दो कुँवारी बहनों की पहली सामूहिक चुदाई बस में

हेल्लो फ्रेंड्स, मैं कनिका अपनी कहानी का अगला और आखिरी भाग लेकर आई हूँ तथा आपने पिछली कहानी में पढ़ा था कि हम दोनों बहनें रात को घर से बाहर नंगी घूमी थीं तथा पेड़ के पीछे छुपकर लेस्बियन सेक्स किया तथा चौकीदार का लंड देखकर और गर्म हो गईं तथा घर लौटकर नंगी सो गईं।

कहानी का पिछला भाग: अंधेरे में पेड़ के पीछे लेस्बियन सेक्स

अब आगे की कहानी सुनिए, सुबह मम्मी आईं तथा उन्होंने गेट नॉक किया तथा हमें नहा धोकर ब्रेकफास्ट के लिए नीचे बुला लिया तथा फिर हम दोनों एक साथ उठे तथा हम दोनों ने एक साथ बाथ लिया तथा ब्रेकफास्ट के लिए नीचे चले गए तथा ब्रेकफास्ट करते करते मैंने मम्मी से धीरे से पूछा कि मम्मी हम आज शाम को बाहर जा सकते हैं तथा मम्मी ने मेरी ओर देखा तथा फिर पूछा कि क्या काम है तथा मैंने कहा मम्मी हमें कुछ शॉपिंग करनी है तथा मम्मी बोली तो अपना सामान पापा को लिखवा दो वो ले आएंगे तथा तभी रितिका बोल पड़ी नहीं मम्मी हम ले आएंगे पापा नहीं ला पाएंगे तथा तभी मम्मी समझ गई कि हमारे सामान पापा नहीं ला सकते हैं।

फिर उन्होंने थोड़ी देर सोचा तथा बोली अच्छा चलो मुझे लिख कर दे दो मैं ले आऊंगी तथा हम दोनों के मुँह से एक साथ निकल गया नहीं तथा मम्मी चौंक गई तथा पूछा क्यों नहीं तथा मैंने रितिका के हाथ पर हाथ रखकर उसे शांत रहने को कहा तथा फिर मैं बोली नहीं मम्मी हम ले आएंगे आप चिंता मत करो तथा वो बोली तुम दोनों पिछली बात को भूल गई हो जो अब फिर अकेले बाहर जाने की जिद कर रही हो तथा फिर मैं बोली मम्मी अब पिछली बार जो हुआ वो सोचकर हम दोनों पूरी लाइफ तो डरकर घर नहीं बैठ सकते तथा फिर अब हम दोनों अपने उसी डर को मिटाने के लिए तो बाहर जाना चाहते हैं तथा मम्मी ने सोचा तथा फिर बोली कनिका बात तो सही है लेकिन मैं अब रिस्क नहीं ले सकती हूँ अब मैं भी तुम्हारे साथ चलूंगी तथा मैंने कहा मम्मी आप बेकार की टेंशन ले रही हो।

फिर मैंने झूठ बोला कि हमारे साथ हमारी दिल्ली की दो चार फ्रेंड्स भी आ रही हैं तथा मम्मी हल्का सा चौंक गई तथा बोली तुम दोनों की दिल्ली में कौनसी फ्रेंड्स हैं तथा मैंने कहा अरे है मुंबई में मेरी फ्रेंड स्वाति थी ना उसकी कजिन दिल्ली में है तथा मैं जानती थी कि मम्मी स्वाति को अच्छे से जानती थीं तथा उसकी कजिन भी दिल्ली में है यह भी वो जानती थीं तथा उन्होंने पूछा कि वो तुम्हें कहाँ मिलेगी तथा मैंने कहा वो हमें अगली रेड लाइट से पिक कर लेगी तथा फिर मम्मी ने कहा चलो ठीक है लेकिन पिछली बार की तरह ज्यादा रात मत करना तथा उनसे कहना कि वो तुम्हें यहीं ड्रॉप कर दे तथा मोबाइल चालू रखना ठीक है तथा मैंने कहा ठीक है।

फिर यह सुनकर रितिका बहुत खुश हो गई तथा फिर वो रूम में चली गई तथा जैसे ही मैं रूम में आई तो रितिका ने मेरे होंठ चूम लिए तथा बोली अरे तू तो कमाल के बहाने लगाती है हमें रोकने के लिए मम्मी के पास कोई जवाब ही नहीं बचा तथा मैंने कहा चल ठीक है लेकिन इतना खुश मत हो बस यह सोच कि रात को कुछ गड़बड़ न हो तो वो बोली कुछ गड़बड़ नहीं होगी तू देखना बहुत मजा आने वाला है तथा फिर शाम होते ही मैंने ऊपर एक ग्रे कलर की टी शर्ट डाल ली जो मेरे पेट को आधा ढक रही थी तथा मैंने नीचे नीले कलर की टाइट लेगी पहन ली लेगी इतनी टाइट थी कि उसमें से मेरे चूतड़ साफ दिखाई दे रहे थे तथा रितिका ने गुलाबी कलर का टॉप और नीले कलर की छोटी स्कर्ट पहन ली।

फिर मैंने मम्मी से पूछा हम जाएँ तो मम्मी हमें बाहर तक छोड़ने आईं तथा हमें समझाती रहीं कि कोई भी प्रॉब्लम हो तो हम तुरंत उन्हें या पापा को फोन करें तथा फिर मैंने उनसे कहा हमें कुछ नहीं होगा तथा हम निकल गए तथा रितिका बहुत खुश थी तथा वो उसके चेहरे पर साफ दिख रहा था तथा मैं भी खुश तो थी कि हमारा प्लान काम कर गया लेकिन मुझे थोड़ा डर भी था कि अब आगे बस में क्या होगा तथा हमने फिर मेट्रो पकड़ी तथा वहाँ से होते हुए हम पुराने किले पहुँचे तथा काफी देर खड़े रहे तथा फिर बस का इंतजार करते रहे तथा आज वहाँ पर बहुत लोग थे हमने सोचा कि शाम होते ही सब चले जाएंगे तथा फिर एक बस आई पूरी भरी हुई उसमें हम चढ़ गए लेकिन अगले दो स्टॉप तक हमें किसी ने हाथ तक नहीं लगाया तथा रितिका ने निराश होकर बोला यहाँ कुछ नहीं होगा उतर जाते हैं तथा अगली बस देखते हैं।

फिर हम उतर गए तथा फिर हम दूसरी बस का इंतजार करने लगे तथा फिर कई बसें आईं लेकिन किसी में कुछ नहीं हुआ तथा ऐसा करते करते अंधेरा होने लगा तथा उधर मम्मी के फोन आने लगे कि कब तक वापस आओगी तथा फिर हम दोनों निराश हो गए तथा फिर मैंने रितिका से कहा कि चल घर चलते हैं फिर कभी देखेंगे तथा वो भी झट से मान गई तथा फिर हम दोनों ने एक बस पकड़ी तथा घर जाने के लिए तथा उसमें चढ़ गए तथा उसमें सारी सीटें भरी थीं तथा उसमें बस खड़े होने की जगह थी तथा ऊपर से उसमें सब बड़े लोग थे तथा ज्यादातर औरतें थीं तथा रितिका और निराश हो गई तथा हम दोनों एक चालीस पैंतालीस साल की आंटी की सीट के पास आकर खड़े हो गए तथा वो और उनकी एक लड़की थी जो हमसे कुछ छोटी होगी वो वहाँ बैठी थी तथा उनके पति हमारे पास में खड़े थे।

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रितिका का मुँह लटका हुआ था तथा मैं भी थोड़ी निराश थी तथा उधर मैं मम्मी से फोन पर बात करके बता रही थी कि हम कुछ देर में वापस आ जाएंगे तथा तभी मुझे अपने चूतड़ पर कुछ महसूस हुआ तथा मैंने नीचे देखा तो वो आंटी के पति अंकल का हाथ मेरे चूतड़ पर चल रहा था तथा पता नहीं वो गलती से था या जानबूझकर लेकिन उनका हाथ मेरे चूतड़ पर चल रहा था तथा मैंने भी सोचा कि देखते हैं यह क्या है तथा यह सोचकर मैं वैसे ही चुपचाप खड़ी रही तथा फिर धीरे धीरे जब अंकल ने देखा कि मैं कुछ नहीं कह रही हूँ तथा न ही मैं दूर हटकर खड़ी हुई तो उनकी हिम्मत बढ़ गई तथा उन्होंने अपनी पूरी हथेली मेरे चूतड़ पर रखकर मेरे चूतड़ को सहलाना शुरू कर दिया तथा उनकी हथेली की गर्मी मेरी लेगी से होते हुए मेरी त्वचा तक पहुँच रही थी तथा मैं चुपचाप खड़ी रही।

तभी मैंने देखा कि वो आंटी भी रितिका की जांघों को अपनी कोहनी से रगड़ रही है लेकिन रितिका इतनी दुखी थी कि उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था तथा मैंने रितिका को इशारा किया तथा हल्का सा अपनी जगह से रितिका के पास जाने के लिए गई तो अंकल ने तुरंत मेरी इस हरकत पर अपना हाथ हटा लिया तथा मैं रितिका के पास गई तथा उसके कान में बोला कि मुझे लगता है कि यह अंकल और आंटी ठरकी हैं तथा यह तेरी ख्वाहिश पूरी कर सकते हैं तथा तब उसका ध्यान आंटी के हाथ पर गया तथा वो मेरी बात सुनकर मुस्कुराई तथा बोली कि उसे अंकल के पास आने दे।

मैंने भी कुछ नहीं कहा तथा हम दोनों ने एक दूसरे की जगह बदल ली लेकिन अब एक प्रॉब्लम थी कि अंकल इतना घबरा गए थे कि अब वो रितिका से थोड़े दूर हटकर ही खड़े हो गए लेकिन उनकी पत्नी ने हिम्मत दिखाते हुए रितिका की जगह मेरी जांघों को कोहनी से टच करना शुरू कर दिया तथा मैं भी वैसे ही खड़ी रही तथा उनकी हिम्मत थोड़ी खुली तथा धीरे धीरे उनकी कोहनी की जगह अब वो अपनी उंगलियों से मेरी जांघें सहलाने लगी तथा धीरे धीरे उनका पूरा हाथ मेरी जांघों को सहलाने लग गया तथा उनकी उंगलियाँ मेरी अंदरूनी जांघों तक पहुँच रही थीं।

फिर धीरे धीरे उनका हाथ मेरे चूतड़ों तक पहुँचा तो मैंने उनकी ओर देखा तो उनकी भावना से भरा हुआ चेहरा तथा ठरकीपन को देखकर मेरे मुँह पर मुस्कुराहट आ गई तथा यह देख वो भी मुस्कुरा दी तथा मुझसे बोली बेटा तुम मेरी बगल की सीट पर बैठ जाओ तथा मैंने कहा नहीं आंटी ठीक है तथा आपके बगल की सीट पर तो आपकी बेटी बैठी है ना तथा इस पर वो बोली इसे तो मैं अपनी गोद में बिठा लूंगी तुम इधर आ जाओ तथा फिर उनके एक इशारे पर उनकी बेटी उठी तथा उनकी गोद में बैठ गई तथा वो लड़की हमसे कुछ ही छोटी होगी तथा उसका वजन लगभग रितिका से थोड़ा ही कम होगा लेकिन आंटी ने तो उसे ऐसे गोद में बैठा लिया जैसे कोई बच्ची हो तथा वो भी आंटी की गोद में बच्चों की तरह बैठ गई तथा फिर मैं कुछ न कह पाई तथा उनके बगल की सीट पर जाकर बैठ गई तथा फिर धीरे धीरे उनका हाथ वापस मेरी जांघों को सहलाने लगा तथा मैं उनका साथ दे रही थी।

यह देख अंकल को भी थोड़ी हिम्मत आई तथा उन्होंने रितिका की जांघों को अपनी उंगलियों से टच करना शुरू कर दिया तथा रितिका ने कुछ प्रतिक्रिया नहीं दी तो वो भी समझ गए कि हम दोनों क्या चाहते हैं तथा फिर अंकल ने धीरे धीरे रितिका की जांघों पर हाथ फेरना शुरू कर दिया तथा उसकी स्कर्ट के अंदर तक हाथ को ले जाने लगे लेकिन फिर भी वो वैसे ही खड़ी रही तथा फिर उसने हल्का सा अंकल की ओर देखा लेकिन वो उसकी जांघों में इतने मस्त थे कि उन्होंने रितिका को देखते हुए भी नहीं देखा तथा फिर धीरे धीरे उनका हाथ रितिका के चूतड़ों पर चला गया तथा वो हल्के हल्के उन्हें उसकी स्कर्ट पर से ही सहलाने लगे तथा रितिका को भी मजा आ रहा था उसके चेहरे से साफ पता चल रहा था तथा उसकी साँसें तेज हो गईं।

फिर धीरे धीरे बस भी खाली होती गई तथा फिर बस में हम दोनों के अलावा आंटी की फैमिली तथा एक आदमी और बैठा था तथा कंडक्टर तथा ड्राइवर ही बस में रह गए लेकिन रितिका तथा अंकल वहीं खड़े रहे तथा इधर आंटी मेरी जांघों को सहलाते हुए टी शर्ट के अंदर जाकर मेरी लेगी के ऊपर से मेरी चूत पर टच कर रही थी तथा उनकी उंगलियाँ मेरी चूत की फाँक पर रगड़ रही थीं तथा मेरी चूत गीली हो रही थी तथा मैं भी बस की खिड़की के बाहर देख रही थी तथा मेरे कुछ न बोलने से उनको और हिम्मत आ गई तथा अब उनकी बेटी ने मेरे बूब्स दबाने शुरू कर दिए थे तथा मैंने जब अपने बूब्स पर उसके हाथ देखे तो मैं समझ गई कि पूरी फैमिली ही ठरकी है तथा उधर रितिका की स्कर्ट के अंदर लगभग अंकल का हाथ जाने लग गया था।

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और कुछ न बोलने की वजह से अंकल ने अपना पूरा हाथ एकदम से रितिका की स्कर्ट के अंदर डाल दिया तथा पैंटी के ऊपर से उसके चूतड़ों को मसलने लग गए तथा उनके एकदम से इतना कामुक होने पर रितिका भी थोड़ी हैरान हुई लेकिन फिर वो कुछ न बोली तथा यह देखकर अंकल की और हिम्मत बढ़ गई तथा वो रितिका की पैंटी पकड़कर खींचने लगे तथा लेकिन रितिका ने उनका हाथ पकड़ लिया लेकिन रितिका कुछ बोल नहीं रही थी तो अंकल जानते थे कि वो क्या चाह रही है तथा तभी दूसरी ओर से एक आदमी उठा तथा उसने रितिका का हाथ पकड़ लिया जिससे अंकल फ्री हो गए तथा उन्होंने तुरंत उसकी पैंटी नीचे खींच दी तथा अब वो सिर्फ स्कर्ट में थी तथा उसके नीचे वो बिल्कुल नंगी थी तथा अब रितिका के पीछे दो आदमी थे अंकल तथा वो दूसरा आदमी तथा दोनों अब रितिका की स्कर्ट उठाकर उसके चूतड़ों को मसलने लग गए तथा उनकी हथेलियाँ उसके गोरे चूतड़ों पर लाल निशान छोड़ रही थीं।

उधर आंटी तथा उनकी बेटी मेरे बूब्स तथा चूत को सहलाते हुए मसलने लग गए थे तथा आंटी ने मेरी टी शर्ट को मेरी नाभि तक ऊपर उठा दिया तथा मेरी लेगी को उतारने लगी तो मैंने उन्हें रोका लेकिन उनकी बेटी ने तुरंत मेरे हाथ पकड़ लिए तथा फिर आंटी मेरी लेगी को नीचे करने लगी लेकिन मैंने भी अपने चूतड़ नहीं उठाए तो उन्होंने अपना एक हाथ मेरी गांड के नीचे लगाया तथा मुझे हल्का सा उठा दिया तथा फिर मेरी लेगी को पंजों तक पूरी नीचे उतार दिया तथा अब मेरे नीचे सिर्फ पैंटी बची थी तथा आंटी वापस मेरी पैंटी के ऊपर से मेरी चूत को रगड़ने लगी तथा उनकी उंगलियाँ मेरी चूत की फाँक में घुसने की कोशिश कर रही थीं।

और उनकी बेटी मेरे बूब्स मसलने लगी तथा दूसरी ओर वहाँ अंकल तथा वो दूसरा आदमी रितिका के नंगे चूतड़ों को बुरी तरह मसलने में लगे थे तथा फिर अंकल ने अपना हाथ आगे किया तथा रितिका की दोनों टांगों के बीच उसकी चूत को टटोलने लगे तथा रितिका ने भी अपने पैर हल्के से फैला लिए तथा दूसरा आदमी उसकी गांड तथा गोरे गोरे चूतड़ों को अपने दोनों हाथों से मसलने लगा तथा अब अंकल अपने एक हाथ से रितिका की चूत सहलाने लगे तथा दूसरे हाथ से उसकी टी शर्ट के ऊपर से उसके बूब्स को मसलने लगे तथा रितिका को बड़ा मजा आ रहा था तथा उसने अपनी आँखें बंद कर रखी थी तथा उसकी सिसकारियाँ निकल रही थीं आह्ह ह्ह्ह और जोर से।

अब बस का कंडक्टर भी रितिका के पास आ गया तथा आते ही उसके बूब्स को दबाने लगा तथा फिर अंकल रितिका की टी शर्ट को उतारने लगे तथा रितिका ने पहले तो अपने हाथों से अपनी टी शर्ट को दबाया लेकिन अंकल कहाँ मानने वाले थे तथा उन्होंने उसके हाथ जबरदस्ती ऊपर किए तथा उसकी टी शर्ट उतार दी तथा अब वो सिर्फ ब्रा तथा स्कर्ट में थी तथा इधर आंटी की बेटी ने भी मेरी टी शर्ट उतार दी थी तथा मेरी ब्रा पर से मेरे बूब्स से खेल रही थी तथा फिर मैंने अपनी खिड़की बंद कर दी तथा उस पर पर्दा डाल दिया था जिससे कि बाहर का कोई अंदर न देख सके तथा फिर आंटी ने मेरी पैंटी उतार दी तथा मेरे बदन पर सिर्फ ब्रा रह गई तथा कुछ ही देर में उनकी बेटी ने मेरी ब्रा को भी उतार कर मुझे बिल्कुल नंगा कर दिया।

फिर आंटी सीट के नीचे बैठ गई तथा मेरी चूत को चूसने लगी तथा उनकी गर्म जीभ मेरी चूत की पंखुड़ियों पर फिसल रही थी तथा उनकी बेटी मेरे बूब्स को चूसने लगी तथा मैंने पीछे मुड़कर रितिका की हालत देखी तो उसके शरीर पर बस स्कर्ट ही बची थी तथा उसकी ब्रा कंडक्टर ने उतार दी थी तथा वो अब उसके बूब्स को चूस रहा था तथा स्कर्ट भी कुछ ही बची थी तथा उसे अंकल ने ऊपर उठा रखा था तथा वो भी उसकी चूत चूस रहे थे तथा पीछे खड़ा आदमी उसके चूतड़ को चूम रहा था तथा फिर आंटी अपनी जीभ मेरी चूत के अंदर तक ले जा रही थी तथा मस्त तरह से मेरी चूत को चूस रही थी तथा उनकी जीभ से चपचप की आवाजें आ रही थीं।

फिर मैंने वहाँ उनकी बेटी को नंगा करना शुरू कर दिया था तथा आंटी ने जैसे ही ऊपर देखा तो उन्होंने अपनी बेटी को देखा तथा फिर मेरी ओर देखा तथा मुस्कुराई तथा फिर मेरी चूत को वापस चूसने लगी तथा फिर वहाँ रितिका की स्कर्ट भी तीसरे आदमी ने उतार दी तथा फिर अपने कपड़े भी उतारने लगा तथा रितिका अभी भी वर्जिन थी तो मुझे डर था कि वो इतने लंड झेल पाएगी या नहीं तथा मैं यह सोच रही थी कि तीनों आदमियों ने अपने कपड़े उतारने शुरू कर दिए थे तथा थोड़ी ही देर में तीनों बिल्कुल नंगे हो गए तथा इधर मैंने आंटी की बेटी को भी पूरा नंगा कर दिया तथा उसके छोटे छोटे बूब्स चूसने लगी तथा अब बस वहाँ आंटी ही कपड़े पहनी थी।

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अंकल ने रितिका को अपना लंड चूसने को कहा तो रितिका का मन नहीं कर रहा था लेकिन फिर वो किसी तरह घुटनों के बल बैठी तो तीनों ने अपने अपने लंड उसके मुँह के सामने रख दिए लेकिन इतने में आंटी उठी तथा उन आदमियों से बोली अरे उस अकेली बेचारी को क्यों पकड़ रखा है तथा वैसे भी यह दोनों कुँवारी लड़कियाँ हैं तथा एक लंड से ज्यादा नहीं झेल पाएंगी तथा यहाँ तीन जवान लड़कियाँ हैं एक एक आदमी एक लड़की को पकड़ लो तथा इस पर अंकल तो वहीं रहे तथा कंडक्टर मेरे पास आ गया तथा वो तीसरा आदमी आंटी की बेटी को लेकर अगली सीट पर चला गया तथा आंटी ने अपने सारे कपड़े उतारे तथा ड्राइवर के पास चली गई तथा ड्राइवर ने भी अंधेरी जगह देखकर बस साइड में खड़ी कर दी तथा आंटी पर सवार हो गया।

फिर कंडक्टर मेरे मुँह के सामने अपना लंड लेकर खड़ा हो गया तथा मैं जानती थी कि वो क्या चाहता है लेकिन उसका काला लंड देखकर मेरा उसे मुँह में लेने का मन नहीं कर रहा था तथा उधर रितिका ने अंकल के लंड को सहलाना शुरू कर दिया तथा उनकी बॉल्स को चूमने लगी तथा अंकल का लंड पूरा तन गया तथा लगभग सात इंच का हो गया तथा फिर रितिका ने अब उनके सुपाड़े को दो चार बार चूमा तथा फिर उनका लंड अपने मुँह में ले लिया तथा यह देख मुझे भी जोश आया तथा मैंने अपनी आँखें बंद की तथा कंडक्टर के लंड को सीधे मुँह में डाल लिया तथा धीरे धीरे उसे चूसने लगी तथा उसके लंड की नसें मेरी जीभ पर महसूस हो रही थीं।

फिर बगल की सीट पर लेटी आंटी की बेटी की चुदाई शुरू हो गई थी क्योंकि उसकी सिसकारियाँ मैं साफ सुन सकती थी आह्ह ह्ह्ह दर्द हो रहा है तथा और रितिका ने अंकल के लंड को अंदर बाहर करना शुरू कर दिया तथा उसे बड़े मजे लेकर चूसने लगी तथा उसके मुँह से चपचप ग्ग्ग्ग की आवाजें आ रही थीं जबकि मुझे कंडक्टर का लंड चूसने में ज्यादा मजा नहीं आ रहा था लेकिन मैं क्या करती लेकिन उसका लंड भी पूरी तरह तन चुका था तथा करीब आठ इंच का हो गया था तथा फिर उसने मुझसे रुकने को कहा तथा अपना लंड मेरे मुँह से बाहर निकाल लिया तथा घुटनों के बल बैठ गया तथा मुझे सीट पर लेटने को कहा मैं चुपचाप सीट पर लेट गई।

फिर उसने मेरी दोनों टांगों को उठाया तथा अपने कंधे पर रख लिया तथा मेरी चूत को चाटने लगा तथा उसकी जीभ के स्पर्श से मैं एकदम उत्तेजित हो उठी तथा मुझे बड़ा मजा आने लगा तथा वो मेरी चूत के आस पास हर जगह को चाट रहा था तथा कभी मेरी जांघों को चूमता तो कभी मेरी चूत को चाटता तथा फिर जीभ उसने मेरी गांड पर रख दी तथा उसे चाटने लगा तथा मुझको बड़ा मजा आने लगा तथा मेरी सिसकारियाँ निकलने लगीं आह्ह ह्ह्ह और जोर से तथा फिर कुछ देर उसने ऐसा ही किया तथा मुझसे बोला लड़की कौन से छेद में चुदना चाहोगी गांड में या चूत में तथा मैं सोच में पड़ गई क्योंकि मैं दोनों जगह से वर्जिन थी।

फिर वो ही बोला तेरी गांड चोद दूँ मैं एकदम डर गई तथा बोली नहीं तो वो बोला तो क्या चूत देगी तथा मैंने कहा हाँ लेकिन आप कंडोम पहनकर करना तो वो हंस पड़ा तथा बोला आजकल तुम जैसी रंडियों के भी बड़े नखरे हैं तथा यह सुन मुझे बड़ी शर्म आई एक दो कोड़ी का कंडक्टर मुझसे रंडी कह गया तथा मैं क्या करती तथा किया भी हमने रंडियों जैसा काम था तथा फिर वो उठा तथा उसने मेरी चूत में लंड डालकर मेरी जोरदार चुदाई की तथा उसके लंड की मोटाई से मेरी चूत फट सी गई तथा दर्द के साथ मजा भी आ रहा था तथा मैं सिसकारी आह्ह ह्ह्ह धीरे तथा फिर मैंने उसके लंड का पानी भी पीया तथा मेरी बहन की चुदाई भी लगभग खत्म हो गई थी तथा उसने भी खूब मजे लिए तथा फिर हम घर आ गए तथा अब हमें जब भी चुदाई करानी होती है तो अब हम खूब मजे करते हैं तथा लंड के मजे लेती हैं।

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