Hot Young Sister Sex Story: दोस्तो, मैं सुभाष. मेरे घर में मम्मी पापा मैं और मुझसे एक साल छोटी जवान बहन रहते हैं.
मेरी छोटी बहन का नाम मीशू है. उसकी जवानी भरपूर खिल चुकी है.
वह अपनी मतवाली चाल से हर लड़के का ईमान खराब करती रहती है.
उसके साथ सड़क पर चलते समय मुझे लड़कों द्वारा उसकी जवानी को पाने के लिए न जाने कितनी अजीब अजीब बात सुनने को मिलती हैं.
यही सब सुनकर मैंने खुद ही अपनी बहन की जवानी का रस चूसने के लिए प्लान बना लिया था.
यह हॉट यंग सिस्टर सेक्स कहानी इसी बारे में है.
मैं बहुत बार कोशिश कर चुका था कि बहन की चूत और बूब्स मिल जाएं!
पर मिलना तो दूर की बात थी, कभी उसकी नंगी चूचियों तक के दर्शन तक नहीं हुए थे.
फिर मैंने उसकी कुछ ऐसी हरकतें देख ली थीं जिससे समझ आ गया था कि ये मुझसे चुद जाएगी.
अब बस मुझे उसे अकेले में सैट करना रह गया था.
एक दिन की बात है, मम्मी पापा को शादी में मामा के यहां जाना था.
मम्मी तो 6 दिन पहले ही चली गई थीं पर पापा को शादी से दो दिन पहले ही जाना था.
वे लोग चार दिन बाद वापस आने वाले थे.
घर में हम भाई बहन ही रहने वाले थे.
मेरे तो मन में लड्डू फूट रहे थे कि इस दौरान काम बन सकता है.
बस लग रहा था कि जल्दी से पापा घर से जाएं और मैं इधर अपनी कमसिन बहन की चूत को मसल कर उसका भोसड़ा बना दूँ.
फिर इंतजार भी खत्म हो चुका था.
पापा चले गए.
हम दोनों शाम को खाना खाने बैठे.
उस दिन गर्मी इतनी भयानक थी कि मैंने अपनी शर्ट और पैंट उतार कर सिर्फ गमछा लपेट लिया था. गमछा इतना पतला था कि मेरे उभरे हुए लंड की आकृति साफ दिख रही थी.
मेरी बहन ने भी एक बहुत छोटी, पतली सी नीली फ्रॉक पहन ली थी जो उसकी जांघों के बीच से मुश्किल से ढक पा रही थी. फ्रॉक के ऊपर से उसके दोनों गोल, भरे हुए बूब्स साफ उभरे हुए थे और गले की कटिंग इतनी गहरी थी कि दोनों निप्पल्स की हल्की गुलाबी झलक भी दिखाई दे रही थी. नीचे उसने सिर्फ एक पतली सी लेस वाली पैंटी पहनी हुई थी जो उसके चूतड़ के बीच में गड़ी हुई थी.
उसके बूब्स देख कर ही मेरे लंड ने जोर से धक्का मारा और गमछे के नीचे से ही प्रीकम की एक मोटी बूंद टपक पड़ी.
मैं और वह टीवी देख रहे थे.
सामने टीवी पर लव वाला गर्म सीन चल रहा था – हीरो हीरोइन को गले लगाकर गहरी चुंबन कर रहा था और धीरे-धीरे उसकी साड़ी खींच रहा था.
मैंने उससे पूछा- तूने किसी से लव किया है?
तो उसका जवाब ना में था.
फिर उसने भी पूछा- आपने किया है?
मैंने भी किसी से लव नहीं किया था तो मैंने भी बोल दिया- ना.
फिर मैंने पूछा- तुम अकेली कैसे रह लेती हो, मुझसे तो रहा ही नहीं जाता है.
इस पर वह बोली- वही तो बात है भाई … पर क्या करूं. मैं तो ज्यादा बाहर जाती नहीं हूँ तो मुझे कोई मिला ही नहीं बाकी मैं भी तो लड़की हूँ तो अन्दर से तो कुछ लगता ही है.
अब मैंने देर ना करते हुए पूछा- क्या मुझसे लव करोगी?
वह बोली- करती तो हूँ.
शायद वह मेरी भावना को नहीं समझ पायी थी.
मैं बोला कि मैं तुमसे भी प्यार करना चाहता हूँ.
वह बोली- कैसे?
मैं बोला- पहले बताओ किसी को बताओगी तो नहीं ना?
वह बोली- नहीं, पहले बताओ कैसे करोगे?
मैंने आगे बढ़कर सबसे पहले उसकी गर्दन पर किस किया। मेरे गर्म होंठ उसकी नरम और रेशमी गर्दन की त्वचा पर लगते ही वह पूरी तरह सिहर उठी। उसका पूरा शरीर एक झटके से कांप गया जैसे ठंडी हवा का झोंका लगा हो लेकिन गर्मी की लहर के साथ। उसकी गर्दन पर छोटे छोटे रोम खड़े हो गए और उसकी सांसें एकदम रुक सी गईं फिर तेज और गहरी होने लगीं। फिर भी उसने मुझे रोकने की कोशिश नहीं की। न हाथ उठाया न पीछे हटी। बस उसकी आंखें आधी बंद हो गईं और होंठ हल्के से कांपने लगे।
फिर मैंने धीरे धीरे उसके होंठों पर किस किया। पहले सिर्फ हल्का स्पर्श। मेरे निचले होंठ उसके ऊपरी होंठ को छूए। फिर मैंने उसके दोनों होंठों को अपने होंठों के बीच में बंद कर लिया और हल्के से चूसा। मेरी जीभ ने उसके निचले होंठ को अंदर से चाटा फिर धीरे से उसके मुंह में प्रवेश किया। उसी दौरान मेरे दोनों हाथ उसकी चूचियों पर गए। मैंने पहले हल्के से दबाया। उसकी नरम और भरी हुई चूचियां मेरी हथेलियों में समा गईं। फिर धीरे धीरे दबाव बढ़ाया अंगलियों से निचोड़ते हुए। उसके निप्पल मेरी हथेलियों के बीच सख्त होकर उभर आए। मैंने अंगलियों से निप्पल को पकड़ा हल्के से मटका फिर गोल गोल घुमाया। हर बार दबाने पर उसकी सांसें और तेज होती गईं।
वह अभी भी मेरे साथ पूरी तरह सहयोग नहीं कर रही थी। न मुझे और पास खींच रही थी न ही मुझे धक्का दे रही थी। बस चुपचाप मेरे हर स्पर्श को महसूस कर रही थी आंखें बंद होंठ थोड़े खुले सांसें भारी।
मैंने अपनी सगी बहन की चूचियों को और जोर से दबाना मसलना शुरू कर दिया। मेरी हथेलियां अब पूरी तरह उसकी चूचियों को घेर रही थीं। ऊपर से नीचे तक निचोड़ रही थीं कभी हल्के से मसलकर कभी जोर से दबाकर। निप्पल अब पूरी तरह तने हुए सख्त और संवेदनशील हो चुके थे। मैंने एक निप्पल को अंगलियों के बीच में पकड़कर हल्के से खींचा फिर छोड़ दिया। वह कांप उठा। धीरे धीरे उसकी सिसकारियां शुरू हो गईं। छोटी छोटी उम्म आह की आवाजें। उसका शरीर अब गर्म हो रहा था उसकी सांसें तेज और अनियमित। अब वह भी धीरे धीरे कामुक हो रही थी। उसने आखिरकार मेरे गमछे को पकड़ा। उसकी उंगलियां कांप रही थीं। एक झटके में उसने गमछा खींचकर फेंक दिया। मेरा लंड अब पूरी तरह खड़ा लाल सिर वाला नसों से उभरा हुआ उसके सामने था। पूरी तरह नंगा और फड़क रहा था।
मैंने भी उसकी फ्रॉक को दोनों हाथों से पकड़ा। धीरे धीरे उसे ऊपर की ओर सरकाया। पहले उसकी कमर तक फिर छाती के ऊपर। उसकी चूचियां बाहर आते ही उछलकर सामने आ गईं। मैंने फ्रॉक पूरी तरह उतारकर फेंक दी। अब वह ऊपर से पूरी तरह नंगी थी। उसकी चूचियां गोल भरी हुई निप्पल गहरे गुलाबी और सख्त। मुझे देखकर ही और तन गईं। उसकी आंखों में अब वासना के गहरे लाल डोरे तैर रहे थे पुतलियां फैली हुईं नजरें मेरे चेहरे से मेरे लंड तक जा रही थीं।
मेरे हाथ अब उसकी चूत की तरफ बढ़ने लगे। पहले मैंने उसकी जांघों के अंदरूनी हिस्से को सहलाया। नरम गर्म त्वचा पर उंगलियां फेरते हुए। धीरे धीरे ऊपर की ओर बढ़ा। वह लगातार मेरी आंखों में देख रही थी। जैसे हर पल को जी रही हो। उसकी सांसें अब और तेज हो गई थीं। मेरी उंगलियां उसके चूत के होंठों के पास पहुंचीं। अचानक मैंने अपनी मध्यमा उंगली को उसके गीले गरम चूत के होंठों पर रख दिया। जैसे ही स्पर्श हुआ वह पूरी तरह पागल हो गई। उसका पूरा शरीर एक झटके से कांप उठा। मुंह से एक लंबी गहरी कामुक सिसकारी निकली। आआह्ह्ह भाई। उसकी चूत पहले से ही बहुत गीली थी। मेरी उंगली पर तुरंत उसका गर्म चिपचिपा रस लग गया। मैंने उंगली को उसके होंठों के बीच सरकाया फिर क्लिटोरिस को हल्के से छुआ। वह और जोर से चीखी कमर ऊपर उठ गई जांघें सिकुड़ गईं।
धीरे धीरे हम दोनों पूरे नंगे हो गए। मैंने उसकी पैंटी को धीरे से नीचे सरकाया। वह खुद जांघें उठाकर मदद कर रही थी। अब उसकी चिकनी गुलाबी पूरी तरह गीली चूत मेरे सामने खुली थी। मैंने उसका पूरा शरीर चूमना चूसना शुरू कर दिया। पहले गर्दन पर कई गहरे किस फिर कंधों पर फिर चूचियों पर। मैंने एक निप्पल को मुंह में लिया जीभ से चारों तरफ घुमाया हल्के से दांतों से काटा फिर जोर से चूसा। दूसरी चूची को हाथ से मसलता रहा। मेरे हाथ उसके बालों में थे पीठ पर फेर रहे थे कमर को कसकर पकड़ रहे थे।
हम दोनों किसी जोंक की तरह एक दूसरे से लिपटे हुए थे। मेरी जीभ उसके मुंह में गहरे तक चली गई थी। वह मेरी जीभ को अपनी जीभ से रगड़ रही थी चूस रही थी काट रही थी। जैसे पूरा मुंह निगल लेना चाहती हो। हमारा थूक एक दूसरे के मुंह में मिल रहा था। गर्म चिपचिपा मीठा कड़वा। मेरे दोनों हाथ उसकी गांड पर थे। मैंने उसकी नरम गोल मुलायम गांड को पूरी ताकत से मसलना शुरू किया। उंगलियां गहरे दबाव के साथ भीतर की तरफ दबा रहा था फिर उसे अपनी ओर खींच रहा था। उसकी चूत अब मेरे खड़े लंड पर रगड़ खा रही थी। मेरा लंड उसके चूत के होंठों के बीच सरक रहा था। ऊपर नीचे क्लिटोरिस को छूता हुआ उसका गर्म रस मेरे लंड पर फैलता हुआ।
इसी बीच उसकी चूत ने और ज्यादा पानी छोड़ दिया। एक गर्म चिपचिपा तरल मेरे लंड पर बहा नीचे टपकने लगा। मेरा लंड अब पूरी तरह उसके चूत के रस से भीगा हुआ था। चमक रहा था गीला लाल और फड़क रहा था।
इसी तरह हम दोनों के नंगे बदन एक दूसरे से लिपटे रहे चिपके रहे। मैं उसे बार बार चूम रहा था चूस रहा था उसकी चूत मेरे लंड पर रगड़ रही थी। मेरी बहन अब पूरी तरह वासना में डूब चुकी थी। उसकी सिसकारियां तेज और लगातार हो गई थीं। आह भाई और कमर बार बार ऊपर उठ रही थी जांघें मेरी कमर पर लिपट रही थीं। आखिरकार वह एक बार पूरी तरह झड़ गई। उसकी चूत अचानक सिकुड़ने लगी एक के बाद एक लहरें आईं। एक गर्म भारी रस की धारा मेरे लंड पर फैली मेरे लंड को पूरी तरह नहला दिया। वह कांपती हुई सिसकती हुई मेरे सीने से लिपट गई उसकी सांसें मेरे कानों में गर्म गर्म पड़ रही थीं।
मैंने भी गोल सैट किया और एक करारे शॉट के साथ लौड़े को चूत के अन्दर पेल दिया।
उसकी कुंवारी चूत एकदम संकरी थी। मेरे मोटे लंड का सिरा जैसे ही उसके फटे हुए होंठों को चीरते हुए अंदर घुसा, उसकी तंग दीवारें मेरे लंड को कसकर दबाने लगीं। मेरे लंड के झटके से घुसने पर वह जोर से चिल्लाई, “आह्ह्ह… दर्द हो रहा है…!” उसकी आवाज में तेज दर्द और हैरानी दोनों थी।
मैंने तुरंत झपट कर उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए और उसे गहराई से किस करने लगा। मेरी जीभ उसके मुंह के अंदर डालकर उसकी जीभ से खेलने लगी, जिससे उसकी चीख दब गई। उसका मुंह मेरे मुंह में बंद हो गया तो मैंने नीचे से अपनी कमर को तेजी से उठा-उठाकर धक्के देने शुरू कर दिए। हर धक्के के साथ मेरा लंड उसकी चूत में और गहराई तक जाता और फिर बाहर निकलता।
वह बेहद कसमसा रही थी। उसकी दोनों टांगें मेरी कमर के दोनों तरफ फैली हुई थीं और वह मुझे अपने से छुड़ाने की पूरी कोशिश कर रही थी। उसके हाथ मेरी छाती पर धक्का दे रहे थे, लेकिन उसकी ताकत मेरे सामने कुछ भी नहीं थी। मैंने उसके कूल्हों को दोनों हाथों से मजबूती से पकड़ लिया और धक्के और जोरदार करने लगा।
कुछ ही देर में मैंने पूरा मोटा लंड अपनी बहन की चूत के सबसे अंदर तक पेल दिया। अब मेरा लंड पूरी तरह उसके अंदर समा गया था और मेरी जांघें उसकी जांघों से सट गई थीं। मैंने सटासट अंदर-बाहर करना शुरू कर दिया। हर बार जब मैं पूरा लंड बाहर निकालता और फिर जोर से अंदर ठेलता, तो उसकी चूत की दीवारें मेरे लंड के चारों ओर फैलती और सिकुड़ती महसूस होतीं।
धीरे-धीरे उसकी चूत ने मेरे लंड की मोटाई के हिसाब से खुद को ढाल लिया। उसका दर्द कम होने लगा। अब चिल्लाहट की जगह हल्की-हल्की सिसकियां निकलने लगी थीं। उसकी जिस्म की छटपटाहट भी धीरे-धीरे खत्म हो गई।
मैंने महसूस किया कि अब मेरी बहन खुद अपनी गांड थोड़ा-थोड़ा ऊपर उठाने लगी थी। वह मेरे धक्कों के साथ ताल मिलाने की कोशिश कर रही थी। तब मैंने उसके मुंह से अपना मुंह हटाया। उसकी सांसें तेज चल रही थीं। मैंने दोनों हाथ बिस्तर पर उसके दोनों तरफ टिका लिए और अब पूरी ताकत से चूत में लंड पेलना जारी रखा। हर धक्का इतना गहरा था कि मेरी गेंदें उसकी गांड से टकरा रही थीं।
वह मेरी आंखों में सीधे देख रही थी और मुंह से “उन्ह… उन्ह… उंह…” की हल्की-हल्की आवाजें निकाल रही थी। उसके चेहरे पर दर्द और सुख का अजीब मिश्रण था। उसकी पुतलियां फैली हुई थीं और होंठ कांप रहे थे। उसकी कमर भी अब मेरे हर झटके के साथ अपने आप ऊपर-नीचे होने लगी थी।
फिर अचानक से उसका पूरा जिस्म सख्त होकर ऐंठने लगा। उसकी “उन्ह… उन्ह…” की आवाजें तेज और लगातार होने लगीं। “भैया… ओह्ह… कुछ हो रहा है… आह्ह्ह…” उसकी आवाज कांप रही थी। मैं समझ गया कि अब मेरी बहन झड़ने वाली है।
मैंने धक्के और तेज कर दिए। कुछ ही पलों में उसका शरीर एकदम कांप उठा। उसने एक लंबी, तेज चीख के साथ झड़ना शुरू कर दिया। “आआआह्ह्ह्ह…!” उसकी चूत मेरे लंड को बहुत जोर से कसकर दबाने लगी। गर्म-गर्म चूत का रस मेरे लंड पर बहने लगा। वह पूरी तरह निढाल होकर लेट गई, जैसे उसकी सारी ताकत खत्म हो गई हो।
मैंने भी अपने लौड़े पर उसके गर्म, चिपचिपे पानी का अहसास महसूस किया और धक्के रोक लिए। उसने अपने दोनों हाथ-पैर बिस्तर पर फैला दिए। उसकी आंखें बंद हो गईं और सांसें तेज-तेज चल रही थीं।
उसी समय मुझे कुछ याद आया। मैंने धीरे से अपना लंड उसकी चूत से बाहर निकाला। लंड बाहर निकलते ही उसकी चूत से हल्की सिसकी निकली। उसने आंखें खोलकर मेरी तरफ देखा, जैसे पूछ रही हो कि अब क्या।
मैंने उसकी चूत की ओर देखा। उसके चूत के होंठों के बीच से हल्का खून निकल रहा था, जो उसकी कुंवारीपन की निशानी था। कुछ खून बिस्तर की चादर पर भी फैल गया था। मैंने पास पड़ी चादर का कोना उठाकर उसकी चूत को धीरे-धीरे पोंछा। खून साफ होते ही उसकी गुलाबी चूत फिर से साफ नजर आने लगी।
वह अभी भी समझ पाती कि मैं क्या करने वाला हूं, उससे पहले ही मैंने अपना मुंह उसकी चूत पर लगा दिया।
उसकी कमर एकदम से हिली और शरीर ने झुरझुरी सी ली।
मैं लगा रहा और जीभ को चूत के अन्दर डाल कर चूत रस को चाटने लगा। जीभ की नोक से मैंने पहले उसके छोटे से क्लिटोरिस को हल्के-हल्के छुआ, फिर धीरे-धीरे पूरी जीभ से चूत की लंबाई पर फेरा। उसकी चूत पहले से ही गीली थी, गर्म रस मेरी जीभ पर फैल रहा था। मैंने जीभ को अन्दर डालकर अन्दर की दीवारों को चाटा, ऊपर-नीचे, दायें-बायें करके हर कोने को छुआ। उसका रस मीठा-नमकीन था और मैं उसे पीता रहा।
वह कुछ पल तक तो सहयोग नहीं कर रही थी, बस सांसें तेज़ चल रही थीं। पर जब उसे जीभ से चाटे जाने से चैन मिलने लगा, तब उसने धीरे-धीरे अपनी टांगें और चौड़ी खोल दीं। उसकी जांघें मेरे कंधों पर टिकी हुई थीं। मैंने दोनों हाथों से उसकी जांघों को पकड़कर और थोड़ा और खींचा ताकि चूत पूरी तरह खुल जाए। अब मैं पूरी मस्ती से उसकी चूत को चाटने लगा। जीभ को बार-बार अन्दर डालकर बाहर निकालता, क्लिटोरिस को होंठों से चूसता, हल्के से दांतों से कुतरता। उसकी सांसें तेज़ होती गईं, छोटी-छोटी सिसकारियां निकलने लगीं। इससे हम दोनों को मजा आने लगा। उसकी चूत वापस गर्म होने लगी थी, रस और अधिक बहने लगा था।
कुछ ही देर बाद मैंने अपने लौड़े को सहलाया। वह पहले से ही सख्त और फड़क रहा था। मैंने उसकी इस विजय का फल देने के लिए अपनी बहन की चूत में वापस लंड सेट कर दिया। लंड का सुपारा मैंने पहले उसके चूत के मुंह पर रखा, हल्के से रगड़ा ताकि उसका रस लंड पर लग जाए।
इस बार उसने खुद से आंखों से इशारा किया कि ‘जल्दी से अन्दर पेलो’ और इसी के साथ उसने अपनी कमर उठा दी। मैंने कमर को थोड़ा आगे धकेला और लंड का अगला हिस्सा धीरे-धीरे अन्दर डाला। उसकी चूत गर्म और तंग थी, लंड को निचोड़ रही थी। मैंने एक झटके में पूरा लंड अन्दर तक पेल दिया। वह सिसकारी और हल्की चीख के साथ मेरी पीठ पर नाखून गड़ा दिए।
मैंने फिर से लंड चूत में पेलना शुरू किया। पहले धीरे-धीरे, पूरी लंबाई अन्दर-बाहर करता रहा। हर बार जब लंड पूरी तरह अन्दर जाता तो उसकी चूत की दीवारें लंड को जकड़ लेतीं। फिर मैंने रफ्तार बढ़ाई। अब जोर-जोर से धक्के मारने लगा। बिस्तर हिलने लगा, चटक-चटक की आवाज आने लगी। उसकी सिसकारियां तेज़ हो गईं, “हां… और जोर से… बस ऐसे ही…”
करीब दस मिनट बाद वह फिर से झड़ गई। उसकी चूत ने लंड को बहुत जोर से निचोड़ा, पूरा शरीर कांप उठा, कमर ऊपर उठ गई और एक लंबी सिसकारी के साथ उसने ऑर्गेज्म पाया। उसी के साथ मैं भी अपनी बहन की चूत में झड़ जाने के लिए एकदम से तेज हो गया।
अब मेरे लंड से भी माल आने की खबर लगने लगी थी। मैंने और जोर-जोर से अपनी बहन को चोदना शुरू किया। धक्के इतने तेज़ कि उसकी चूत से रस छलकने लगा। आखिरी कुछ धक्कों में मैंने पूरा वजन उसके ऊपर डाल दिया और लंड को सबसे गहराई तक धकेला। फिर एक जोरदार झटके के साथ मैंने अपने लंड का सारा माल अन्दर ही छोड़ दिया। गरम-गरम वीर्य की धारें उसकी चूत की दीवारों पर पड़ती रहीं। मैंने चार-पांच बार और हल्के धक्के मारे ताकि सारा माल अन्दर ही जाए।
वह रोने लगी – ये क्या किया… अब तो मैं प्रेग्नेंट हो जाऊंगी और माँ-पापा तो मेरी जान ही ले लेंगे।
मैंने कहा – अरे पगली, मैं कल दवा ला दूंगा, खा लेना। सब ठीक हो जाएगी।
दवा का नाम सुनते ही वह खुश हो गई और फिर से लंड लेने के लिए रेडी हो गई।
उस रात मैंने अपनी बहन को चार बार चोदा। मैंने हर बार हॉट यंग सिस्टर सेक्स करके अपने लंड का पूरा माल उसकी चूत में ही डाला था।
अब चूंकि मम्मी-पापा को चार दिन तक वापस नहीं आना था तो लगातार चारों दिन और रात बहन की चूत में मेरे लंड की पेलम-पेली चलती रही।
चार दिन बाद जब मम्मी-पापा घर आ गए तो हमारा खेल बंद हो गया था।
मम्मी पापा के वापस आ जाने के एक महीने बाद की बात है. उस दिन कुछ ज्यादा ही बरसात हो रही थी.
उस वजह से मौसम काफी ठंडा हो गया था और ठण्ड भी लगने लगी थी.
पापा मम्मी रात को अपने कमरे में लेटे थे. हम दोनों अलग कमरे में सोने चले गए थे.
हालांकि मेरी बहन मम्मी के साथ सोती है और पापा मेरे साथ बाहर वाले कमरे में सोते हैं.
चूंकि पापा अभी भी मम्मी को पेलते हैं तो वे कभी कभी मम्मी के साथ सो जाते हैं और मम्मी भी अभी तक पापा के लौड़े का मज़ा लेती रहती हैं.
उस दिन भी यही हुआ. पापा मम्मी के साथ कमरे में चले गए और हम दोनों बाहर वाले कमरे में आ गए.
हम दोनों एक दूसरे से चिपक कर मजा ले रहे थे.
तभी पापा मम्मी के रूम से सेक्सी आवाजें आने लगीं. पहले तो हल्की सिसकारियां सुनाई दीं, फिर मम्मी की दबी हुई आहें और पापा की भारी सांसें. बिस्तर के पलंग की हल्की चरमराहट भी आने लगी थी.
इतने में मेरी बहन गर्म हो गई और उसने मेरे लंड को पकड़ लिया. उसकी उंगलियां मेरे लंड को जकड़कर हल्के से सहलाने लगीं, फिर उसने उसे धीरे-धीरे मसलना शुरू कर दिया.
मैंने कहा – अन्दर प्रोग्राम फुल स्पीड पर है.
वह बोली – तो तुम क्यों रुके हुए हो? तुम भी शुरू हो जाओ.
उसकी बात सुनकर मैं भी उत्तेजित हो गया.
बाहर मौसम भी सुहाना था, ठण्ड भी हो गई थी … तो हम दोनों कम्बल में घुस गए. कम्बल के अंदर की गर्माहट और एक-दूसरे के शरीर की गर्मी ने उत्तेजना को और बढ़ा दिया.
मैंने बहन की पजामा नीचे सरकाया. उसने भी अपनी कमर ऊपर करके सहयोग किया. उसकी चूत पहले से ही गीली थी, उंगलियों से छूते ही गर्म और चिकनी महसूस हुई.
मेरी बहन मुझसे अपनी चूत में लंड डलवाने के लिए टांगें फैला रही थी. उसने दोनों घुटनों को मोड़कर टांगें चौड़ी कीं और कमर को हल्का ऊपर उठाकर अपनी चूत मेरी ओर कर दी.
मैंने भी सट से लौड़े को बहन की चूत पर रखा. लंड का सुपारा पहले उसके चूत के मुंह पर रगड़ा, फिर धीरे से दबाव डाला. चूत का मुंह थोड़ा खुला और गीलेपन की वजह से लंड आसानी से अंदर सरकने लगा.
मैंने धीरे-धीरे कमर को आगे धकेला. लंड का आधा हिस्सा अंदर चला गया. बहन ने आह भरी और अपने नाखून मेरी पीठ में गड़ा दिए.
फिर मैंने एक और जोरदार धक्का मारा. पूरा लंड एक ही झटके में बहन की चूत के अंदर समा गया. चूत की गर्म दीवारें लंड को कसकर जकड़ रही थीं.
अब मेरी बहन मेरे लौड़े को बड़े आराम से अन्दर लेने लगी थी. उसने अपनी टांगें मेरी कमर पर लपेट लीं और मुझे और गहराई तक खींचने लगी.
हम दोनों का चुदाई का कार्यक्रम शुरू हो गया.
मैंने धीमी गति से अंदर-बाहर करना शुरू किया. हर धक्के के साथ लंड पूरी तरह बाहर निकलकर फिर से पूरी ताकत से अंदर तक जाता. बहन की चूत से चिकचिक की आवाज आने लगी थी.
धीरे-धीरे मेरी रफ्तार बढ़ती गई. अब मैं जोर-जोर से पेल रहा था. बहन मुंह दबाकर सिसकारियां ले रही थी ताकि आवाज बाहर न जाए. उसकी चूत मेरे हर धक्के पर सिकुड़ रही थी और ज्यादा गीली हो रही थी.
कई मिनट तक ऐसे ही जोरदार चुदाई चलती रही. बीच-बीच में मैं रुककर लंड को पूरी तरह बाहर निकालता और फिर से एक झटके में अंदर डालता. हर बार बहन की सिसकारी तेज हो जाती.
उस दिन पापा मम्मी चुदाई के बाद सो गए और हम दोनों पेलम पेली का खेल खेलते रहे.
रात को 2 बजे तक हम दोनों ने खूब चुदाई की. कई बार हमने पोजीशन बदली. कभी बहन ऊपर आकर मेरे लंड पर उछलती रही, कभी मैंने उसे पीछे से पकड़कर जोर-जोर से पेला.
आखिरी बार जब मैंने जोर से धक्का मारा तो मेरा पानी बहन की चूत के अंदर ही छूट गया. गर्म वीर्य की धार महसूस करके बहन ने भी अपनी चूत सिकोड़कर आखिरी बार जोर से झटका लिया और वह भी झड़ गई.
फिर मैं अपना लंड बहन की चूत में ही डालकर सो गया.
थकान के कारण नींद इतनी गहरी लगी कि कब सुबह हुई, पता ही नहीं चला.
जब मेरा नींद खुली, तो मेरा लंड मेरी बहन की चूत में ही घुसा था.
सुबह के समय लंड खड़ा हो जाता है, तो मेरे देखते ही लौड़े में तनाव आ गया। मैंने तुरंत हाथ नीचे किया और लंड को पकड़कर अंदर-बाहर करना शुरू कर दिया। धीरे-धीरे त्वचा खिंचने लगी, सुपारा सख्त होकर लाल पड़ गया था और नसें उभर आई थीं।
बहन को सूखी चूत में दर्द होने लगा तो वह जाग गई और बोली – रात भर में मन ही नहीं भरा क्या… जो सुबह होते ही चालू हो गए। मेरी सूखी चूत में कितना ज्यादा दर्द हो रहा है, जरा ख्याल करो!
मैंने तुरंत थूक इकट्ठा किया, दो उंगलियों पर अच्छी खासी राल ली और उसकी चूत पर फैलाना शुरू किया। पहले दोनों होंठों के बीच में थूक मल दिया, फिर उंगली से धीरे-धीरे अंदर तक फैलाया। चूत के मुंह पर थूक लगते ही उसकी सांसें तेज हो गईं। फिर मैंने अपनी अंगुली से चूत के ऊपर वाले दाने यानी क्लिटोरिस को पकड़ा और हल्के-हल्के गोल-गोल मसलने लगा। पहले धीरे, फिर थोड़ा जोर से दबाव बढ़ाया। क्लिट फूलकर सख्त हो गई और उसका रंग गहरा गुलाबी हो गया।
तो वह भी गर्म हो गई और सिसकारियां लेने लगी – ऊ आ… आह… ओह माइ गॉड… इतना करोगे तो मर ही जाऊंगी… लगता है शादी से पहले ही मेरी चूत को भोसड़ा बना दोगे!
अब वह भी मेरे होंठों की तरफ झुक गई और किस करने लगी। पहले हल्के होंठों से छूना, फिर जीभ निकालकर मेरी जीभ से खेलने लगी। हम दोनों की जीभें एक-दूसरे में लिपट गईं, लार मिलने लगी और चुंबन गहरा होता गया।
इस बार मैंने उसकी टांगें चौड़ी कीं, लंड को चूत के मुंह पर टिका कर एक ही झटके में पूरा अंदर डाल दिया। वह चीख पड़ी – आह्ह्ह! फिर मैंने कमर पकड़कर जोर-जोर से पेलना शुरू किया। हर धक्के के साथ चूत से चपचप की आवाज निकल रही थी। लंड पूरी तरह अंदर-बाहर हो रहा था, सुपारा चूत की दीवारों को रगड़ता हुआ। मैं इतनी तेजी से धक्के दे रहा था कि बिस्तर हिलने लगा और पूरे कमरे में ठप-ठप-ठप की आवाज गूंज रही थी। उसकी चूत अब पूरी गीली हो चुकी थी, रस बहकर गांड तक पहुंच रहा था।
काफी देर तक इस तरह चुदाई चलती रही। आखिर में दोनों ने एक साथ झटके तेज किए और मैंने उसके अंदर ही गरम-गरम वीर्य छोड़ दिया। लंड धड़कते हुए रस निकालता रहा और उसकी चूत ने भी सिकुड़कर दबाव डाला।
हम लोग चुदाई करने के बाद उठे और मुंह धोने के लिए ब्रश लेकर छत पर चले गए।
मैं बैटरी वाला ब्रश यूज करता हूं जो मुंह में अपने आप चलता है। उसका हैंडल लंड के जैसे गोल और मोटा होता है, सिरे पर ब्रिसल्स हैं लेकिन हैंडल पूरी तरह चिकना और गोल है।
मैंने बहन को लेटने को कहा, उसकी टांगें फैलाकर चूत खोल दी। फिर ब्रश का हैंडल उसकी चूत के मुंह पर रखा और धीरे-धीरे अंदर डालना शुरू किया। पहले सिर्फ सिरा अंदर गया, फिर धीरे-धीरे पूरा हैंडल अंदर तक चला गया। चूत अब पहले से गीली थी इसलिए आसानी से घुस गया। मैंने बैटरी चालू कर दी तो ब्रश का हैंडल तेजी से हिलने लगा, वाइब्रेशन चूत की दीवारों पर पड़ने लगा। यह किसी मोटे डिल्डो की तरह काम करने लगा।
मैंने ब्रश को अंदर-बाहर करना शुरू किया, साथ ही दूसरी उंगली से उसकी क्लिट को मसलता रहा। क्लिट पर दबाव बढ़ाने से वह और सिहर उठी। ब्रश का वाइब्रेशन क्लिट तक पहुंच रहा था। उसकी सांसें तेज हो गईं, कमर उठने-गिरने लगी।
कुछ ही देर में बहन की चूत ने झाग फेंक दिया। सफेद गाढ़ा रस निकलकर ब्रश पर चिपक गया, चूत के होंठ कांपने लगे और वह जोर-जोर से सिसकारी लेने लगी।
फिर मैंने ब्रश निकाला। कोलगेट का थोड़ा सा पेस्ट उंगली पर लिया और चूत के अंदर-बाहर मलने लगा। पेस्ट से झाग बन गया, मैंने ब्रश के ब्रिसल्स से हल्के हाथों से चूत को साफ किया, क्लिट पर भी ब्रश घुमाया। फिर पानी की बोतल से चूत पर पानी डाला और अच्छे से धोया। सारा झाग और पेस्ट साफ हो गया।
अब मैं उसकी चूत को गौर से देखने लगा। चूत के होंठ सूजे हुए थे, क्लिट बाहर निकली हुई थी, पूरा इलाका गीला और चमकदार था। वह हंस रही थी।
मैंने अगली शरारत की। छत पर पानी मोटर लगी थी, मैंने उसे चालू कर दिया। मोटर की आवाज गूंजने लगी और पाइप से पानी की तेज धार निकलने लगी। मैंने पाइप को हाथ में पकड़ा, बहन की फैली हुई टांगों के बीच पहुंचा और ठंडे पानी से भरे मोटे पाइप का मुंह उसकी चूत के ठीक ऊपर रखकर एक झटके से अंदर घुसा दिया।
पाइप का मुंह उसकी चूत की चिकनी त्वचा को चीरता हुआ अंदर चला गया। जैसे ही मैंने पाइप को थोड़ा और अंदर धकेला, ठंडे पानी की मोटी धार पूरी ताकत से उसकी चूत के अंदर जा धंसी। वह एकदम से चौंक गई, उसका पूरा शरीर कांप उठा। ठंडक और प्रेशर से उसकी चूत की दीवारें सिकुड़ गईं और वह जोर से सांस खींचकर चीखी, “अरे… क्या कर रहा है… ओह्ह्ह्ह!”
उसकी चूत में पानी का तेज दबाव पड़ने से अंदर का सारा गर्म माल बाहर की ओर धकेला जा रहा था। मैंने पाइप को धीरे-धीरे अंदर-बाहर करना शुरू किया। हर बार जब पाइप अंदर जाता, पानी की धार उसकी चूत की गहराई तक पहुंचती और जब बाहर निकालता तो साथ में उसका सफेद माल और पानी की धार मिलकर बहने लगती।
मैंने पाइप को पूरी तरह बाहर खींच लिया। उसकी चूत अब खुली हुई थी, लाल-गुलाबी हो चुकी थी और उसमें से लगातार ठंडा पानी की पतली धार बह रही थी। पानी के साथ-साथ उसके माल के सफेद-दूधिया कतरे भी बाहर निकलकर उसकी जांघों पर गिर रहे थे। उसकी चूत की फूली हुई होंठों से पानी टपक रहा था और माल की चिपचिपी परत उसकी चूत पर चमक रही थी।
हम दोनों एक-दूसरे को देखकर जोर-जोर से हंसने लगे। उसकी हंसी में शरारत और शर्म दोनों थी। मैंने कहा, “देख, तेरी चूत कितना पानी पी गई,” और वह हंसते हुए बोली, “अब तो ठंड से कांप रही हूं… लेकिन मजा भी आया।”
फिर हम दोनों छत से नीचे आ गए। खाना खाकर हम दिन में ही बिस्तर पर लेट गए। मम्मी भी रात की चुदाई से थकी हुई थीं, वे भी अपने कमरे में सो रही थीं।
अब अपनी बहन की चुदाई करना मेरी आदत हो गई थी। उसकी चूत पेलने का जब भी मन करता, मैं बस उसे इशारा कर देता और वह बिना कुछ कहे तैयार हो जाती। कभी वह खुद मेरे पास आकर कान में फुसफुसाती, “आज मुझे लंड चाहिए… जल्दी दे दे।” और मैं तुरंत उसकी चूत में अपना लंड घुसा देता।
हम दोनों मौका और समय देखकर अपनी जवानी को चुदाई का पूरा सुख देते। मैं अब कभी भी उसकी चूत में उंगली डाल देता, कभी उसके बूब्स को जोर से दबा देता। पापा काम पर चले जाते और मम्मी सो जातीं, तो मैं दिन में ही अपनी सगी बहन की चूत में लंड घुसा देता। कभी बाथरूम में, कभी किचन में, कभी छत पर – कहीं भी मौका मिलता, हम चुदाई कर लेते।
इस तरह से बहन के मुंह और चूत में जब-तब मेरा लंड चलने लगा था। अब हम दोनों भाई-बहन नहीं रहे थे, बल्कि पति-पत्नी की तरह एक-दूसरे के साथ रहने लगे थे।
यह भाई बहन की चुदाई की कहानी आपको कैसी लगी, कमेंट में जरूर बताइएगा। आप सबसे मैं अपनी बहन से बात जरूर कराऊंगा। मैं अभी Hot Young Sister Sex कहानी लिख रहा हूँ और मेरी बहन बाजू में बैठ कर देख रही है।
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