Khooni lund sex story, dost ki behen ki seal todi sex story, bloody cock sex story, friend sister virginity loss sex story: हाय दोस्तो, कैसे हैं आप सब। आपका सेक्सी बबलू फिर से हाजिर है। आज जो स्टोरी सुनाने जा रहा हूं वो मेरी लाइफ की सबसे हॉट और यादगार चुदाई है, जिसमें हर पल की गर्माहट, स्पर्श की सिहरन और इच्छाओं की तीव्रता महसूस होगी। पूरा ध्यान से पढ़ना, क्योंकि हर सीन डिटेल में है, और मैंने हर भावना को जीवंत बनाने की कोशिश की है।
उसका नाम अनजली था। जयपुर में रहती है, प्राइवेट कंपनी में जॉब करती है, जहां वो रोजाना व्यस्त रहती है लेकिन उसके चेहरे पर हमेशा एक आकर्षक मुस्कान रहती है। उम्र करीब 27-28 साल की होगी, वो उम्र जहां जवानी का नशा चरम पर होता है। वो मेरे दोस्त प्रेम की छोटी बहन थी, और प्रेम हमेशा उसकी चिंता करता था। मैं ऑफिशियल टूर पर जयपुर जा रहा था। प्रेम ने फोन किया और कहा – भाई, मेरी बहन जयपुर में अकेली रहती है। तू वहां जा रहा है तो उसका कुछ सामान ले जाना, वो सामान जो घर से मंगवाया था और जिसकी उसे बहुत जरूरत थी। वो अपनी एक फ्रेंड के साथ रूम शेयर करती है, इसलिए कोई दिक्कत नहीं होगी। मैंने हां बोल दी, क्योंकि मुझे भी उत्सुकता थी उससे मिलने की।
स्टेशन पहुंचा तो प्रेम आया। एक बैग में सामान, अनजली का पूरा एड्रेस और मोबाइल नंबर दे दिया, और जाते हुए बोला कि उसे मेरी आने की खबर मत देना, सरप्राइज होगा। सुबह 6 बजे ट्रेन से उतरा और सीधा उसके फ्लैट पर पहुंच गया, हवा में ठंडक थी और मेरे मन में एक अजीब सी उत्तेजना। सोचा पहले सामान दे दूं, ऑफिस तो 10 बजे खुलेगा, तब तक मैं उससे बातें कर लूंगा। घंटी बजाई। अंदर से आवाज आई – कौन है? गेट खुला, और वहां अनजली खड़ी थी, उसकी आंखों में नींद की मिठास और चेहरे पर आश्चर्य।
मैंने कहा – मैं प्रेम का फ्रेंड बबलू हूं। धोसा से आया हूं। आपके भाई ने बोला सामान दे जाऊं और आपसे मिल लूं, और मैंने बैग उठाकर दिखाया। अनजली ने मुस्कुराकर कहा – अरे वाह, नमस्कार। अंदर आइए ना, बाहर क्यों खड़े हो, उसकी आवाज में एक मधुरता थी जो मुझे अंदर तक छू गई।
वो ग्रे कलर का नाइट सूट पहने थी, जो उसके बदन पर चिपका हुआ था। बिना ब्रा के उसके गोरे-गोरे संतरे जैसे बूब्स नाइट सूट पर साफ उभरे हुए थे, और हर हलचल में वो हल्के से हिलते थे, जिससे मेरी नजरें बार-बार वहां अटक जाती थीं। वो थोड़ा टाइट सूट था, इसलिए शेप बहुत अच्छा लग रहा था, और उसकी त्वचा की चमक सूट से झांक रही थी। पानी लाने के लिए झुकी तो दोनों बूब्स नीचे लटक गए, गैप से अंदर तक दिख रहा था, गुलाबी निप्पल्स की झलक मिली जो मेरे मन को गर्म कर गई। मैं घूरता रहा, मेरी सांसें तेज हो गईं। उसने नजर पकड़ ली, शरमा गई और जल्दी से दुपट्टा ओढ़ लिया, लेकिन उसकी गालों पर लाली छा गई थी।
मैं बोला – सर्विस कैसी चल रही है अनजली? लेकिन मेरी आंखें अभी भी उसके बूब्स पर थीं, और मैं महसूस कर रहा था कि वो भी मेरी नजरों की गर्मी महसूस कर रही है। वो बोली – ठीक है, उसकी आवाज में एक हल्की सी कंपकंपी थी। फिर घरवालों की बात हुई, मम्मी-पापा की सेहत, भाई की शरारतें, सब कुछ। मैं सामान देकर जाने लगा तो वो बोली – अरे ऐसे कैसे जा रहे हो? भाई होते तो यहीं रुकते, और उसने मेरी आंखों में देखा, जैसे कुछ कहना चाह रही हो। मैंने मना किया लेकिन उसने बहुत जिद की, उसकी आंखों में एक अपनापन था जो मुझे रोक रहा था। पता चला उसकी रूममेट 3 दिन के लिए अपने गांव गई है। वो अकेली है, और रातें लंबी लगती हैं। आखिरकार मैं मान गया, और मन में एक उत्साह की लहर दौड़ी।
स्टेशन जाकर अपना बैग उठाया, जिसमें मेरे कपड़े और कुछ जरूरी सामान था। उसके फ्लैट में आकर बाथरूम में फ्रेश हुआ, पानी की ठंडक मेरे बदन को छू रही थी। वहां उसकी कई ब्रा और पैंटी पड़ी थीं, लेस वाली, ट्रांसपेरेंट वाली – देखकर ही लंड तन गया, और मैंने उन्हें छुआ, उनकी खुशबू सूंघी जो गुलाब जैसी थी। मैं बरमूडा और टीशर्ट पहनकर बाहर आया, और वो मुझे देखकर मुस्कुराई। वो भी फ्रेश होकर ब्लू जींस और व्हाइट टीशर्ट में आई, जींस उसके कूल्हों पर चिपकी हुई थी और टीशर्ट से उसके बूब्स का शेप साफ दिख रहा था। टिफिन सेंटर से खाना मंगवाया, गर्म-गर्म रोटी और सब्जी की खुशबू कमरे में फैल गई। खाकर वो 10 बजे ऑफिस चली गई, जाते हुए मुझे छूकर बोली कि जल्दी आना। मुझे डुप्लीकेट की दी – अगर जल्दी आओ तो रेस्ट कर लेना, और उसकी उंगलियां मेरे हाथ पर रुकीं थोड़ी देर।
दोपहर 3 बजे मेरा काम खत्म। ऑफिस ने कहा कल शाम 4 बजे आना, इसलिए मैं खुश था। मैं फ्लैट लौटा, और उसका लैपटॉप खोला, जिसमें उसकी जिंदगी के राज छिपे थे। सबसे पहले टेम्पररी इंटरनेट फाइल्स चेक कीं। सेक्स साइट्स, पोर्न वीडियो थंबनेल भरे पड़े थे, हर इमेज में गर्म दृश्य जो मेरे मन को और उत्तेजित कर रहे थे। याहू मैसेंजर खोला – आईडी पासवर्ड सेव था। लॉगिन किया। आर्काइव चैट्स में रात भर की सेक्स रोल प्ले, डर्टी टॉक, जहां वो अनजान लोगों से अपनी फैंटसी शेयर करती थी। 4 ब्लू फिल्म्स भी डाउनलोडेड थीं, जिनमें हार्डकोर सीन थे। मन में आया – ये तो तैयार है, बस मौका चाहिए, और मैंने सोचा कि आज रात कुछ होने वाला है।
शाम 6 बजे वो आई, उसके चेहरे पर थकान लेकिन आंखों में चमक। चाय बनाई, गर्म चाय की भाप और उसकी खुशबू मिलकर कमरे को कामुक बना रही थी। गपशप हुई, हम हंसते रहे, लेकिन मेरी नजरें उसके बूब्स और कूल्हों पर, उनके उभार को महसूस कर रही थीं। वो भी मेरी जांघों के बीच उभार देख-देखकर शरमा रही थी, उसकी सांसें तेज हो रही थीं। आंखों में सेक्सी चमक थी लेकिन कोई बोल नहीं रहा था, बस नजरें मिलती रहीं।
रात 8 बजे स्कूटी से घूमने निकले, हवा में ठंडक और उसकी बॉडी की गर्मी। रास्ते में झटकों से उसके बूब्स मेरी पीठ से बार-बार टकराते, नरम स्पर्श जो मुझे उत्तेजित कर रहा था। थोड़ी देर बाद वो खुद आगे झुककर सटाने लगी, उसके बूब्स दब रहे थे और उसकी सांसें मेरे कान पर लग रही थीं। उसकी सांसें तेज हो गई थीं, और मैं महसूस कर रहा था उसकी थाइज की गर्मी।
रात 10 बजे एक डिम लाइट वाला रेस्टोरेंट गया, जहां रोमांटिक माहौल था। टेबल के नीचे पैरों से खेल शुरू, पहले वो पैर खींचती, फिर खुद रगड़ने लगी, उसकी त्वचा की गर्मी मेरी लेग्स पर महसूस हो रही थी। दोनों की सांसें गरम, और आंखें एक-दूसरे में डूबी हुईं। खाना खाकर 11 बजे घर लौटे। स्कूटी पर वो साइड बैठी। बूब्स पूरी तरह मेरी पीठ पर दबे, नरम कुशन जैसे। मैंने हिम्मत करके उसकी थाई पर हाथ रखा, उसकी त्वचा गर्म और चिकनी थी। वो सिहर गई लेकिन हाथ हटाया नहीं, बल्कि अपना हाथ मेरे ऊपर रख दिया।
घर पहुंचे, दरवाजा बंद करते ही माहौल गर्म हो गया। मैंने कहा – सोफे पर सो जाऊंगा। वो हंसकर बोली – सोफा छोटा है। कमर अकड़ जाएगी। बेड बड़ा है, दोनों अलग-अलग सो सकते हैं, लेकिन उसकी आंखों में कुछ और था। मैं तैयार था, मन में आग लगी हुई थी।
बाथरूम जाकर बरमूडा-टीशर्ट पहना और बेड पर लेट गया, मेरी सांसें तेज थीं। वो बाथरूम से नाइटी में आई। नाइटी पतली थी, ब्रा-पैंटी नहीं, उसकी त्वचा से चिपकी हुई। नाइट लैंप में उसके बूब्स की आउटलाइन साफ दिख रही थी, और वो चलते हुए हिल रहे थे। वो बेड पर लेटी। दोनों सोने का नाटक करते रहे, लेकिन नींद कहां थी।
वो बार-बार करवट बदलती, मेरी तरफ देखती, उसकी आंखें मेरे बदन पर घूम रही थीं। मेरे तने लंड पर नजर टिक जाती, और वो होंठ काटती। एक घंटे बाद वो मेरी तरफ ऐस करके लेट गई, उसकी गांड की गर्मी महसूस हो रही थी। मैं सरका। हाथ से उसकी कमर छुआ, उसकी त्वचा रेशमी थी। वो सिहर गई लेकिन चुप रही, उसकी सांसें और तेज हो गईं। मैंने धीरे से ऐस पर हाथ फेरा, गांड के गोलाई को महसूस किया। फिर लंड निकालकर ऐस क्रैक में दबाया, गर्माहट ने मुझे पागल कर दिया। वो खुद पीछे सट गई, और उसकी गांड मेरे लंड पर दब गई।
धीरे से नाइटी ऊपर की, उसकी नंगी त्वचा छूकर सिहरन हुई। पैंटी नहीं थी, उसकी चूत की गर्मी महसूस हो रही थी। लंड ऐस में रगड़ा, और धीरे-धीरे चूत के पास ले गया। एक हाथ से बूब्स दबाए, निप्पल्स सख्त हो गए थे। वो कसमसाई – आह्ह.. ह्ह्ह.. उसकी आवाज में कामुकता थी। मैंने बूब्स पर प्रेशर बढ़ाया, उन्हें मसलने लगा, निप्पल्स को उंगलियों से रगड़ा। वो मुड़ी, बूब्स मेरे मुंह में दे दिए, गर्म और नरम। लंड हाथ में पकड़ा और सहलाने लगी, उसकी उंगलियां मेरे लंड पर घूम रही थीं।
मैंने बूब्स चूसे, निप्पल पर जीभ घुमाई, दांत से हल्का काटा। वो सिसकी – ओह्ह.. बबलू.. आराम से.. दांत मत लगाओ.. लेकिन उसकी बॉडी मेरे करीब आ रही थी। मैंने एक हाथ नीचे ले जाकर उसकी चूत छुई, गीली हो चुकी थी, उंगली से रगड़ा, क्लिट को सहलाया। वो सिहर उठी, आह्ह.. ऊऊ.. और उसने मेरे लंड को जोर से दबाया। हमने एक-दूसरे को चूमा, होंठों की गर्मी, जीभ की लड़ाई, लंबा किस जो हमें और गर्म कर रहा था।
हम उठ बैठे। वो मेरे लंड को देखकर ललचा रही थी, उसकी आंखें भरी हुई थीं। मैंने उसकी नाइटी उतारी, धीरे-धीरे, उसकी त्वचा को छूते हुए। वो शरमाई लेकिन रोक नहीं पाई, उसकी सांसें तेज थीं। मैं भी नेकेड। गोद में लेटकर बूब्स चूसे, दूध जैसी मिठास। उसने लंड पकड़कर हिलाने लगी, ऊपर-नीचे, और मैं उसकी चूत में उंगली डाली, अंदर-बाहर कर रहा था। वो सिसक रही थी, आह्ह.. ह्ह्ह.. और ज्यादा।
69 में आए। मेरी जीभ उसकी चूत पर, क्लिट को चाटा, चूसा, उंगली डाली। वो मेरे लंड को मुंह में ले रही थी, जीभ से चाट रही थी, गहराई तक लेने की कोशिश। चूत गीली हो गई, रस बह रहा था। वो बोली – आह्ह.. ऊऊ.. क्या कर रहे हो.. सिहरन हो रही है.. पूरा बदन जल रहा है। मैंने जीभ और तेज घुमाई, उसकी गांड दबाई। वो मेरे लंड को चूस रही थी, गों.. गों.. की आवाजें आ रही थीं।
फिर मैंने कहा – टांगें फैलाओ, अंदर डालूंगा। वो डर गई – नहीं यार.. दर्द होगा.. मैं वर्जिन हूं.. लेकिन उसकी आंखों में इच्छा थी। मैंने कहा – ड्रामा मत कर। ब्लू फिल्म देखती है, चैट करती है। सब पता है। वो हंसकर बोली – नखरा तो बनता है। टांगें फैलाईं – आजा साले.. खा जाऊं तुझे.. पूरा जोर लगा दे.. और उसने अपनी चूत को छुआ, मुझे आमंत्रित किया।
मैंने ऑयल लिया। चूत पर और लंड पर लगाया, चिकनाहट ने और उत्तेजना बढ़ा दी। लंड रखा, टिप को रगड़ा। धक्का मारा। फिसला। फिर जोर से धकेला। टिप अंदर। वो चीखी – आह्ह्ह्ह.. मर गई.. दर्द.. लेकिन सिहरन भी। मैंने होंठ चूमे, बूब्स दबाए। फिर धक्का। आधा अंदर। वो आंखें बंद करके चीख रही थी – ओह्ह.. बबलू.. धीरे.. लेकिन उसकी बॉडी मेरे साथ थी।
एक जोरदार झटके से पूरा घुसा दिया, सील टूटने की सिहरन, खून की गर्मी। वो चीखी – आआआह्ह्ह्ह्ह.. बहनचोद.. फाड़ दिया.. चूत फट गई.. बाहर निकाल.. दर्द असहनीय है। मैं रुका। लंड अंदर ही रखा। उसकी सांसें तेज, आंसू आ गए। फिर धीरे-धीरे हिलाने लगा, हर मूवमेंट में दर्द कम हो रहा था। दर्द कम हुआ। वो सिसकने लगी – ओह्ह.. ह्ह्ह.. अब मजा आ रहा है.. जोर से चोदो.. अपनी बहन को चोदो.. और उसने कमर उठाई।
स्पीड बढ़ाई। वो नीचे से कमर उठाकर साथ दे रही थी – आह्ह.. ऊऊ.. जोर से.. पूरा अंदर.. मैं मर जाऊंगी.. उसकी चूत की दीवारें मेरे लंड को जकड़ रही थीं। 10 मिनट में वो झड़ गई – आआह्ह्ह.. ऊऊ.. रस बहा। मैं भी पानी छोड़ा – चूत भर दो बबलू.. सारा अंदर.. गर्म रस की बौछार।
बाथरूम ले जाकर चूत साफ की, पानी से धोया, वो दर्द से कराह रही थी। वो चल नहीं पा रही थी, मैंने सहारा दिया। थोड़ी देर नंगे लेटे, एक-दूसरे को छूते रहे। फिर चूमना-चाटना शुरू, गर्दन पर किस, कान में फुसफुसाहट। 69 फिर से। वो जल्दी झड़ गई – ओह्ह.. इह्ह.. और मैंने उसके रस को चाटा।
डॉगी स्टाइल में लिया। गांड ऊपर की, चूत दिख रही थी। एक झटके में पूरा घुसाया। वो चीखी – आआआईईई.. मार डाला भैया.. चूत फिर फट गई.. दर्द की लहर। मैंने बूब्स पकड़े, मसलते हुए। जोर-जोर से धक्के, थप-थप की आवाजें। वो बोली – हां.. ऐसे ही.. जोर से.. और उसने गांड पीछे धकेली। 15 मिनट बाद गांड में डाला, ऑयल लगाकर। वो फिर चीखी – ओह्ह.. दर्द.. टाइट छेद फट रहा है। लेकिन बाद में – मजा आ रहा है.. गांड मारो.. गहराई तक।
रात में 4 बार चूत मारी, हर बार फोरप्ले के साथ, चूमना, चाटना, उंगलियां। 2 बार गांड, दर्द और मजा का मिश्रण। सुबह मैं ऑफिस गया। वो नहीं गई, बेड पर लेटी रही। वापस आया तो वो ऊपर बैठकर लंड अंदर लेने की कोशिश कर रही थी। दर्द था लेकिन सिसक रही थी – उफ्फ.. क्या मोटा लंड है बबलू भैया.. जोर से चोदो.. मार डालो मुझे.. और मैंने उसे चूमा, बूब्स चूसे।
किचन में स्टैंड पर बिठाया। पैर कंधों पर रखे, चूत में लंड रगड़ा। 30-40 मिनट तक जोरदार चुदाई, हर धक्के में सिसकियां। ब्लू फिल्म लगाई, साथ देखते हुए चोदा। दिन भर 6-7 बार चुदाई हुई, हर बार नई पोजीशन, नया मजा। वो बोली – आज वो मजा मिला जो बचपन से सपने में देखती थी। आई लव यू बबलू।
फिर मैं धोसा लौट आया। मौका मिलता है तो उसकी चूत और गांड का मजा लेता हूं
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