रेंची पहनकर लेट गया। दस मिनट बाद अवनी आई, छोटी स्कर्ट और हाफ शर्ट, अंदर कुछ नहीं। दरवाजा बंद किया और वो मेरे ऊपर लटक गई। जीभ लड़ने लगी, मैंने उसकी गांड दबाई, उंगली चुत में डाली। चुत टपक रही थी। उसने स्कर्ट-शर्ट फेंके, एकदम नंगी हो गई। मैंने भी फ्रेंची उतारी। मैंने उसकी चुत पर मूंह रख दिया, जीभ अंदर तक डाली, सारा रस चाट गया। वो चिल्ला रही थी, आह्ह्ह्ह… चाट… पूरा पी ले…

फिर 69 हो गए। वो मेरे लंड को गले तक ले रही थी, ग्ग्ग्ग… ग्ग्ग्ग… गी… गी… गों… गों… पूरा गला भर गया। मैंने कहा, “अंदर डालूं?” वो बोली, “कंडोम की मां की चुत, जल्दी पेल। दो महीने से तरस रही हूं।” मैंने लंड का सुपारा चुत पर रखा और एक झटके में आधा घुसा दिया। वो चीखी, “आह्ह्ह भैनचोद… फाड़ेगा क्या?” मैं रुका नहीं, दूसरा झटका मारा, पूरा लंड अंदर। फिर धकाधक शुरू। मैंने उसकी टांगें कंधे पर रखीं और गहराई तक पेलता रहा। बीस मिनट तक चुदाई चली, आह्ह्ह… ह्हा… और जोर से… फाड़ दे… उसकी चुत से फचफचाफच की आवाजें आ रही थीं। आखिर में मैंने उसकी चुत में ही सारा माल उड़ेल दिया।

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चुदाई के बाद वो हांफते हुए लेटी थी। मैंने पूछा, “अब पथरी का दर्द कैसा है?” वो हंसी, “तेरे लोहे ने पथरी तोड़ दी।” मैंने कहा, “तो आयुषी को बोल उसकी खुजली भी मिटवा दूं।” वो चौंकी, “तू सब देख-सुन रहा था?” मैंने उसका निप्पल चूसते हुए कहा, “मुझे भोसड़ी समझ रखा है?” वो हंस दी, “तो रिचा को भी बुला लूं?” मैंने कहा, “चुत-लंड का कोई रिश्ता नहीं होता, बस मजा चाहिए।” वो मेरे सीने से लिपट गई।

दोस्तों, अवनी की चुदाई कर ली। अब आयुषी और रिचा की बारी थी। लेकिन अगले दिन मुझे दिल्ली कॉलेज वापस जाना पड़ा। बाकी की कहानी जल्दी ही लिखूंगा।

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कहानी का अगला भाग: छत पर तीनों बहनों की सलवारें उतारीं

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