Cousin ki chudai sex story – Behan bhai incest sex story – Resort me sex story: मेरा नाम कमल है। मैं आगरा का रहने वाला हूँ और जयपुर में जॉब करता हूँ। यह कहानी मेरी और मेरी कजिन बहन नम्रता की है। नम्रता उस वक्त 27 साल की थी, बेहद खूबसूरत, गोरे रंग वाली, कातिल आँखें और भरावदार बदन। मैं 32 साल का था, हाइट 5 फुट 7 इंच, और मेरा लंड 7 इंच का मोटा और सख्त।
हम दोनों दिल्ली में जॉइंट फैमिली के साथ रहते थे। एक ही कमरे में सोते थे, बेड अलग-अलग थे, लेकिन इतने करीब कि कभी-कभी रात में उसकी सांसें मेरे कानों तक पहुँचती थीं। नम्रता मेरी सबसे अच्छी दोस्त थी, पर कभी मन में गलत ख्याल नहीं आया था।
फरवरी की बात है। मेरा प्रमोशन हुआ और ट्रांसफर जयपुर हो गया। ठीक उसी समय नम्रता की शादी दुबई में रहने वाले एक बिजनेसमैन से फिक्स हो गई। सगाई जयपुर में और शादी उदयपुर में तय हुई। मुझे सारी व्यवस्था संभालने की जिम्मेदारी मिली। मैंने एक खूबसूरत रिसॉर्ट बुक किया जिसमें 12 कमरे थे।
11 फरवरी को पूरा परिवार जयपुर पहुँच गया। कुल 30 लोग थे। सब अपने कमरों में सेटल हो गए। आखिर में मुझे और नम्रता को एक ही कमरा मिला। मैंने सोचा भी नहीं था कि ऐसा कुछ हो सकता है।
रात को सबने खाना खाया। मर्दों ने खूब दारू पी। मैंने भी थोड़ी ज्यादा ही पी ली थी। नशा सर चढ़कर बोल रहा था। जब मैं कमरे में पहुँचा तो देखा कि नम्रता पिंक सिल्की स्लीवलेस नाइटी पहने सो रही थी। एक हाथ सिर के नीचे और दूसरा पेट पर। कंबल थोड़ा सा सरका हुआ था।
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चाँद की रोशनी कमरे में फैली थी। उसके गोरे बदन पर पड़कर चमक रही थी। मैं बेड पर लेटा तो मेरी नजर उसके उभरे हुए स्तनों पर गई। सांस के साथ ऊपर-नीचे हो रहे थे। नाइटी पतली थी, निप्पल की आकृति साफ दिख रही थी। नशे में मेरा दिमाग गर्म हो चुका था। लंड तनकर खड़ा हो गया।
मैंने धीरे से कंबल और सरकाया। उसकी जांघें तक नाइटी ऊपर चढ़ी हुई थी। लाल रंग की पारदर्शी पेंटी, साइड में सिर्फ धागा। मैं उसके करीब सरका। उसकी बगल की खुशबू मेरे नाक में घुसी। हल्की पसीने वाली, बॉडी स्प्रे की मिठास और औरत की अपनी मदहोश करने वाली गंध। मेरा लंड फटने को हो रहा था।
मैंने नाक उसके कांख के पास ले जाकर गहरी सांस ली। उफ्फ्फ… क्या खुशबू थी। मैं मदहोश हो गया। धीरे-धीरे उसकी पेंटी के पास सरक गया। पेंटी पर मुंह लगाकर सूंघने लगा। चूत की गर्माहट और हल्की नमी की महक आ रही थी। मुझसे रहा नहीं गया। मैंने पेंटी पर हल्का सा किस कर दिया।
फिर हिम्मत करके पेंटी के अंदर उंगली डाली। गर्म, मुलायम और गीली चूत को छुआ। सहलाने लगा। नम्रता नींद में हिली। मुंह से निकला, “आअह्ह… हम्म्म्म…”। मैं डर गया, पर रुक नहीं पाया। धीरे से पेंटी नीचे सरकाने की कोशिश की। तभी उसकी आँखें खुल गईं।
मैं सहम गया। नम्रता ने मुझे देखा और मुस्कुराई। बोली, “भाई… ये क्या कर रहे हो?” मैं चुप रहा। वो हल्के से हँसी और फुसफुसाई, “इंतजार कितने दिनों से कर रही थी… तुमने कभी किया ही नहीं।”
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ये सुनते ही मेरे अंदर की सारी हिचक टूट गई। मैं उसके ऊपर लेट गया। उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए। दोनों होंठों को मुंह में लेकर चूसने लगा। उसकी जीभ मेरी जीभ से टकराई। हम पागलों की तरह एक-दूसरे को चूमने लगे। गर्म सांसें मिल रही थीं।
कुछ देर बाद मैं अलग हुआ। उसके गाल चूमे, फिर गर्दन पर किस किया। नम्रता की सांसें तेज हो गईं। वो सिसकार रही थी, “आह्ह… भाई… ओह्ह्ह… इस्स्स…”। मैंने नाइटी ऊपर से उतार दी। लाल ब्रा और पेंटी में वो किसी हूर से कम नहीं लग रही थी।
मैं उसके बगल में लेटा। गले को चूमते हुए ब्रा के ऊपर से निप्पल चाटने लगा। वो तड़प उठी, “आआह्ह भाई… बहुत अच्छा लग रहा है…”। मैंने ब्रा उतार दी। गुलाबी निप्पल तने हुए थे। एक को मुंह में लेकर चूसने लगा, जीभ से घुमाने लगा। दूसरे को हाथ से मसल रहा था।
नम्रता सिसकियाँ भर रही थी, “आह्ह भाई… चूसो… मेरे निप्पल को जोर से चूसो… ऊऊह्ह भाई… मुंह में भर लो… आआह्ह्ह… और चूसो ना भाई…”। मैं कभी चूसता, कभी हल्के से काटता। वो और जोर से चिल्लाई, “आआह्ह भाई… और काटो… बस ज्यादा जोर से नहीं… आआआह्ह…”
फिर मैंने उसके हाथ ऊपर उठवाए। बगल चाटने लगा। वो पूरी तरह पागल हो रही थी। मैं नीचे सरका, नाभि पर जीभ फिराई। फिर उसे उल्टा किया। अपने सारे कपड़े उतार फेंके। उसकी गांड पर बैठ गया। कमर से पीठ तक जीभ से चाटता हुआ ऊपर आया।
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नम्रता कराह रही थी, “आआआह्ह ऊऊउह्ह भाई… और चाट… साले इतने दिन कहाँ था… चाट साले… आआआह्ह…”। मैंने उसकी गांड पर हल्के से काटा। वो चिहुँक उठी, “ओउच्च… साले बहनचोद… काट क्या रहा है… चूस साले… अपनी बहन की गांड चाट… आआह्ह्ह… साले बहुत तड़पाया है तूने… तेरे नाम से कितनी बार चूत मसलकर झड़ी हूँ… आज पूरी आग बुझा दे…”
मैंने पेंटी उतार दी। गांड फैलाकर छेद पर जीभ रखी और चाटने लगा। नम्रता से रहा नहीं गया। उसने मुझे धक्का दिया और मेरे ऊपर चढ़ गई। हम 69 की पोजीशन में आ गए। वो मेरे लंड को मुंह में लेकर चूसने लगी, ग्ग्ग्ग… गों… गोग… गी… गी… गी… और मैं उसकी चूत फैलाकर अंदर तक जीभ डालकर चाट रहा था।
कुछ देर बाद नम्रता ने लंड मुंह से निकाला और चिल्लाई, “हााह्ह कमल… आआआह्ह चाट साले… और जोर से चाट… आह आह आह… अब मैं झड़ने वाली हूँ… आआह्ह आआह्ह… मैं गईईईई…”। उसकी चूत से गर्म रस का फव्वारा मेरे मुंह में छूट गया। मैं सब पी गया।
वो फिर मेरे लंड पर टूट पड़ी। जोर-जोर से चूसी। मैं भी झड़ गया। नम्रता ने सारा माल मुंह में लेकर निगल लिया। फिर हाँफते हुए बोली, “आह्ह साले… आज तूने जाते-जाते मेरी चूत की खुजली मिटा दी… अब साले बहनचोद… अपनी नम्रता को पेल… जोर से चोद मुझे…”
उसने मेरा लंड फिर चूसकर खड़ा कर दिया। मैंने उसे लिटाया। गांड के नीचे तकिया लगाया ताकि चूत और ऊपर उठ जाए। लंड को चूत पर रगड़ने लगा। नम्रता तड़प रही थी, “डाल ना साले… अब मत तड़पा… अंदर पेल दे… जोर से चोद मुझे बहनचोद…”
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मैंने हल्का सा धक्का दिया। लंड सिर अंदर गया। नम्रता ने गांड ऊपर उठाई और पूरा लंड एक झटके में उसकी चूत में समा गया। मैं धीरे-धीरे चोदने लगा। वो मुझे कसकर जकड़कर बोली, “आआआह्ह वाऊऊऊ… आह आह… चोद साले… जोर से…”
20 मिनट तक लगातार चुदाई की। नम्रता चिल्लाई, “आह आह हा हा… चोद… मैं फिर झड़ने वाली हूँ… और जोर से… आआआआह्ह… मैं झड़ीईई…”। मैंने भी कहा, “साली… मैं भी आने वाला हूँ…”। वो बोली, “अंदर ही डाल दे… कोई डर नहीं…”
मैंने उसे जोर से पकड़ा और सारा माल उसकी चूत के अंदर छोड़ दिया। दोनों हाँफते हुए एक-दूसरे की बाहों में लेट गए। नम्रता ने फुसफुसाया, “कमल भाई… क्या बात है… आज तुमने मेरी बरसों की आग शांत कर दी…”।
हम नंगे ही एक-दूसरे से लिपटकर सो गए। सुबह जब आँख खुली तो उसकी मुस्कान देखकर फिर से लंड तन गया, पर परिवार जाग चुका था।
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