College project sex story, Hot classmate chudai sex story, Hotel room hardcore sex story: नमस्कार दोस्तों, मेरा नाम अजय है और मैं भुवनेश्वर का रहने वाला हूं। यह कहानी मेरी और मेरे क्लास में पढ़ने वाली एक लड़की रिया की है। इस कहानी में आप पढ़ेंगे कि कैसे रिया और मैं एक दूसरे के प्यार में पड़ गए और फिर हमारा प्यार चुदाई के रास्ते तक पहुंच गया। यह कहानी आज से चार साल पहले की है जब मैं अपने आखिरी साल की पढ़ाई कर रहा था।
कहानी पर आने से पहले मैं आपको रिया के बारे में बता देता हूं। रिया मेरी क्लास की सबसे हसीन लड़की थी। उसका रंग दूध सा गोरा था, चेहरा इतना निखरा हुआ कि देखते ही मन ललचा जाए। उसकी आंखें बड़ी-बड़ी काली, होंठ गुलाबी और मुस्कान ऐसी कि दिल धड़क जाए। उसका फिगर एकदम परफेक्ट था – पतली कमर, भरे हुए गोरे चूचे जो टाइट टॉप में भी उभरे नजर आते, और गोल मटोल कूल्हे जो चलते वक्त लहराते थे। उसे देखकर सच में बूढ़ों के भी लंड खड़े हो जाते थे। बस वह इसी साल हमारे कॉलेज में नई आई थी, इसलिए उसके पीछे लड़कों की लाइन लगी रहती थी। पूरे कॉलेज में रिया हॉट टॉपिक बन चुकी थी, हर कोई उसकी बात करता था।
लेकिन रिया ने अब तक किसी को घास नहीं डाली थी। वह थोड़ी मॉडर्न जरूर थी – कभी जींस-टॉप पहनती, कभी कुर्ती में भी लगती थी खूबसूरत – लेकिन अपनी मर्यादा कभी नहीं भूलती थी। वह क्लास अटेंड करती, नोट्स बनाती, प्रैक्टिकल करती और काम खत्म करके जल्दी कॉलेज से निकल जाती। कोई लड़का पास आने की कोशिश करता तो बस मुस्कुराकर टाल देती।
अब कॉलेज रेगुलर शुरू होते ही हमें आखिरी साल वालों को प्रोजेक्ट करना था। ग्रुप बनाने के लिए चिट निकाली गई। सबकी नजर अच्छे पार्टनर पर थी, और भगवान ने मेरी बात सुन ली। मेरी और रिया की चिट एक साथ निकली। अब हमें मिलकर प्रोजेक्ट पूरा करना था।
जैसे ही हम टीम में आए, उसी दिन से हमारी बातें शुरू हो गईं। शुरू-शुरू में सिर्फ प्रोजेक्ट की बातें होती थीं – टॉपिक क्या लेना है, रिसर्च कहां से करनी है, डेटा कैसे कलेक्ट करना है। लेकिन धीरे-धीरे बातें पर्सनल होने लगीं। क्लास के बाद लाइब्रेरी में बैठकर डिस्कस करते, कभी कैंटीन में चाय पीते हुए हंसते-बोलते। हमारी दोस्ती अच्छी होने लगी। अब हम अच्छे दोस्त बन चुके थे।
एक दिन रिया ने मुझे अपना सीक्रेट बताया। उसका पहले से एक बॉयफ्रेंड था, नाम अनुज। लेकिन उन दोनों के बीच अब काफी झगड़े हो रहे थे। छोटी-छोटी बातों पर लड़ाई, फोन पर चिल्लाना, मैसेज में ताने। रिया उदास रहने लगी थी। वह रोज मेरे पास आकर अनुज की शिकायत करती। मैं चुपचाप सुनता, कभी सलाह देता।
रोज उनके झगड़े की बातें सुन-सुनकर एक दिन मैंने हिम्मत करके कहा, “रिया, अगर इतने झगड़े हो रहे हैं तो इससे अच्छा है तुम दोनों अलग हो जाओ। दोनों को सुकून मिलेगा, खुश रहोगे।”
वह एकदम गुस्से में आ गई। बोली, “तुम्हें क्या? तुम्हें क्या पता हमारे रिलेशन के बारे में?” और बिना कुछ कहे चली गई। उसके बाद दो दिन वह कॉलेज नहीं आई। मैं बार-बार फोन करता लेकिन फोन बंद रहता। मुझे बहुत डर लगने लगा। सोचने लगा कहीं उसने दोस्ती तोड़ दी तो? मैं रात भर सो नहीं पाया।
तीसरे दिन जैसे ही क्लास में पहुंचा, रिया खुद मेरे पास आकर बैठ गई। उसकी आंखें थोड़ी लाल थीं। हमारी बातें फिर शुरू हो गईं। उसने धीरे से कहा, “अजय, घर जाकर मैंने तुम्हारी बात पर बहुत सोचा। तुम सही थे। मैंने अनुज से ब्रेकअप कर लिया। अब हम अलग हैं।” फिर मुस्कुराकर बोली, “थैंक्स अजय, तुमने सही सलाह दी।” मैंने बस मुस्कुरा दिया। उसके बाद हमारी बातें फिर नॉर्मल हो गईं, बल्कि और करीब आ गईं।
अब ब्रेकअप के बाद रिया को अकेलापन बहुत महसूस होता था। उसे कोई ऐसा चाहिए था जो उसकी बात सुने, समझे। इस चक्कर में हम दोनों ज्यादा से ज्यादा समय साथ बिताने लगे। क्लास में साथ बैठते, ब्रेक में साथ घूमते, कभी लाइब्रेरी में, कभी कैंटीन में। पूरे कॉलेज को लगने लगा कि हम कपल हैं। लोग देखते, फुसफुसाते, “देखो अजय और रिया कितने क्लोज हो गए हैं।” हम दोनों को भी अच्छा लगता था। हमेशा साथ नजर आते थे।
ऐसे ही दिन बीत रहे थे। एक दिन मैं कॉलेज नहीं जा पाया। सुबह जल्दबाजी में मेरा फोन गिरकर टूट गया। मैं बहुत परेशान था। घरवालों ने भी फोन टूटने पर काफी डांटा-सुनाया। अगले दिन जैसे ही कॉलेज पहुंचा, रिया दूर से मुझे देखकर तेजी से आई। मैंने उसे देखकर स्माइल दी, लेकिन अचानक उसकी आंखों में आंसू आ गए। वह रोते हुए मेरे गले लग गई। मैं हैरान रह गया। मैंने उसे अपनी बाहों में कसकर पकड़ लिया और पूछा, “रिया, क्या हुआ? क्यों रो रही हो?”
कुछ देर तक वह बस रोती रही। मैं भूल गया कि हम कॉलेज के बीच में हैं, चारों तरफ लोग देख रहे हैं। फिर मैंने धीरे से उसे अलग किया और कहा, “चलो कैंटीन चलते हैं, वहां आराम से बात करते हैं।”
कैंटीन में एक कोने वाली टेबल पर बैठे। वहां उसने आंसू पोंछते हुए सीधे मेरी आंखों में देखकर कहा, “अजय, मुझे कल ही अहसास हुआ कि तुम्हारे बिना रहना मेरे लिए कितना मुश्किल है। मैं तुमसे बहुत प्यार करने लगी हूं। क्या तुम मेरे साथ रहोगे?”
मैं एक पल के लिए स्तब्ध रह गया। इतनी खूबसूरत, इतनी प्यारी लड़की खुद प्रोपोज कर रही है। दिल जोर-जोर से धड़क रहा था। मैंने मुस्कुराकर कहा, “रिया, मैं भी तो तुम्हारे बिना नहीं रह सकता। हां, मैं तुम्हारा हूं।”
ऐसे हम दोनों ऑफिशियली कपल बन गए। यहां से हमारी प्रेम गाड़ी तेजी से चलने लगी। अब रोज घंटों फोन पर बातें, मैसेज, कॉलेज में हाथ पकड़कर घूमना। हम एक-दूसरे से पूरी तरह खुल चुके थे। धीरे-धीरे छोटे-छोटे टच शुरू हुए – हाथ थामना, कंधे पर सिर रखना, गाल पर किस करना। फिर चूमने लगे – कभी लाइब्रेरी के पीछे छिपकर, कभी पार्क में। लेकिन कभी इससे आगे नहीं बढ़ पाए। मौका ही नहीं मिलता था। कॉलेज में एकांत मिलना नामुमकिन था, और बाहर घूमते वक्त भी हम बस रोमांस तक सीमित रहते। हम दोनों में से किसी ने भी जल्दबाजी नहीं की। सब कुछ धीरे-धीरे, प्यार से।
लेकिन समय को कुछ और मंजूर था। प्रोजेक्ट के लिए दो-तीन दिन बाहर जाना पड़ा। घरवाले मना नहीं कर सके। हमें दो रातें तीन दिन बाहर रुकना पड़ा। हमने डबल रूम लिया किराया कम पड़े। हमारा एक दूसरे पर पूरा भरोसा था।
पहली रात जब हम बिस्तर पर सोने लगे तो पहले हम एक-दूसरे की बाहों में लेट गए। कमरे की हल्की रोशनी में रिया का चेहरा और भी खूबसूरत लग रहा था। मेरा दिल जोर-जोर से धड़क रहा था, जैसे कोई डर भी था और उत्सुकता भी। हम दोनों चुपचाप एक-दूसरे को देख रहे थे, फिर धीरे से मैंने उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए। पहले तो हल्का-सा चुंबन था, लेकिन जल्दी ही वह गहरा हो गया। मेरी जीभ उसके होंठों को चीरते हुए अंदर गई, उसकी जीभ से लिपट गई। हम दोनों की सांसें तेज हो रही थीं।
मैंने धीरे से अपना हाथ उसके टॉप के ऊपर से उसके उरोजों पर रखा। वे इतने नरम और भरे हुए थे कि हाथ में पूरा भर जाते थे। मैंने हल्के-हल्के मसलना शुरू किया, कभी दबाया तो कभी सहलाया। रिया की सिसकारियां निकलने लगीं, “म्म्म… अजय…” मैंने उसके होंठों से मुंह हटाकर उसके गले पर किस करने लगा, फिर कान के पास जाकर हल्का-सा काटा। वह कांप उठी। मेरा हाथ अब नीचे सरक रहा था, उसके पेट पर उंगली से गोल-गोल घुमाने लगा। उसकी सांसें और तेज हो गईं। तभी उसने मेरा हाथ पकड़ा और खुद उसे अपने टॉप के अंदर ले गई। अब मेरी हथेली सीधे उसके नरम उरोजों पर थी, ब्रा के कपड़े के ऊपर से भी गर्मी महसूस हो रही थी।
मैं पूरी तरह होश खो चुका था। हवस ने मुझे अपने वश में कर लिया। मैंने जल्दी से उसका टॉप ऊपर करके उतार दिया। अब वह सिर्फ ब्रा में थी। उसके बड़े उरोज ब्रा से बाहर झांक रहे थे, गहरी दरार साफ दिख रही थी। मैंने ब्रा के ऊपर से ही उसके निप्पल को चूसा, कपड़े के ऊपर से दांत लगाए। रिया कराह रही थी, “आह… अजय… और…” फिर उसने खुद पीछे हाथ डालकर ब्रा की हुक खोल दी। ब्रा गिर गई और उसके गोरे, भरे हुए चूचे पूरी तरह आजाद हो गए। निप्पल गुलाबी और सख्त हो चुके थे। मैंने एक चूचा मुंह में भर लिया, जीभ से निप्पल को घुमाया, चूसा, फिर हल्के से दांतों से खींचा। रिया की पीठ मुड़ गई, “आह्ह… हां… और जोर से चूसो… ओह्ह… कितना अच्छा लग रहा है…” मैं दूसरे चूचे को हाथ से मसलता रहा, निप्पल को उंगलियों से रगड़ता रहा। वह बार-बार मेरे बालों में उंगलियां फेर रही थी, मुझे और जोर से अपनी ओर खींच रही थी।
मैंने जल्दी से अपनी शर्ट उतारी, फिर पैंट भी खोलकर उतार दी। अब सिर्फ अंडरवियर में था। मेरा लंड पूरी तरह तनकर खड़ा था, अंडरवियर से बाहर झांक रहा था। मैं उसके ऊपर झुक गया। फिर धीरे से उसके पजामा की नाड़ी खोली, उसे नीचे सरकाया। पजामा उतरते ही मैंने उसकी पैंटी पर हाथ रखा। वह पहले से गीली हो चुकी थी। मैंने पैंटी को धीरे-धीरे नीचे खींचा, उसकी जांघों से गुजरते हुए उतार दिया। अब रिया पूरी तरह नंगी मेरे सामने थी। उसकी गुलाबी चूत साफ-सुथरी थी, बाल बिल्कुल नहीं थे। चूत की लकीर गीली चमक रही थी, होंठ थोड़े खुले हुए थे। मैं उसे देखकर और उत्तेजित हो गया।
मैं उसके पैरों के बीच बैठ गया। पहले अपनी उंगलियों से उसके होंठों को सहलाया, फिर धीरे से अलग किया। क्लिट बाहर निकली, छोटी और संवेदनशील। मैंने मुंह नीचे किया और जीभ से पहले बाहरी होंठों को चाटा। रिया की कमर ऊपर उठ गई। मैंने जीभ को अंदर डाला, चूत के अंदर घुमाया। उसका रस मेरे मुंह में भर रहा था, मीठा-नमकीन। फिर मैंने क्लिट पर जीभ घुमानी शुरू की, हल्के-हल्के चूसा। रिया चीख रही थी, “आह… इह्ह… अजय… बहुत अच्छा… ओह्ह… और अंदर… मत रुको…” मैंने एक उंगली धीरे से अंदर डाली, अंदर-बाहर करने लगा, साथ में क्लिट को चूसता रहा। उसकी चूत मेरी उंगली को जकड़ रही थी। मैंने दूसरी उंगली भी डाल दी, अब दोनों उंगलियां तेजी से अंदर-बाहर हो रही थीं। रिया की सांसें रुक-रुक कर आ रही थीं, “ह्ह्ह… आह… मैं… ओह…”
तभी उसने मेरे पैरों को अपनी ओर खींचा। मैं समझ गया। हम 69 पोजिशन में आ गए। उसने मेरी अंडरवियर को एक झटके में नीचे खींच दिया। मेरा लंड बाहर आया, सख्त और नसों से भरा हुआ। रिया ने उसे हाथ में पकड़ा, पहले सिरे को जीभ से चाटा, फिर धीरे-धीरे मुंह में लिया। वह जोर-जोर से चूसने लगी। “ग्ग्ग… गी… गों…” की आवाजें कमरे में गूंज रही थीं। उसकी जीभ मेरे लंड के सिरे पर नाच रही थी, कभी गहराई तक ले जाती, कभी बाहर निकालकर चाटती। मैं भी उसकी चूत को खा रहा था, जीभ अंदर डालकर चूस रहा था। हम दोनों एक-दूसरे को मजा दे रहे थे। रिया की सांसें तेज होती गईं, उसकी चूत सिकुड़ने लगी। वह मेरे लंड को मुंह से निकालकर कराह रही थी, “आह्ह्ह… ओह… अजय… मैं… आ रही हूं… ह्ह्ह…” उसका पूरा शरीर कांप उठा। गर्म रस मेरे मुंह पर फैल गया, मैंने उसे चाट-चाटकर साफ किया।
फिर मैंने रिया को धीरे से सीधा लिटाया। उसकी पीठ बिस्तर पर टिकी हुई थी, और मैंने एक तकिया उठाकर उसके कमर के नीचे रख दिया ताकि उसकी कमर थोड़ी ऊपर उठ जाए और चूत मेरे सामने और ज्यादा साफ-साफ नजर आए। उसकी गुलाबी चूत अब पूरी तरह खुली हुई थी, गीली और चमकती हुई, जैसे मेरे लंड का इंतजार कर रही हो। रिया की सांसें तेज चल रही थीं, उसकी आंखें बंद थीं और होंठ हल्के से कांप रहे थे।
उसने खुद अपना हाथ नीचे किया, मेरे खड़े लंड को अपनी नरम उंगलियों से पकड़ा। उसकी हथेली गर्म थी, और लंड पर उसकी उंगलियां फिसलती हुई महसूस हो रही थीं। उसने धीरे से लंड का सिरा अपनी चूत के द्वार पर रखा, जहां पहले से ही उसका रस बह रहा था। लंड का सिरा छूते ही उसकी चूत की गर्माहट मेरे सिरे पर लगी। रिया ने आंखें खोलीं, मेरी तरफ देखकर धीरे से, लगभग फुसफुसाते हुए बोली, “अजय.. धक्का लगाओ.. अंदर डाल दो.. मुझे अब और बर्दाश्त नहीं हो रहा..”
मैंने उसकी कमर को दोनों हाथों से पकड़ा, थोड़ा पीछे खिंचा और फिर जोर से एक धक्का मारा। मेरा पूरा लंड, जो पहले से ही पूरी तरह सख्त और गीला था, एक ही झटके में उसकी चूत के अंदर सरक गया। क्योंकि उसकी चूत पहले से बहुत गीली और ढीली हो चुकी थी, कोई रुकावट नहीं आई। लंड जड़ तक अंदर चला गया। रिया का मुंह खुल गया, उसकी आंखें चौड़ी हो गईं और एक लंबी सिसकारी निकली, “आआह्ह्ह.. ओह्ह.. अजय.. पूरा अंदर.. कितना मोटा है तेरा.. ह्ह्ह..”
मैं रुक गया एक पल, उसकी चूत की गर्मी और टाइटनेस महसूस करते हुए। उसकी दीवारें मेरे लंड को चारों तरफ से जकड़ रही थीं, जैसे चूस रही हों। फिर मैंने धीरे-धीरे पीछे खींचना शुरू किया, लगभग आधा लंड बाहर निकाला और फिर धीरे से अंदर डाला। रिया की कमर उठी, उसने मेरी कमर पर पैर लपेट लिए। “हां.. ऐसे ही.. धीरे-धीरे.. आह.. अच्छा लग रहा है..”
धीरे-धीरे मेरी रफ्तार बढ़ने लगी। अब मैं तेज-तेज ठोके मारने लगा। हर बार लंड पूरी तरह बाहर निकालता, सिरा चूत के मुंह पर लगाता और फिर जोर से अंदर घुसाता। चप-चप की आवाजें कमरे में गूंजने लगीं। रिया की चूत मेरे लंड को हर धक्के पर चूस रही थी, उसका रस मेरी जड़ों तक बह रहा था। उसके बड़े चूचे ऊपर-नीचे उछल रहे थे, मैंने एक हाथ से एक चूचा पकड़ा और जोर से दबाया, निप्पल को उंगलियों से मसलते हुए। रिया चिल्ला उठी, “अजय.. जोर से चोदो.. मेरी चूत फाड़ दो.. आह.. ओह्ह.. हां.. और तेज.. इह्ह.. तेरे लंड ने तो मुझे पागल कर दिया..”
मैं उत्तेजित होकर बोला, “रिया.. तेरी चूत बहुत गर्म है.. इतनी टाइट और गीली.. ले ले पूरा लंड.. ओह.. कितना मजा आ रहा है.. तेरी चूत मेरे लंड को निचोड़ रही है..” मैंने अपनी रफ्तार और बढ़ा दी। कभी गहरे और धीमे ठोके, जहां लंड जड़ तक जाता और रुककर घुमाता, तो कभी तेज और छोटे ठोके, जिससे चूत की दीवारें हिलतीं। हम दोनों पसीने से तर थे, हमारे शरीर आपस में चिपक रहे थे, छाती से छाती, पेट से पेट। उसकी सांसें मेरे कान में गर्म लग रही थीं।
रिया की सिसकारियां अब और तेज हो गईं। उसकी उंगलियां मेरी पीठ पर नाखून गड़ा रही थीं। “आह्ह.. अजय.. मैं.. मैं फिर आने वाली हूं.. ओह्ह.. तेज कर.. हां.. ऐसे ही..” उसकी चूत अचानक सिकुड़ने लगी, दीवारें मेरे लंड को और जोर से जकड़ लिया। वह कांप उठी, कमर ऊपर उठी और एक लंबी चीख के साथ झड़ गई, “आह्ह्ह्ह.. ओह्ह.. फिर आ गई.. अजय.. मेरी चूत.. ओह्ह.. ह्ह्ह..” उसका गर्म रस मेरे लंड पर बहा, और चूत की मसलन से मुझे भी झटका लगा।
मैं रुक नहीं सका। उसकी झड़ाई के बाद मैंने और जोर से चोदना शुरू किया। हर ठोके में लंड पूरी ताकत से अंदर-बाहर। रिया अब लगातार कराह रही थी, “हां.. चोदो.. और चोदो.. मेरी चूत तेरी है.. ले ले.. ओह्ह..” मैंने उसके दोनों पैर कंधों पर रख लिए, अब कोण और गहरा हो गया। लंड हर बार सबसे गहराई तक जा रहा था। उसकी चूत अब पूरी तरह मेरे लंड की आदी हो चुकी थी।
आखिरकार मेरी सांसें भी तेज हो गईं। कमर में कंपकंपी होने लगी। “रिया.. मैं.. मैं भी आने वाला हूं.. ओह.. तेरी चूत में ही..” रिया ने मेरी कमर को पैरों से और कस लिया, “हां.. अंदर ही डाल दे.. मेरी चूत में भर दे.. आह..” मैंने आखिरी कुछ जोरदार ठोके मारे और फिर पूरी ताकत से अंदर धकेला। मेरा लंड फड़फड़ाया और गर्म-गर्म वीर्य उसकी चूत की गहराई में छोड़ने लगा। एक के बाद एक धारा, मैं कांपता हुआ उसके ऊपर गिर पड़ा। हम दोनों थककर, पसीने से भीगे, एक दूसरे से लिपटे पड़े रहे। उसकी चूत अभी भी मेरे लंड को हल्के-हल्के निचोड़ रही थी, जैसे आखिरी बूंदें भी निकाल लेना चाहती हो।
कुछ देर बाद, जब हम दोनों की सांसें धीरे-धीरे सामान्य होने लगीं, हम एक-दूसरे से लिपटे पड़े थे। मेरा लंड अभी भी उसके अंदर हल्का-हल्का धड़क रहा था, और रिया की चूत मेरे वीर्य से गर्म और भरी हुई महसूस हो रही थी। कमरे में सिर्फ हमारी भारी सांसों की आवाज और बाहर से आती हल्की हवा की सरसराहट थी। मैंने धीरे से उसके माथे पर एक चुंबन दिया, और वह मेरी छाती पर सिर रखकर लेटी रही।
तभी रिया ने अपना चेहरा ऊपर उठाया, मेरी आंखों में देखा और मेरे कान के पास मुंह ले जाकर बहुत धीमी, फुसफुसाती आवाज में कहा, “अजय… सुनो… अनुज ने… उसने मुझे कई बार चोदा है… इतनी जोर-जोर से कि मेरी चूत का भर्ता बना दिया है… अब तो वो ढीली-ढीली सी हो गई है… लेकिन आज तुम्हारे साथ… इतना अच्छा लगा… जैसे पहली बार हो।”
उसकी बात सुनकर मेरे अंदर एक अजीब सी उत्तेजना और जलन का मिश्रण हुआ। मैंने उसे और कसकर अपनी बाहों में भींच लिया, मेरी उंगलियां उसके नंगे पीठ पर सरकने लगीं। मैंने भी उसके कान में फुसफुसाकर पूछा, “सच में? वो कितनी बार करता था तुझे? बताओ ना… मुझे सब सुनना है।”
रिया ने हल्के से मुस्कुराकर मेरी छाती पर सिर रगड़ा और बोली, “हां… वो बहुत रफ था… हर बार मुझे बिस्तर पर पटक देता, मेरी टांगें फैलाकर एकदम जोर से घुसा देता… कभी-कभी तो दर्द भी होता था… लेकिन वो रुकता नहीं था… घंटों चोदता रहता… मेरी चूत लाल हो जाती, सूज जाती… फिर भी वो कहता, ‘तेरी चूत तो मेरे लिए ही बनी है’… और फिर जोर-जोर से पेलता… आखिर में अंदर ही झड़ जाता… कई बार तो मैं थककर बेहोश हो जाती थी…”
उसकी बातें सुनते-सुनते मेरा लंड फिर से उसके अंदर सख्त होने लगा। मैंने धीरे से कमर हिलाई, तो रिया की सांस रुक गई। वह मेरी ओर देखकर बोली, “अरे… फिर से? अभी तो…”
मैंने उसके होंठों पर उंगली रख दी और कहा, “हां… सुनकर और भी मन कर रहा है… तेरी वो भर्ता वाली चूत को मैं फिर से भर दूं… लेकिन इस बार प्यार से… धीरे-धीरे… ताकि तुझे सिर्फ मजा आए।”
रिया ने शरमाकर मुंह छिपा लिया, लेकिन उसकी आंखों में चमक थी। उसने मेरी कमर पर टांग चढ़ाई और धीरे से बोली, “तो करो ना… लेकिन इस बार मुझे ऊपर आने दो… मैं तुम्हें दिखाऊं कि मेरी चूत अभी भी कितनी गर्म है।”
मैंने हंसकर उसे अपनी गोद में उठाया और पीठ के बल लेट गया। रिया मेरे ऊपर चढ़ गई, उसके बड़े-बड़े गोरे चूचे मेरे चेहरे के सामने लटक रहे थे। उसने अपना हाथ नीचे ले जाकर मेरे लंड को फिर से पकड़ा, जो अब पूरी तरह खड़ा और गीला था। उसने धीरे से अपनी चूत की लकीर पर रगड़ा, जहां मेरा वीर्य और उसका रस मिलकर चिकना हो गया था।
“आह… अजय… देख… तेरे वीर्य से कितनी गीली हो गई हूं…” वह फुसफुसाई और धीरे-धीरे नीचे बैठने लगी। मेरे लंड का सिरा उसकी चूत के मुंह में घुसा, फिर धीरे-धीरे पूरा अंदर चला गया। रिया की आंखें बंद हो गईं, मुंह से एक लंबी सिसकारी निकली, “ओह्ह… कितना गहरा… ह्ह्ह… पूरा भर गया…”
वह धीरे-धीरे ऊपर-नीचे होने लगी। उसके चूचे मेरे सामने उछल रहे थे। मैंने दोनों हाथों से उन्हें पकड़कर मसलना शुरू किया, निप्पल्स को उंगलियों से दबाया। रिया की रफ्तार बढ़ती गई, अब वह जोर-जोर से कूद रही थी। कमरे में थप-थप की आवाज गूंजने लगी, उसकी चूत मेरे लंड को चूस रही थी।
“आह… अजय… चोदो मुझे… जोर से… मेरी चूत को फिर से भर्ता बना दो… लेकिन इस बार तुम्हारा… ओह्ह… हां… और तेज…” वह चीखते हुए बोली।
मैंने नीचे से कमर उठाकर जोरदार ठोके मारने शुरू किए। उसकी चूत अब और गीली हो गई थी, हर ठोके पर चिकचिक की आवाज आ रही थी। रिया मेरे ऊपर झुक गई, उसके होंठ मेरे होंठों पर आ गए, हम दोनों एक-दूसरे को चूमते हुए चुदाई करते रहे। उसकी सिसकारियां तेज होती गईं, “आह्ह… इह्ह… ओह्ह… मैं फिर आ रही हूं… अजय… रुकना मत… ह्ह्ह… आ गई…”
उसकी चूत सिकुड़ने लगी, मेरे लंड को जकड़ लिया। मैं भी काबू नहीं रख पाया और उसके अंदर ही फिर से झड़ गया, गर्म-गर्म वीर्य उसकी चूत में भरते चले गए। रिया कांपती हुई मेरे ऊपर गिर पड़ी, दोनों की सांसें तेज, पसीना बह रहा था।
बाकी की बची हुई एक रात भी हमने खूब चुदाई करके मजे लिए। हमने फिर से एक दूसरे को चोदा, पूरी रात मजे किए।
आपको मेरी कहानी कैसी लगी, हमें कमेंट में बताइए। धन्यवाद।
टेलीग्राम चैनल जॉइन करें - रोज़ाना नई कहानी अपडेट के लिए
Related Posts