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मोटी चूची वाली नवेली भाभी की चूत फाड़ दी

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मेरा नाम अंकित है। मैं मेरठ का रहने वाला हूं। मेरी उम्र 24 साल है। हाइट 5 फुट 7 इंच है। देखने में काफी अच्छा और आकर्षक हूं।

मैं हमेशा से मोटी-मोटी चूचियों और गोल-मटोल उठी हुई गांड वाली लड़कियों और खासकर भाभियों का दीवाना रहा हूं। जहां भी ऐसी कोई महिला या भाभी दिखती है, मेरा लंड तुरंत खड़ा हो जाता है। मन करता है कि बस किसी तरह इसकी चूत में लंड घुसा दूं और अच्छे से पेल दूं।

हमारे पड़ोस में एक लड़के की नई-नई शादी हुई थी। शादी के कुछ दिनों बाद मैं घर से बाहर निकला तो पहली बार उस नई दुल्हन को देखा। बस देखता ही रह गया।

भाभी की मोटी-मोटी चूचियां ब्लाउज में इस तरह उभरी हुई थीं कि जैसे कोई दो बड़े-बड़े तरबूज कपड़े के अंदर कैद होने को बेताब हों। गहरा लाल ब्लाउज पहना था और उसकी चूचियां इतनी भरी-भरी लग रही थीं कि ब्लाउज के ऊपरी हिस्से में हल्की सी दरार दिख रही थी। नीचे से साड़ी की पेटीकोट कसकर बंधी थी, जिसकी वजह से उनकी कमर पतली दिख रही थी और गांड इतनी गोल, मटोल और ऊपर उठी हुई थी कि हर कदम के साथ दोनों गाल हिलते हुए एक-दूसरे से टकरा रहे थे। मैं उन्हें देखकर ही ठिठक गया। मेरी सांसें तेज हो गईं। दिल जोर-जोर से धड़कने लगा। पैंट के अंदर मेरा लंड एकदम सख्त होकर खड़ा हो गया और पैंट पर साफ उभार बन गया।

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मैं उत्तेजित हो उठा और मन ही मन सोचने लगा, यार इसकी चूत एक बार चोदने को मिल जाए तो क्या बात हो। कितनी गरम और तंग होगी इसकी चूत। सोचते ही मेरे दिमाग में तस्वीरें आने लगीं – भाभी को बिस्तर पर लिटाकर उनके ब्लाउज के बटन खोलना, उनकी मोटी चूचियां बाहर निकालकर मसलना, चूचियों के गुलाबी निप्पल को मुंह में लेकर चूसना और फिर उनकी साड़ी ऊपर करके उनकी चूत पर जीभ फिराना।

उसके पति का नाम अभिषेक था। मैं सोचता, साले अभिषेक की कितनी अच्छी किस्मत है, इतनी हॉट और सेक्सी भाभी मिल गई। भाभी का फिगर 36-32-40 था और नाम रेखा था। उनकी कमर पतली थी लेकिन चूचियां और गांड इतनी भारी-भरकम कि देखकर ही लंड में सनसनी दौड़ जाती।

अब हर बार जब भी मैं उनके घर के सामने से गुजरता और भाभी दिख जातीं, तो उनकी मोटी चूचियों को देखकर मेरा लंड पैंट में पूरी तरह लकड़ी बन जाता। मैं बस खड़ा होकर उन्हें घूरता रहता। कभी वो झाड़ू लगातीं तो उनकी गांड पीछे की तरफ निकल आती और साड़ी में साफ गोलाई दिखती। कभी वो बाल सुखातीं तो चूचियां ऊपर-नीचे हिलतीं और मैं बस सपने देखने लगता कि इस भाभी को कैसे पटाऊं और कैसे चोदूं।

जब बर्दाश्त की हद पार हो गई तो मैंने ठान लिया कि इस हॉट भाभी को पटाकर इसकी चूत का मजा जरूर लूंगा। पटाने की कोशिश शुरू कर दी।

कभी-कभी मौका मिलता तो मीठी-मीठी बातें करता, उन्हें इंप्रेस करने की पूरी कोशिश करता। लेकिन भाभी नई-नई आई थीं, घर वाले उन्हें अकेला नहीं छोड़ते थे। सीधे बात करने का कोई मौका नहीं मिल रहा था।

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मेरे ताऊ जी का घर ठीक उनके घर के बगल में था। मैं वहां बार-बार आता-जाता और भाभी को देखने का बहाना ढूंढता रहता।

एक दिन मैं ताऊ जी के घर के पास खड़ा किसी से बात कर रहा था। भाभी अंदर से मेरी बातें सुन रही थीं। मैं जानबूझकर ऐसी बातें कर रहा था जो भाभी को अच्छी लगें, ताकि वो मेरी तरफ आकर्षित हो। पता था वो सब सुन रही हैं।

भाभी थोड़ी-थोड़ी आकर्षित होने लगी थीं। लेकिन फिर भी सीधे कैसे बोलूं, ये समझ नहीं आ रहा था। डर भी लग रहा था और उत्तेजना भी इतनी कि लंड पैंट फाड़ने को तैयार था।

मैंने अपना पुराना फार्मूला अपनाया। जब भी भाभी की तरफ जाता, तो सीधे उनकी आंखों में देखता। वो नजरें मिलते ही झट से पल्लू संभाल लेतीं, लेकिन उस एक पल में उनकी आंखों से साफ दिखता कि मुझे वो पसंद करने लगी हैं।

ऐसा कई दिन तक चलता रहा। एक दिन भाभी ने पल्लू संभाला तो मैंने उनका गोरा मुंह और लाल ब्लाउज में उभरी मोटी-मोटी गोरी चूचियां देख लीं। लंड एकदम खड़ा हो गया। मैं ताऊ जी के घर ऊपर गया और भाभी को देखते हुए जोरदार मुठ मार ली।

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ऐसा रोज-रोज होने लगा।

हर दिन की तरह उस दिन भी मैं ताऊ जी के घर पहुंचा। सीढ़ियां चढ़ते हुए मेरा दिल जोर-जोर से धड़क रहा था। पता था भाभी नीचे बैठी होंगी, शायद आज फिर वो पल्लू संभालने की कोशिश करेंगी या शायद नहीं। मैंने मन ही मन सोचा कि आज थोड़ा और करीब से देखूंगा।

ऊपर पहुंचकर मैंने खिड़की से नीचे झांका। भाभी आज हल्के गुलाबी रंग की साड़ी में थीं। ब्लाउज बहुत टाइट था, चूचियां इतनी उभरी हुईं कि ब्लाउज के बटन पर दबाव साफ दिख रहा था। वो किसी से बात कर रही थीं, हंस रही थीं, और हर हंसी के साथ उनकी चूचियां हल्के से उछल रही थीं। उनकी साड़ी का पल्लू थोड़ा ढीला था, जिससे गोरी कमर और नाभि की हल्की झलक बार-बार दिख जाती थी।

मेरा लंड पहले से ही सख्त हो चुका था। मैंने कमरे का दरवाजा अंदर से बंद कर लिया। अब मैं पूरी तरह अकेला था। पैंट की जिप धीरे-धीरे खोली और लंड बाहर निकाला। वो पूरी तरह तना हुआ था, सुपारा गहरा लाल हो चुका था और नसें उभरकर साफ दिख रही थीं। लंड की पूरी लंबाई गरम और सख्त थी, सुपारे पर पहले से ही हल्का प्रीकम चमक रहा था।

मैंने दाहिने हाथ से लंड को जड़ से पकड़ा और धीरे-धीरे ऊपर की तरफ हाथ फेरना शुरू किया। आंखें पूरी तरह भाभी पर टिकी हुई थीं। नीचे भाभी उठीं। उन्होंने साड़ी का पल्लू ठीक किया, लेकिन इस बार पल्लू थोड़ा सरका हुआ रह गया। उनकी पतली कमर, गहरी नाभि और उससे नीचे की चिकनी त्वचा साफ दिख रही थी। मैंने कल्पना की कि अगर मैं अभी नीचे उतर जाऊं और अपनी उंगलियों से उनकी कमर को छू लूं तो उनकी त्वचा कितनी नरम और गरम होगी।

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हाथ की रफ्तार थोड़ी बढ़ी। मैंने बाएं हाथ से अपनी गांड को सहलाया और लंड को और जोर से पकड़ा। भाभी की चूचियां हर सांस के साथ ऊपर-नीचे हो रही थीं। मैंने सोचा कि अगर मैं उनके ब्लाउज के बटन खोलूं तो वो मोटी, गोरी चूचियां बाहर आ जाएंगी। उनकी गुलाबी निप्पल्स सख्त होकर तनी हुई होंगी। मैंने कल्पना की कि मैं एक चूची को मुंह में लेकर चूसूंगा, जीभ से निप्पल को घुमाऊंगा और दूसरी चूची को हाथ से दबाऊंगा।

लंड और सख्त हो गया। सुपारे से प्रीकम की बूंदें निकलकर हाथ पर गिर रही थीं। मैंने हाथ की गति बढ़ाई, अब ऊपर-नीचे की हरकत तेज और लयबद्ध हो गई थी। भाभी अब किसी को बुला रही थीं। उनकी आवाज में वो मादक स्वर था जो मुझे पूरी तरह पागल कर देता था। मैंने कल्पना की कि वो मेरे नाम से पुकार रही हैं, “अंकित… आओ ना… इधर आओ…”

मैंने आंखें बंद कर लीं। दिमाग में भाभी मेरे सामने खड़ी थीं। वो शरमाकर मुस्कुरा रही थीं। धीरे-धीरे पल्लू गिराया, फिर ब्लाउज के बटन एक-एक करके खोले। उनकी भारी चूचियां बाहर आईं। गुलाबी निप्पल्स तने हुए थे। मैंने कल्पना की कि मैं उन्हें दोनों हाथों से दबा रहा हूं, उनकी चूचियां मेरी हथेलियों में दब रही हैं, मुलायम और गरम। फिर मैंने उनकी साड़ी खींची, पेटीकोट नीचे सरकाया और उनकी गोल, भरी गांड को पीछे से पकड़ लिया।

हाथ अब बहुत तेज चल रहा था। लंड फड़फड़ा रहा था। सांसें तेज और भारी हो गई थीं। भाभी की हंसी फिर सुनाई दी, उनकी आवाज मेरे कान में गूंज रही थी। मैंने आखिरी जोर लगाया। लंड का सुपारा फूल गया, नसें और उभर आईं। एक जोरदार झटके के साथ गरम-गरम वीर्य बाहर निकलने लगा। पहली फुहार तेजी से रुमाल पर गिरी, फिर दूसरी, तीसरी। मैंने हाथ की गति धीमी की, लेकिन हर फुहार के साथ शरीर कांप रहा था।

धीरे-धीरे लंड ढीला पड़ने लगा। मैंने रुमाल से साफ किया, लेकिन आंखें अभी भी भाभी पर टिकी हुई थीं। वो अब अंदर चली गई थीं, लेकिन उनका वो नजारा मेरे दिमाग में बस गया था।

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मैंने पैंट ठीक की, सांस संभाली और सोचा, बस अब और नहीं सह सकता। जल्दी से इस भाभी को पटाना ही होगा।

ऐसा रोज-रोज होने लगा।

एक दिन ताऊ जी के घर गया तो भाभी पहले से बैठी हुई थीं। वो आज हल्के नीले रंग की साड़ी में थीं। साड़ी का पल्लू हल्का सा सरककर कंधे से नीचे लटक रहा था। ब्लाउज थोड़ा गहरा कट वाला था, जिसकी वजह से उनकी मोटी, गोरी चूचियों की गहरी दरार साफ नजर आ रही थी। हर सांस के साथ वो ऊपर-नीचे हो रही थीं और वो गहराई और भी ज्यादा उभरकर सामने आ रही थी। मैंने जानबूझकर उनकी तरफ बिल्कुल नहीं देखा। सीधा अंदर चला गया ताकि वो पल्लू न डालें और अपना सुंदर मुखड़ा, वो लाल होंठ और वो भारी-भरकम बूब्स छिपा न लें।

मैंने छुपकर, आंखों के कोने से देखा। भाभी की नजरें मेरे ऊपर टिकी हुई थीं। वो मुझे ही घूर रही थीं, जैसे इंतजार कर रही हों कि मैं कब मुड़कर देखूंगा। जैसे ही मेरी नजर उनसे टकराई, वो शरमाकर हल्के से मुस्कुरा दीं। उनकी आंखों में वो चमक थी, जो साफ बता रही थी कि अब वो मेरे खेल में शामिल हो चुकी हैं। उनके गाल लाल हो गए थे और होंठों पर हल्की सी नमी थी।

मैं समझ गया कि भाभी पटने वाली हैं। वो मेरे आने का इंतजार कर रही थीं, शायद रोज मेरी एक झलक के लिए। दिल की धड़कन तेज हो गई, लेकिन मैंने खुद को संभाला और बिना कुछ कहे वहां से निकल गया।

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अगली बार फिर वही किया। ताऊ जी के घर से लौटते वक्त भाभी की तरफ नहीं देखा। रास्ते में थोड़ा रुक गया, फोन निकाला और जानबूझकर झूठ-मूठ बात करने लगा। आवाज थोड़ी ऊंची रखकर ताकि भाभी सुन लें।

आह भरते हुए बोला, “सच में यार… तुम मुझे समझ ही नहीं रही हो। एक बार मिलने का मौका तो दो, खुश न कर दूं तो कहना!”

फिर धीरे से भाभी की तरफ देखा। वो खड़ी थीं, दरवाजे के पास। मेरी बात सुनकर उनका चेहरा लाल हो गया। उनकी सांसें तेज हो गई थीं। ब्लाउज के भीतर उनकी चूचियां और तेजी से ऊपर-नीचे हो रही थीं। वो समझ गईं कि ये सब उनके लिए ही है। वो हंसती हुई अंदर मुड़ गईं, लेकिन जाते वक्त एक बार फिर मेरी तरफ देखकर मुस्कुराईं। उनकी मुस्कान में शरारत थी और आंखों में एक तरह की हिम्मत। मैं दिल थामकर लौटा, लग रहा था जैसे जीत हो गई हो।

दाना फेंक दिया था, भाभी ने उसे चुग लिया। अब वो मुंह नहीं छिपाती थीं, बल्कि मेरी नजरों से बचने की बजाय थोड़ा और दिखाती थीं। साड़ी का पल्लू जानबूझकर सरकने देतीं, ब्लाउज की गहराई और साफ नजर आने देतीं।

एक दिन भाभी के घर के पास उनकी दोस्त कोमल आई। कोमल मेरी क्लासमेट थी, अच्छी जान-पहचान थी। मैंने सोचा अब कोमल के जरिए अपनी बात भाभी तक पहुंचा दूं।

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जब भी कोमल से मिलता, मैं भाभी की तारीफ शुरू कर देता। कहता, “यार कोमल, रेखा भाभी कितनी खूबसूरत हैं ना। उनकी मोटी-मोटी चूचियां और वो गोल-मटोल गांड देखकर दिल धड़क जाता है। सच में, ऐसी भाभी मिल जाए तो क्या बात हो।”

कोमल हंसकर टाल देती, लेकिन मैं रुकता नहीं।

एक दिन मैंने सीधे कह दिया, “कोमल, रेखा भाभी मुझे बहुत पसंद हैं। तू भाभी से मेरी बात करा दे ना। रात को नींद नहीं आती, भूख नहीं लगती। मेरा हाल बहुत खराब है, सच में।”

कोमल चौंक गई, बोली, “अंकित, तू क्या पागल हो गया है? उसकी अभी-अभी शादी हुई है। तू मुझे तो मरवा देगा क्या? मैं कुछ नहीं कहूंगी, भूल जा ये सब।”

मैं उदास होकर लौटा। लगा कि अब सब खत्म। लेकिन फिर भी कोमल के पास उदास चेहरा लेकर जाता रहा, ताकि वो खुद ही पिघल जाए।

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फिर एक दिन अचानक रेखा भाभी का फोन आया। मैं उस वक्त कॉलेज में था, क्लास के बीच में। फोन देखते ही दिल की धड़कन रुक सी गई।

हैलो सुनते ही मेरे रौंगटे खड़े हो गए। पूरा बदन सिहर उठा, जैसे बिजली का झटका लगा हो।

मैंने धीरे से कहा, “हैलो जी, कौन बोल रही हैं?”

भाभी हंसकर बोलीं, “अब पता नहीं चल रहा?”

मैंने मजाक में कहा, “नहीं, सच में कौन?”

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भाभी बोलीं, “पहचानो ना, कौन हूं मैं?”

मैंने तुरंत कहा, “आप रेखा भाभी बोल रही हैं ना!”

भाभी बोलीं, “हां मैं ही हूं। लेकिन पहचाना कैसे?”

मैंने कहा, “जिसकी याद रात-दिन आती रहती है, उसे कैसे नहीं पहचान सकता।”

भाभी थोड़ी शरमाकर बोलीं, “कहां हो तुम?”

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मैंने कहा, “अभी कॉलेज में हूं।”

भाभी बोलीं, “ठीक है, कॉलेज से आ जाओ… फिर बात करते हैं।”

घर लौटा तो भाभी साड़ी पहने बाहर खड़ी थीं। आज वो लाल साड़ी में थीं, जो उनकी गोरी त्वचा पर बहुत जंच रही थी। साड़ी में उनकी पतली कमर और बड़े-बड़े गोल स्तन देखकर मेरा लंड उफान मारने लगा, पैंट में तंबू बन गया।

मैंने दूर से ही इशारा किया फोन करने का। भाभी मुस्कुराईं और अंदर चली गईं।

मैंने तुरंत कॉल किया। भाभी ने उठाया, “हां बोलो।”

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मैंने कहा, “और सुनाओ, कैसी हो?”

भाभी बोलीं, “अभी देखा नहीं क्या कैसी हूं?”

मैंने कहा, “देखा तो था, बड़ी कातिल लग रही हो। किसी का कत्ल करोगी क्या?”

भाभी हंसकर बोलीं, “कत्ल कैसे?”

मैंने कहा, “एकदम सेक्सी लग रही हो, दिल मार डालोगी।”

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भाभी बोलीं, “अच्छा जी। ये बताओ कोमल से क्या-क्या कह रहे थे?”

मैंने कहा, “भाभी, तुम्हें बहुत पसंद करता हूं। तुमको देखे बिना मन नहीं लगता। बस एक बार मिलना चाहता हूं।”

भाभी बोलीं, “मैं शादीशुदा हूं अंकित।”

मैंने कहा, “मुझे पता है, लेकिन बस एक बार मिलना चाहता हूं।”

भाभी बोलीं, “मिलना चाहते हो या चोदना चाहते हो?”

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मैं एकदम डर गया लेकिन फिर हिम्मत करके खुलकर बोला।

मैंने कहा, “हां, कुछ भी समझ लो।”

भाभी बोलीं, “साफ़-साफ बोलो ना।”

मैंने कहा, “सुनो यार, सच्ची बात बताऊं तो तुमको देखकर तुम्हारी चूत चोदने का मन करता है।”

भाभी थोड़ी देर चुप रहीं, फिर बोलीं, “अच्छा, तो कैसे चोदोगे? फोन पर ही चोद दोगे?”

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मैंने कहा, “नहीं भाभी, तुम्हारे ऊपर चढ़कर, जोर-जोर से चोदूंगा।”

भाभी हंसकर बोलीं, “तो देर किस बात की है… आज रात को आ जाओ।”

मैंने कहा, “अभी आ जाता हूं।”

भाभी बोलीं, “अभी मत आना, वो पास में ही कहीं काम कर रहे हैं। कभी भी आ सकते हैं।”

मैंने कहा, “बस एक बार आने तो दो।”

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भाभी बोलीं, “नहीं, अभी रहने दो। फिर कभी।”

बातें करते-करते मैं उनके घर के दरवाजे पर पहुंच गया। घर में कोई नहीं था। भाभी किचन में खड़ी फोन पर बात कर रही थीं।

मैंने धीरे से दरवाजा बंद किया और चाबी घुमाकर लॉक कर दिया। अब कोई भी अंदर नहीं आ सकता था। किचन में घुसते ही भाभी की नंगी कमर दिखी – साड़ी का पल्लू थोड़ा सरका हुआ था, गोरी त्वचा पर हल्की चमक थी, और कमर की वो पतली लकीर देखकर मैं सच में पागल हो गया। बिना सोचे-समझे पीछे से उनकी कमर पर हाथ रख दिया, उंगलियां उनकी नरम त्वचा पर फिसल गईं।

भाभी एकदम घबरा गईं। उनका शरीर सिहर उठा, वो तेजी से पलटीं और मेरी तरफ देखकर बोलीं, “अरे तुम इतनी जल्दी यहां आ गए? अभी नहीं, रात में आना। हटो, कोई आ जाएगा।” उनकी आवाज में डर और थोड़ी सी उत्तेजना दोनों थी।

मैंने उनकी गर्दन पर होंठ रख दिए, पहले हल्के से चूमा, फिर जीभ से चाटते हुए कहा, “दरवाजा लगा दिया है भाभी, कोई नहीं आएगा। बस थोड़ा सा… मैं रुक नहीं पा रहा।” मेरी गर्म सांस उनकी गर्दन पर लग रही थी।

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भाभी थोड़ी ढीली पड़ गईं। उनका प्रतिरोध कम हो गया, शरीर मेरे साथ झुकने लगा। मैंने पीछे से अपना सख्त लंड उनकी गांड की दरार में दबा दिया – पैंट के ऊपर से ही महसूस हो रहा था कि उनका गर्म बदन मेरे लंड को महसूस कर रहा है। साथ ही दोनों हाथ आगे बढ़ाकर उनके मोटे-मोटे मम्मों को दबाने लगा। ब्लाउज के ऊपर से ही उनकी चूचियां हाथों में आ गईं, इतनी मुलायम और भरी हुई कि दबाते ही उंगलियां धंस गईं।

भाभी की सांसें तेज हो गईं। मैंने उनका चेहरा अपनी तरफ घुमाया और होंठों पर होंठ रख दिए। पहले हल्के से चूमा, फिर जीभ अंदर डालकर चूसने लगा। भाभी ने पहले थोड़ा विरोध किया, लेकिन कुछ ही पलों में वो भी मेरे साथ देने लगीं। उनकी जीभ मेरी जीभ से खेलने लगी, सांसें गर्म और तेज।

मैंने उनका पल्लू धीरे से नीचे गिराया। साड़ी का पल्लू फर्श पर गिरा। अब उनके बड़े-बड़े स्तन ब्लाउज में उभरे हुए थे। मैंने उन पर टूट पड़ा – ब्लाउज के ऊपर से चूचियां चूमने, चाटने लगा। भाभी गर्म होकर सिसकारियां मारने लगीं, “उफ्फ… अंकित… आह…” उन्होंने मेरी गर्दन पकड़ ली और मेरे मुंह को अपनी चूचियों में दबा दिया।

मैंने दोनों हाथ उनकी गांड पर रखकर जोर से भींचा। उनकी गांड इतनी गोल और मुलायम थी कि हाथों में भर गई। फिर ब्लाउज के बटन एक-एक करके खोलने लगा। हर बटन खुलते ही उनकी गोरी त्वचा ज्यादा दिखने लगी। ब्लाउज खुला तो अंदर लाल रंग की ब्रा में उनके मोटे मम्मे दबे हुए थे। मैंने ब्रा के हुक पीछे से खोले। जैसे ही हुक खुले, दोनों मोटे गोरे मम्मे बाहर उछल आए – गोल, तने हुए, बिल्कुल सख्त, निप्पल्स गुलाबी और खड़े हुए।

मैंने भाभी को गोद में उठा लिया। उनकी कमर पर हाथ रखकर किचन की स्लैब पर बैठा दिया। उनके दोनों पैर खोलकर मैं उनके बीच में खड़ा हो गया। एक चूची मुंह में लेकर चूसने लगा – जीभ से निप्पल घुमाता, हल्के से काटता। दूसरी चूची को हाथ से मसलता रहा। भाभी गर्दन पीछे करके बोलीं, “आह्ह… उफ्फ… कितना अच्छा लग रहा है अंकित… चूसो जोर से… आह… और जोर से… हां ऐसे ही…”

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मेरा लंड उनकी चूत पर रगड़ खा रहा था। पैंट के ऊपर से भी महसूस हो रहा था कि उनकी चूत गर्म और गीली हो चुकी है। भाभी बेचैन हो रही थीं, कमर हिला रही थीं।

मैंने ब्लाउज और ब्रा पूरी तरह उतार दी। अब वो कमर तक नंगी थीं। मैंने जीभ से चूचियों के बीच की गहराई में डाला, फिर नीचे पेट तक चाटा। भाभी मछली की तरह तड़प उठीं, “आह… वहां… उफ्फ… कितनी गुदगुदी हो रही है…”

भाभी ने हाथ बढ़ाकर मेरे लंड को पैंट के ऊपर से पकड़ लिया। कसकर मुठ्ठी में भर लिया, ऊपर-नीचे करने लगीं। मैं समझ गया कि अब भाभी मेरे लंड की सख्ती और मोटाई महसूस करके और गर्म हो रही हैं।

मैंने उन्हें गोद में उठाकर बेडरूम में ले गया। बिस्तर पर लिटाया। साड़ी धीरे-धीरे उतारी – पहले पल्लू, फिर कमर से साड़ी खींची। पेटीकोट का नाड़ा खोला, पेटीकोट नीचे गिरा। फिर चड्डी के किनारे पकड़कर खींची और पूरी तरह नंगी कर दिया।

उनका गोरा बदन मोतियों की तरह चमक रहा था। गुलाबी होंठ काट रही थीं। आंखों में बरसों की प्यास साफ दिख रही थी। उनकी चूत पर हल्के बाल थे, गीली होकर चमक रही थी।

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मैंने उनका एक पैर पकड़ा और उलटा कर दिया। खुद भी कपड़े उतारे – शर्ट, पैंट, अंडरवियर सब निकाल दिया। मेरा लंड पूरी तरह खड़ा, 7 इंच लंबा और मोटा, सुपारा लाल। मैं उनकी कमर से चिपक गया। मोटे स्तनों को दबाया। जीभ से कमर और पीठ चाटी। भाभी कमर हिलाने लगीं, “आह… वहां मत छोड़ो…”

मैंने उनके पूरे बदन को जीभ से चाटा। कभी पेट की नाभि में जीभ डालकर घुमाई, कभी मम्मे चूसे, कभी गर्दन पर काटा। भाभी पूरी तरह बेचैन हो गईं।

भाभी बोलीं, “आह… पागल कर दिया तूने… मैं बहुत प्यासी हूं… मेरी आग बुझा दे… अब मारोगे क्या… बस रुक नहीं पा रही… आह्ह…”

मैंने उनकी टांगें खोलीं। ऊपर चढ़ गया। लंड का सुपारा उनकी गीली चूत पर फेरने लगा – क्लिटोरिस पर रगड़ा, छेद पर दबाया। भाभी फड़फड़ा उठीं। चूत से रस टपक रहा था। मैंने सुपारा छेद पर रखा। उनके होंठ चूसते हुए धीरे-धीरे दबाया।

आधा लंड अंदर चला गया। भाभी की आंखें बंद हो गईं, होंठ काट लिए। चीख निकलने वाली थी लेकिन मेरे होंठों ने दबा लिया। “उफ्फ… कितना मोटा… धीरे…”

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फिर मैंने जोर-जोर से धक्के मारने शुरू किए। हर धक्के के साथ लंड अंदर-बाहर। भाभी “आह… उफ्फ… हां… ऐसे ही… आह्ह…” करने लगीं।

कुछ मिनट बाद भाभी का पूरा शरीर ऐंठने लगा। उनकी उंगलियां चादर को कसकर पकड़ रही थीं, पैरों की उंगलियां सिकुड़ गई थीं। उनकी चूत अंदर से तेज-तेज सिकुड़ने लगी, हर सिकुड़न में मेरे लंड को इतनी जोर से दबा रही थी कि लग रहा था जैसे निकलने ही नहीं देगी। अचानक उनकी चूत की दीवारों से गर्म-गर्म रस की तेज धार निकली, मेरे लंड को पूरी तरह भिगोते हुए बाहर की ओर बहने लगी। मैंने उस रस में भीगे लंड को और तेज गति से अंदर-बाहर करना जारी रखा। हर बार जब लंड बाहर आता, तो चूत के रस की मोटी परत उस पर चिपकी रहती, और फिर धक्का मारते ही पच-पच-पच की गीली, चिपचिपी आवाज कमरे में गूंज उठती। रस की छींटें मेरी जांघों पर, उनकी जांघों पर और आसपास गिर रही थीं।

भाभी ने अपनी जांघें और ज्यादा चौड़ी कर लीं, घुटनों को बाहर की ओर मोड़ दिया। उनकी एड़ियां मजबूती से टिकी हुई थीं, कमर थोड़ी ऊपर उठ गई थी ताकि मेरे लंड को और गहराई मिले। सांसें इतनी तेज चल रही थीं कि उनकी छाती तेजी से ऊपर-नीचे हो रही थी। उन्होंने आंखें बंद कर, होंठ काटते हुए कराहा, “आह… चोदो अंकित… जोर से चोदो… बहुत मजा आ रहा है… आह्ह… और तेज… और गहरा… मेरी चूत को पूरा भर दो…”

मैंने अपनी कमर को थोड़ा और नीचे झुकाया, दोनों हाथों से उनकी पतली कमर को मजबूती से पकड़ा, उंगलियां उनकी नरम त्वचा में धंस गईं। फिर पूरी ताकत से, लंबे और गहरे धक्के मारने लगा। हर धक्के में मेरा लंड उनकी चूत की अंतिम गहराई को छू रहा था, सुपारा उनकी गर्भाशय के मुंह को ठोक रहा था। भाभी का पूरा शरीर लहरा रहा था, उनकी गांड हर धक्के के साथ हिल रही थी। अचानक उनकी चूत ने बहुत जोर से सिकुड़ना शुरू किया, उन्होंने जोर से चीखते हुए चूत का पानी छोड़ दिया। गर्म, पतला रस लावा की तरह फूट पड़ा, मेरे लंड के चारों ओर फैल गया, बाहर बहकर मेरी जांघों पर गिरा और छींटें मारकर चारों तरफ बिखर गया। उनकी चूत बार-बार ऐंठ रही थी, मेरे लंड को अंदर खींचने की कोशिश कर रही थी।

मेरा लंड अभी भी पूरी तरह खड़ा, सख्त और गरम था, रस से चमक रहा था। भाभी ने थकी हुई लेकिन गहरी संतुष्टि भरी मुस्कान के साथ मेरी ओर देखा, आंखें नम थीं। उन्होंने धीमी, कांपती आवाज में कहा, “अभी झड़ा नहीं?”

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मैंने उनकी कमर पर प्यार से हाथ फेरते हुए, उनकी गर्दन पर होंठ रखकर कहा, “नहीं मेरी जान, ये तेरे देवर का हथियार है। इतनी जल्दी थकने वाला नहीं। अब घोड़ी बन जा।”

भाभी ने बिना एक शब्द बोले शरीर मोड़ा। घुटनों और कोहनियों के बल पर आ गईं। उनकी कमर अंदर की ओर धंसी हुई थी, गांड ऊपर की ओर उठ गई, चूत पीछे से पूरी तरह खुलकर मेरे सामने प्रस्तुत हो गई। चूत के दोनों होंठ सूजे हुए, लाल और चमकदार थे, अभी भी उनका रस धीरे-धीरे टपक रहा था। मैंने दोनों हाथों से उनके गोल, मुलायम नितंबों को फैलाया, अंगूठों से चूत के होंठों को और खोला। लंड का सुपारा उनकी चूत के गीले मुंह पर टिका, फिर मैंने कमर को आगे धकेला और एक ही लंबे, मजबूत झटके में पूरा लंड अंदर तक घुसा दिया।

भाभी ने गले से जोर की सिसकारी भरी, “आह्ह… कितना मोटा है तेरा… फाड़ दोगे मेरी चूत… उफ्फ… इतना गहरा…”

मैंने पीछे से ताबड़तोड़ धक्के मारने शुरू कर दिए। हर धक्के के साथ उनके नितंब मेरे पेट से टकरा रहे थे, थप-थप-थप की तेज आवाज कमरे में भर गई। मेरे गोदे उनकी चूत के नीचे वाले हिस्से को ठोक रहे थे। भाभी की चूत मेरे लंड को हर बार कसकर जकड़ ले रही थी, जैसे उसे अंदर ही रखना चाहती हो। मैंने उनकी कमर दोनों हाथों से पकड़ी, खींचा और और जोर से धक्के देने लगा। लंड हर बार जड़ तक धंस रहा था।

भाभी चीख रही थीं, आवाज कांप रही थी, “आह… हां देवर जी… ऐसे ही… जोर से… और तेज… आह्ह… चूत फाड़ दो… पूरी चोद दो मुझे… मजा आ रहा है… बहुत मजा…”

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कुछ देर तक मैं इसी तरह बिना रुके, लगातार तेज और गहरे धक्के मारता रहा। उनकी सांसें अब और बेकाबू हो गई थीं। फिर मैंने उनकी एक नितंब पर हल्की थपकी देते हुए पूछा, “किधर लोगी भाभी?”

भाभी ने सांसें फूलते हुए, आवाज में विनती के साथ कहा, “अंदर ही आ जाओ देवर जी… पूरा अंदर डाल दो… मेरी चूत में ही झड़ जाओ… मुझे अपना रस दो…”

मैंने उनकी बात सुनते ही रफ्तार और बढ़ा दी। छह-सात जोरदार, बहुत गहरे और तेज धक्के मारे। हर धक्के में मेरा लंड उनकी चूत की सबसे गहराई में जा रहा था। आखिरी धक्के के साथ मेरा लंड फड़फड़ाया, सिरा फूल गया और गरम-गरम पानी की मोटी-मोटी धारें उनकी चूत के अंदर छूटने लगीं। मैंने पूरा वजन उनके ऊपर डाल दिया, कमर को कसकर पकड़ा और सारा माल उनकी चूत की गहराई में उड़ेल दिया। भाभी की चूत ने मेरे लंड को इतनी जोर से जकड़ लिया कि लग रहा था हर बूंद सोख लेगी।

धीरे-धीरे मैंने लंड बाहर खींचा। भाभी की चूत से मेरा और उनका रस मिलकर सफेद-दूधिया, गाढ़ी धारा बनकर टपक रहा था, उनकी जांघों के बीच से बहकर नीचे गिर रहा था। भाभी की आंखों में संतुष्टि, थकान और खुशी के आंसू थे। अभिषेक में इतनी ताकत नहीं थी कि भाभी को इस तरह संतुष्ट कर पाता।

उस दिन से मैं ही भाभी की चूत बजा रहा हूं। अब जल्द ही भाभी की गांड मारने की प्लानिंग है। वो कहानी भी जल्दी पेश करूंगा।

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दोस्तों, आपको ये पूरी कहानी कैसी लगी? अपनी राय और फैंटेसी कमेंट में जरूर बताएं।

1983
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1 thought on “मोटी चूची वाली नवेली भाभी की चूत फाड़ दी”

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