Newly married bhabhi sex story, Moti chuchi bhabhi sex story: मेरा नाम अंकित है। मैं मेरठ का रहने वाला हूं। मेरी उम्र 24 साल है। हाइट 5 फुट 7 इंच है। देखने में काफी अच्छा और आकर्षक हूं।
मैं हमेशा से मोटी-मोटी चूचियों और गोल-मटोल उठी हुई गांड वाली लड़कियों और खासकर भाभियों का दीवाना रहा हूं। जहां भी ऐसी कोई महिला या भाभी दिखती है, मेरा लंड तुरंत खड़ा हो जाता है। मन करता है कि बस किसी तरह इसकी चूत में लंड घुसा दूं और अच्छे से पेल दूं।
हमारे पड़ोस में एक लड़के की नई-नई शादी हुई थी। शादी के कुछ दिनों बाद मैं घर से बाहर निकला तो पहली बार उस नई दुल्हन को देखा। बस देखता ही रह गया।
भाभी की मोटी-मोटी चूचियां ब्लाउज में उभरी हुई थीं और गांड इतनी गोल और उठी हुई कि देखते ही मेरी सांसें तेज हो गईं। मैं उत्तेजित हो उठा और मन ही मन सोचने लगा, यार इसकी चूत एक बार चोदने को मिल जाए तो क्या बात हो।
उसके पति का नाम अभिषेक था। मैं सोचता, साले अभिषेक की कितनी अच्छी किस्मत है, इतनी हॉट और सेक्सी भाभी मिल गई। भाभी का फिगर 36-32-40 था और नाम रेखा था।
अब हर बार जब भी मैं उनके घर के सामने से गुजरता और भाभी दिख जातीं, तो उनकी मोटी चूचियों को देखकर मेरा लंड पैंट में पूरी तरह लकड़ी बन जाता। मैं बस सपने देखने लगता कि इस भाभी को कैसे पटाऊं और कैसे चोदूं।
जब बर्दाश्त की हद पार हो गई तो मैंने ठान लिया कि इस हॉट भाभी को पटाकर इसकी चूत का मजा जरूर लूंगा। पटाने की कोशिश शुरू कर दी।
कभी-कभी मौका मिलता तो मीठी-मीठी बातें करता, उन्हें इंप्रेस करने की पूरी कोशिश करता। लेकिन भाभी नई-नई आई थीं, घर वाले उन्हें अकेला नहीं छोड़ते थे। सीधे बात करने का कोई मौका नहीं मिल रहा था।
मेरे ताऊ जी का घर ठीक उनके घर के बगल में था। मैं वहां बार-बार आता-जाता और भाभी को देखने का बहाना ढूंढता रहता।
एक दिन मैं ताऊ जी के घर के पास खड़ा किसी से बात कर रहा था। भाभी अंदर से मेरी बातें सुन रही थीं। मैं जानबूझकर ऐसी बातें कर रहा था जो भाभी को अच्छी लगें, ताकि वो मेरी तरफ आकर्षित हो। पता था वो सब सुन रही हैं।
भाभी थोड़ी-थोड़ी आकर्षित होने लगी लगी। लेकिन फिर भी सीधे कैसे बोलूं, ये समझ नहीं आ रहा था। डर भी लग रहा था और उत्तेजना भी इतनी कि लंड पैंट फाड़ने को तैयार था।
मैंने अपना पुराना फार्मूला अपनाया। जब भी भाभी की तरफ जाता, तो सीधे उनकी आंखों में देखता। वो नजरें मिलते ही झट से पल्लू संभाल लेतीं, लेकिन उस एक पल में उनकी आंखों से साफ दिखता कि मुझे वो पसंद करने लगी हैं।
ऐसा कई दिन तक चलता रहा। एक दिन भाभी ने पल्लू संभाला तो मैंने उनका गोरा मुंह और लाल ब्लाउज में उभरी मोटी-मोटी गोरी चूचियां देख लीं। लंड एकदम खड़ा हो गया। मैं ताऊ जी के घर ऊपर गया और भाभी को देखते हुए जोरदार मुठ मार ली।
ऐसा रोज-रोज होने लगा।
हर दिन की तरह उस दिन भी मैं ताऊ जी के घर पहुंचा। सीढ़ियां चढ़ते हुए मेरा दिल जोर-जोर से धड़क रहा था। पता था भाभी नीचे बैठी होंगी, शायद आज फिर वो पल्लू संभालने की कोशिश करेंगी या शायद नहीं। मैंने मन ही मन सोचा कि आज थोड़ा और करीब से देखूंगा।
ऊपर पहुंचकर मैंने खिड़की से नीचे झांका। भाभी आज हल्के गुलाबी रंग की साड़ी में थीं। ब्लाउज टाइट था, चूचियां इतनी उभरी हुईं कि ब्लाउज के बटन पर दबाव साफ दिख रहा था। वो किसी से बात कर रही थीं, हंस रही थीं, और हर हंसी के साथ उनकी चूचियां हल्के से उछल रही थीं।
मेरा लंड पहले से ही सख्त हो चुका था। मैंने दरवाजा बंद किया, कमरे में अकेला था। पैंट की जिप खोली और लंड बाहर निकाला। वो पूरी तरह तना हुआ था, सुपारा लाल हो चुका था, नसें उभरी हुईं। मैंने धीरे-धीरे हाथ फेरना शुरू किया, आंखें भाभी पर टिकी हुईं।
नीचे भाभी उठीं, साड़ी का पल्लू ठीक किया, लेकिन इस बार पल्लू थोड़ा सरका हुआ था। उनकी गोरी कमर और नाभि की झलक दिख रही थी। मैंने कल्पना की कि अगर मैं नीचे जाकर उन्हें छू लूं तो क्या होगा। हाथ तेज हो गया।
मैंने सोचा, भाभी की वो मोटी चूचियां अगर मैं दबाऊं, तो कितना मुलायम एहसास होगा। उनकी गांड को पीछे से पकड़कर दबाऊं, तो वो कैसे सिसकारी मारेंगी। लंड और सख्त हो गया।
मैंने आंखें बंद कीं और कल्पना में भाभी को अपने सामने खड़ा कर लिया। वो शरमाकर मुस्कुरा रही हैं, पल्लू गिरा रही हैं, ब्लाउज के बटन खोल रही हैं। उनकी गोरी चूचियां बाहर आ रही हैं, गुलाबी निप्पल्स तने हुए। मैंने हाथ और तेज चलाया।
नीचे से भाभी की हंसी फिर सुनाई दी। वो किसी को बुला रही थीं। उनकी आवाज में वो मादक स्वर था जो मुझे पागल कर देता था। मैंने कल्पना की कि वो मेरे नाम से पुकार रही हैं, “अंकित… आओ ना…”
मेरा सांस तेज हो गया। लंड का सुपारा गीला हो चुका था, प्रीकम निकल रहा था। मैंने हाथ की रफ्तार बढ़ाई। भाभी की चूचियां उछलती हुईं, गांड हिलती हुईं, सब कुछ दिमाग में घूम रहा था।
अचानक मैंने जोर से दबाव डाला। लंड फड़फड़ाया और गरम-गरम पानी बाहर निकलने लगा। मैंने रुमाल से पोंछा, लेकिन आंखें अभी भी भाभी पर टिकी हुईं। वो अब अंदर चली गई थीं, लेकिन उनका वो नजारा मेरे दिमाग में बस गया था।
मैंने पैंट ठीक की, सांस संभाली और सोचा, बस अब और नहीं सह सकता। जल्दी से इस भाभी को पटाना ही होगा।
ऐसा रोज-रोज होने लगा।
एक दिन ताऊ जी के घर गया तो भाभी पहले से बैठी हुई थीं। वो आज हल्के नीले रंग की साड़ी में थीं, ब्लाउज थोड़ा गहरा कट वाला, जिससे उनकी मोटी चूचियों की गहराई साफ झलक रही थी। मैंने जानबूझकर उनकी तरफ बिल्कुल नहीं देखा, सीधा अंदर चला गया ताकि वो पल्लू न डालें और अपना सुंदर मुखड़ा और वो गोरे बूब्स छिपा न लें।
मैंने छुपकर, आंखों के कोने से देखा। भाभी की नजरें मेरे ऊपर टिकी हुई थीं। वो मुझे ही घूर रही थीं, जैसे इंतजार कर रही हों कि मैं कब मुड़कर देखूंगा। जैसे ही मेरी नजर उनसे टकराई, वो शरमाकर हल्के से मुस्कुरा दीं। उनकी आंखों में वो चमक थी, जो साफ बता रही थी कि अब वो मेरे खेल में शामिल हो चुकी हैं।
मैं समझ गया कि भाभी पटने वाली हैं। वो मेरे आने का इंतजार कर रही थीं, शायद रोज मेरी एक झलक के लिए। दिल की धड़कन तेज हो गई, लेकिन मैंने खुद को संभाला और बिना कुछ कहे वहां से निकल गया।
अगली बार फिर वही किया। ताऊ जी के घर से लौटते वक्त भाभी की तरफ नहीं देखा। रास्ते में थोड़ा रुक गया, फोन निकाला और जानबूझकर झूठ-मूठ बात करने लगा, आवाज थोड़ी ऊंची रखकर ताकि भाभी सुन लें।
आह भरते हुए बोला, “सच में यार… तुम मुझे समझ ही नहीं रही हो। एक बार मिलने का मौका तो दो, खुश न कर दूं तो कहना!”
फिर धीरे से भाभी की तरफ देखा। वो खड़ी थीं, दरवाजे के पास, और मेरी बात सुनकर उनका चेहरा लाल हो गया। वो समझ गईं कि ये सब उनके लिए ही है। वो हंसती हुई अंदर मुड़ गईं, लेकिन जाते वक्त एक बार फिर मेरी तरफ देखकर मुस्कुराईं। मैं दिल थामकर लौटा, लग रहा था जैसे जीत हो गई हो।
दाना फेंक दिया था, भाभी ने उसे चुग लिया। अब वो मूंह नहीं छिपाती थीं, बल्कि मेरी नजरों से बचने की बजाय थोड़ा और दिखाती थीं।
एक दिन भाभी के घर के पास उनकी दोस्त कोमल आई। कोमल मेरी क्लासमेट थी, अच्छी जान-पहचान थी। मैंने सोचा अब कोमल के जरिए अपनी बात भाभी तक पहुंचा दूं।
जब भी कोमल से मिलता, मैं भाभी की तारीफ शुरू कर देता। कहता, “यार कोमल, रेखा भाभी कितनी खूबसूरत हैं ना। उनकी मोटी-मोटी चूचियां और वो गोल-मटोल गांड देखकर दिल धड़क जाता है। सच में, ऐसी भाभी मिल जाए तो क्या बात हो।”
कोमल हंसकर टाल देती, लेकिन मैं रुकता नहीं।
एक दिन मैंने सीधे कह दिया, “कोमल, रेखा भाभी मुझे बहुत पसंद हैं। तू भाभी से मेरी बात करा दे ना। रात को नींद नहीं आती, भूख नहीं लगती। मेरा हाल बहुत खराब है, सच में।”
कोमल चौंक गई, बोली, “अंकित, तू क्या पागल हो गया है? उसकी अभी-अभी शादी हुई है। तू मुझे तो मरवा देगा क्या? मैं कुछ नहीं कहूंगी, भूल जा ये सब।”
मैं उदास होकर लौटा। लगा कि अब सब खत्म। लेकिन फिर भी कोमल के पास उदास चेहरा लेकर जाता रहा, ताकि वो खुद ही पिघल जाए।
फिर एक दिन अचानक रेखा भाभी का फोन आया। मैं उस वक्त कॉलेज में था, क्लास के बीच में। फोन देखते ही दिल की धड़कन रुक सी गई।
हैलो सुनते ही मेरे रौंगटे खड़े हो गए। पूरा बदन सिहर उठा, जैसे बिजली का झटका लगा हो।
मैंने धीरे से कहा, “हैलो जी, कौन बोल रही हैं?”
भाभी हंसकर बोलीं, “अब पता नहीं चल रहा?”
मैंने मजाक में कहा, “नहीं, सच में कौन?”
भाभी बोलीं, “पहचानो ना, कौन हूं मैं?”
मैंने तुरंत कहा, “आप रेखा भाभी बोल रही हैं ना!”
भाभी बोलीं, “हां मैं ही हूं। लेकिन पहचाना कैसे?”
मैंने कहा, “जिसकी याद रात-दिन आती रहती है, उसे कैसे नहीं पहचान सकता।”
भाभी थोड़ी शरमाकर बोलीं, “कहां हो तुम?”
मैंने कहा, “अभी कॉलेज में हूं।”
भाभी बोलीं, “ठीक है, कॉलेज से आ जाओ… फिर बात करते हैं।”
घर लौटा तो भाभी साड़ी पहने बाहर खड़ी थीं। आज वो लाल साड़ी में थीं, जो उनकी गोरी त्वचा पर बहुत जंच रही थी। साड़ी में उनकी पतली कमर और बड़े-बड़े गोल स्तन देखकर मेरा लंड उफान मारने लगा, पैंट में तंबू बन गया।
मैंने दूर से ही इशारा किया फोन करने का। भाभी मुस्कुराईं और अंदर चली गईं।
मैंने तुरंत कॉल किया। भाभी ने उठाया, “हां बोलो।”
मैंने कहा, “और सुनाओ, कैसी हो?”
भाभी बोलीं, “अभी देखा नहीं क्या कैसी हूं?”
मैंने कहा, “देखा तो था, बड़ी कातिल लग रही हो। किसी का कत्ल करोगी क्या?”
भाभी हंसकर बोलीं, “कत्ल कैसे?”
मैंने कहा, “एकदम सेक्सी लग रही हो, दिल मार डालोगी।”
भाभी बोलीं, “अच्छा जी। ये बताओ कोमल से क्या-क्या कह रहे थे?”
मैंने कहा, “भाभी, तुम्हें बहुत पसंद करता हूं। तुमको देखे बिना मन नहीं लगता। बस एक बार मिलना चाहता हूं।”
भाभी बोलीं, “मैं शादीशुदा हूं अंकित।”
मैंने कहा, “मुझे पता है, लेकिन बस एक बार मिलना चाहता हूं।”
भाभी बोलीं, “मिलना चाहते हो या चोदना चाहते हो?”
मैं एकदम डर गया लेकिन फिर हिम्मत करके खुलकर बोला।
मैंने कहा, “हां, कुछ भी समझ लो।”
भाभी बोलीं, “साफ़-साफ बोलो ना।”
मैंने कहा, “सुनो यार, सच्ची बात बताऊं तो तुमको देखकर तुम्हारी चूत चोदने का मन करता है।”
भाभी थोड़ी देर चुप रहीं, फिर बोलीं, “अच्छा, तो कैसे चोदोगे? फोन पर ही चोद दोगे?”
मैंने कहा, “नहीं भाभी, तुम्हारे ऊपर चढ़कर, जोर-जोर से चोदूंगा।”
भाभी हंसकर बोलीं, “तो देर किस बात की है… आज रात को आ जाओ।”
मैंने कहा, “अभी आ जाता हूं।”
भाभी बोलीं, “अभी मत आना, वो पास में ही कहीं काम कर रहे हैं। कभी भी आ सकते हैं।”
मैंने कहा, “बस एक बार आने तो दो।”
भाभी बोलीं, “नहीं, अभी रहने दो। फिर कभी।”
बातें करते-करते मैं उनके घर के दरवाजे पर पहुंच गया। घर में कोई नहीं था। भाभी किचन में खड़ी फोन पर बात कर रही थीं।
मैंने धीरे से दरवाजा बंद किया और चाबी घुमाकर लॉक कर दिया। अब कोई भी अंदर नहीं आ सकता था। किचन में घुसते ही भाभी की नंगी कमर दिखी – साड़ी का पल्लू थोड़ा सरका हुआ था, गोरी त्वचा पर हल्की चमक थी, और कमर की वो पतली लकीर देखकर मैं सच में पागल हो गया। बिना सोचे-समझे पीछे से उनकी कमर पर हाथ रख दिया, उंगलियां उनकी नरम त्वचा पर फिसल गईं।
भाभी एकदम घबरा गईं। उनका शरीर सिहर उठा, वो तेजी से पलटीं और मेरी तरफ देखकर बोलीं, “अरे तुम इतनी जल्दी यहां आ गए? अभी नहीं, रात में आना। हटो, कोई आ जाएगा।” उनकी आवाज में डर और थोड़ी सी उत्तेजना दोनों थी।
मैंने उनकी गर्दन पर होंठ रख दिए, पहले हल्के से चूमा, फिर जीभ से चाटते हुए कहा, “दरवाजा लगा दिया है भाभी, कोई नहीं आएगा। बस थोड़ा सा… मैं रुक नहीं पा रहा।” मेरी गर्म सांस उनकी गर्दन पर लग रही थी।
भाभी थोड़ी ढीली पड़ गईं। उनका प्रतिरोध कम हो गया, शरीर मेरे साथ झुकने लगा। मैंने पीछे से अपना सख्त लंड उनकी गांड की दरार में दबा दिया – पैंट के ऊपर से ही महसूस हो रहा था कि उनका गर्म बदन मेरे लंड को महसूस कर रहा है। साथ ही दोनों हाथ आगे बढ़ाकर उनके मोटे-मोटे मम्मों को दबाने लगा। ब्लाउज के ऊपर से ही उनकी चूचियां हाथों में आ गईं, इतनी मुलायम और भरी हुई कि दबाते ही उंगलियां धंस गईं।
भाभी की सांसें तेज हो गईं। मैंने उनका चेहरा अपनी तरफ घुमाया और होंठों पर होंठ रख दिए। पहले हल्के से चूमा, फिर जीभ अंदर डालकर चूसने लगा। भाभी ने पहले थोड़ा विरोध किया, लेकिन कुछ ही पलों में वो भी मेरे साथ देने लगीं। उनकी जीभ मेरी जीभ से खेलने लगी, सांसें गर्म और तेज।
मैंने उनका पल्लू धीरे से नीचे गिराया। साड़ी का पल्लू फर्श पर गिरा। अब उनके बड़े-बड़े स्तन ब्लाउज में उभरे हुए थे। मैंने उन पर टूट पड़ा – ब्लाउज के ऊपर से चूचियां चूमने, चाटने लगा। भाभी गर्म होकर सिसकारियां मारने लगीं, “उफ्फ… अंकित… आह…” उन्होंने मेरी गर्दन पकड़ ली और मेरे मुंह को अपनी चूचियों में दबा दिया।
मैंने दोनों हाथ उनकी गांड पर रखकर जोर से भींचा। उनकी गांड इतनी गोल और मुलायम थी कि हाथों में भर गई। फिर ब्लाउज के बटन एक-एक करके खोलने लगा। हर बटन खुलते ही उनकी गोरी त्वचा ज्यादा दिखने लगी। ब्लाउज खुला तो अंदर लाल रंग की ब्रा में उनके मोटे मम्मे दबे हुए थे। मैंने ब्रा के हुक पीछे से खोले। जैसे ही हुक खुले, दोनों मोटे गोरे मम्मे बाहर उछल आए – गोल, तने हुए, बिल्कुल सख्त, निप्पल्स गुलाबी और खड़े हुए।
मैंने भाभी को गोद में उठा लिया। उनकी कमर पर हाथ रखकर किचन की स्लैब पर बैठा दिया। उनके दोनों पैर खोलकर मैं उनके बीच में खड़ा हो गया। एक चूची मुंह में लेकर चूसने लगा – जीभ से निप्पल घुमाता, हल्के से काटता। दूसरी चूची को हाथ से मसलता रहा। भाभी गर्दन पीछे करके बोलीं, “आह्ह… उफ्फ… कितना अच्छा लग रहा है अंकित… चूसो जोर से… आह… और जोर से… हां ऐसे ही…”
मेरा लंड उनकी चूत पर रगड़ खा रहा था। पैंट के ऊपर से भी महसूस हो रहा था कि उनकी चूत गर्म और गीली हो चुकी है। भाभी बेचैन हो रही थीं, कमर हिला रही थीं।
मैंने ब्लाउज और ब्रा पूरी तरह उतार दी। अब वो कमर तक नंगी थीं। मैंने जीभ से चूचियों के बीच की गहराई में डाला, फिर नीचे पेट तक चाटा। भाभी मछली की तरह तड़प उठीं, “आह… वहां… उफ्फ… कितनी गुदगुदी हो रही है…”
भाभी ने हाथ बढ़ाकर मेरे लंड को पैंट के ऊपर से पकड़ लिया। कसकर मुठ्ठी में भर लिया, ऊपर-नीचे करने लगीं। मैं समझ गया कि अब भाभी मेरे लंड की सख्ती और मोटाई महसूस करके और गर्म हो रही हैं।
मैंने उन्हें गोद में उठाकर बेडरूम में ले गया। बिस्तर पर लिटाया। साड़ी धीरे-धीरे उतारी – पहले पल्लू, फिर कमर से साड़ी खींची। पेटीकोट का नाड़ा खोला, पेटीकोट नीचे गिरा। फिर चड्डी के किनारे पकड़कर खींची और पूरी तरह नंगी कर दिया।
उनका गोरा बदन मोतियों की तरह चमक रहा था। गुलाबी होंठ काट रही थीं। आंखों में बरसों की प्यास साफ दिख रही थी। उनकी चूत पर हल्के बाल थे, गीली होकर चमक रही थी।
मैंने उनका एक पैर पकड़ा और उलटा कर दिया। खुद भी कपड़े उतारे – शर्ट, पैंट, अंडरवियर सब निकाल दिया। मेरा लंड पूरी तरह खड़ा, 7 इंच लंबा और मोटा, सुपारा लाल। मैं उनकी कमर से चिपक गया। मोटे स्तनों को दबाया। जीभ से कमर और पीठ चाटी। भाभी कमर हिलाने लगीं, “आह… वहां मत छोड़ो…”
मैंने उनके पूरे बदन को जीभ से चाटा। कभी पेट की नाभि में जीभ डालकर घुमाई, कभी मम्मे चूसे, कभी गर्दन पर काटा। भाभी पूरी तरह बेचैन हो गईं।
भाभी बोलीं, “आह… पागल कर दिया तूने… मैं बहुत प्यासी हूं… मेरी आग बुझा दे… अब मारोगे क्या… बस रुक नहीं पा रही… आह्ह…”
मैंने उनकी टांगें खोलीं। ऊपर चढ़ गया। लंड का सुपारा उनकी गीली चूत पर फेरने लगा – क्लिटोरिस पर रगड़ा, छेद पर दबाया। भाभी फड़फड़ा उठीं। चूत से रस टपक रहा था। मैंने सुपारा छेद पर रखा। उनके होंठ चूसते हुए धीरे-धीरे दबाया।
आधा लंड अंदर चला गया। भाभी की आंखें बंद हो गईं, होंठ काट लिए। चीख निकलने वाली थी लेकिन मेरे होंठों ने दबा लिया। “उफ्फ… कितना मोटा… धीरे…”
फिर मैंने जोर-जोर से धक्के मारने शुरू किए। हर धक्के के साथ लंड अंदर-बाहर। भाभी “आह… उफ्फ… हां… ऐसे ही… आह्ह…” करने लगीं।
कुछ मिनट बाद भाभी ऐंठने लगीं। उनकी चूत सिकुड़ने लगी। गर्म रस निकलने लगा। मैं रस में लंड भिगोकर और तेज चोदता रहा। कमरे में पच-पच-पच की आवाज गूंज रही थी, चूत का रस लंड पर चिपक रहा था।
भाभी ने जांघें और चौड़ी कीं। “आह… चोदो अंकित… जोर से चोदो… मजा आ रहा है… आह्ह… और तेज…”
मैंने पूरी ताकत से धक्के मारे। भाभी ने जोर से चूत का पानी छोड़ दिया। लावा बिस्तर पर फैल गया, गीला हो गया।
मेरा लंड अभी भी खड़ा था। भाभी मुस्कुराईं और बोलीं, “अभी झड़ा नहीं?”
मैंने कहा, “नहीं मेरी जान, ये तेरे देवर का हथियार है। इतनी जल्दी थकने वाला नहीं। अब घोड़ी बन जा।”
भाभी घोड़ी बन गईं। गांड ऊपर उठी, चूत पीछे से खुली। मैंने पीछे से लंड उनकी चूत में पूरा घुसा दिया। ताबड़तोड़ धक्के मारने लगा – हर धक्के में गांड हिल रही थी।
भाभी चीखीं, “आह्ह… कितना मोटा है… फाड़ दोगे मेरी चूत… उफ्फ… जोर से… आह… हां देवर जी… ऐसे ही…”
कुछ देर बाद मैंने पूछा, “किधर लोगी भाभी?”
भाभी बोलीं, “अंदर ही आ जाओ देवर जी… पूरा अंदर डाल दो…”
मैंने 6-7 जोरदार धक्के मारे। लंड फड़फड़ाया और सारा गरम पानी उनकी चूत के अंदर छोड़ दिया। भाभी की चूत ने लंड को कसकर पकड़ लिया, जैसे पूरा सोख रही हो।
लंड बाहर निकाला। भाभी की चूत से मेरा और उनका रस मिलकर टपक रहा था। भाभी की आंखों में खुशी के आंसू थे। अभिषेक में इतनी ताकत नहीं थी कि भाभी को संतुष्ट कर पाता।
उस दिन से मैं ही भाभी की चूत बजा रहा हूं। अब जल्द ही भाभी की गांड मारने की प्लानिंग है। वो कहानी भी जल्दी पेश करूंगा।
दोस्तों, आपको ये पूरी कहानी कैसी लगी? अपनी राय और फैंटेसी कमेंट में जरूर बताएं।
टेलीग्राम चैनल जॉइन करें - रोज़ाना नई कहानी अपडेट के लिए
Related Posts