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पति ने ड्राइवर को भेजा अपनी बीवी चोदने

Driver sex story, Pahli cuckold chudai sex story: दोस्तों, अपनी सेक्स कहानी शुरू करने से पहले मैं अपने बारे में थोड़ा बता देती हूं। मेरा नाम अनीता है, भोपाल की रहने वाली हूं। उम्र 26 साल, फिगर 32-30-34 का, जो हमेशा पुरुषों की नजरें खींच लेता है। मुझे पाश्चात्य शैली के कपड़े पहनना बहुत पसंद है, लेकिन इस बात पर मेरे पति से हमेशा झगड़ा होता रहता है।

मेरे पति का नाम रमेश है, उम्र 31 साल। उनका ट्रैवल एजेंसी का बिजनेस है, जिसकी वजह से वे अक्सर घर से बाहर रहते हैं। हमारी शादी को तीन साल हो चुके हैं। शुरुआत में तो सब कुछ परफेक्ट था, लेकिन जैसे-जैसे उनका काम बढ़ा, हमारी सेक्स लाइफ पर असर पड़ा। वे मुझे बहुत प्यार करते हैं, मेरी हर फरमाइश पूरी करते हैं, लेकिन मेरी चूत की आग बुझाने में नाकाम रहते हैं। उनका लंड छोटा है, जिसकी वजह से वे फोरप्ले पर ज्यादा ध्यान देते हैं। फिर भी, मुझे इससे कोई शिकायत नहीं थी।

शादी के शुरुआती दिनों में हम दिन-रात चुदाई में लगे रहते थे। घर में सिर्फ हम दोनों ही थे, तो मौका मिलते ही कहीं भी शुरू हो जाते। कभी किचन में, कभी बाथरूम में, तो कभी सोफे पर ही चुदाई का खेल खेल लेते। उन दिनों हमने सेक्स के फुल मजे लिए। रमेश को पोर्न फिल्में देखना बहुत पसंद है, वे अक्सर उन फिल्मों की हरकतें ट्राई करते। उन्हें मेरी चूत चाटना बहुत अच्छा लगता, वे घंटों चाटते रहते। उनका छोटा लंड ज्यादा देर न टिक पाता, लेकिन चुदाई के बाद वे जीभ से मेरी चूत चूसकर मुझे संतुष्ट कर देते। धीरे-धीरे मुझे भी चूत चटवाने में मजा आने लगा, क्योंकि लंड से तो पूरी तृप्ति नहीं मिलती थी।

ठंड के मौसम की बात है। शाम का समय था, मैं घर पर अकेली टीवी देख रही थी। तभी रमेश का फोन आया। उन्होंने कहा, “मैं जल्दी घर आ रहा हूं, तुम बिस्तर पर रेडी मिलना।” मतलब साफ था—सेक्स के लिए तैयार हो जाओ। मैंने मुस्कुरा दिया, क्योंकि वे पहले ही बता चुके थे कि मेरे लिए कई लिंगरी सेट्स ऑर्डर किए हैं। सेक्स के समय वे हमेशा कोई न कोई खास सेट पहनने को कहते।

उस दिन उन्होंने सिर्फ बिकनी पहनने को कहा। मैंने गोल्डन कलर की बिकनी निकाली, जो इतनी छोटी और टाइट थी कि नीचे की तरफ सिर्फ चूत की दरार मुश्किल से ढक पा रही थी—पैंटी का कपड़ा इतना पतला और संकरा था कि दोनों होंठ बाहर झांक रहे थे। ऊपर वाली ब्रा भी बस निप्पल्स को छिपा पा रही थी, बाकी चूचियां लगभग नंगी-सी लग रही थीं। मैंने आईने के सामने खड़े होकर खुद को देखा—गोल्डन थ्रेड्स चमक रहे थे, स्किन पर ठंड की वजह से हल्की सी कंपकंपी थी। फिर मैंने गहरी रेड लिपस्टिक लगाई, होंठ चमकदार और गीले दिखने लगे। आखिर में हाई हील सैंडल पहने—काले रंग की, 5 इंच की एड़ी वाली। जैसे ही मैंने उन्हें पहना, मेरी कमर सीधी हुई, गांड ऊपर की तरफ उठ गई, चूतड़ बाहर की ओर फैल गए, और बिकनी का पतला कपड़ा और भी टाइट हो गया।

दस मिनट बाद घंटी बजी। मैंने की-होल से झांका—रमेश ही थे। “आ जाओ, दरवाजा खुला है,” मैंने थोड़ी सेक्सी आवाज में कहा। वे अंदर आए। मुझे इस अवतार में देखते ही उनके होश उड़ गए। आंखें फटी की फटी रह गईं। दरवाजा बंद किया, जूते उतारे बिना ही झपटकर मुझे अपनी बाहों में भर लिया। उनके हाथ मेरी कमर पर, फिर गांड पर—जोर से दबाया। “आज तो तू पूरी पोर्नस्टार लग रही है,” वे फुसफुसाए, “मुझे नहीं लगता कि आज मैं तेरी प्यास बुझा पाऊंगा!”

मैंने उनकी गर्दन में हाथ डालकर कहा, “तुम ही तो मेरी प्यास बुझाते हो, डियर हजबैंड!”

वे मुझे कमरे में ले गए। बेडरूम में टीवी ऑन किया और ब्लू फिल्म लगा दी। स्क्रीन पर एक कपल था जो किसी तीसरे मर्द को बुलाता है। वो गैर-मर्द लड़की को जोर-जोर से चोद रहा था, पति कैमरा चला रहा था। हम दोनों बिस्तर पर बैठ गए, फिल्म देखते हुए। रमेश का हाथ मेरी जांघ पर था, धीरे-धीरे ऊपर की तरफ बढ़ रहा था।

फिर उन्होंने मुझे पीठ के बल लिटाया। मेरी टांगें फैलाईं। पहले पैरों को चूमने लगे—एड़ियां, पिंडलियां, फिर जांघों के अंदरूनी हिस्से। उनकी गर्म सांस मेरी चूत पर पड़ रही थी। बिकनी का पतला कपड़ा गीला हो चुका था। उन्होंने उंगली से कपड़े को एक तरफ सरका दिया—मेरी चूत पूरी खुल गई। गुलाबी, भीगी हुई, क्लिटोरिस फूली हुई।

वे जीभ निकालकर पहले क्लिट पर हल्का सा छुआ। मैं सिहर गई। फिर जीभ को चक्र में घुमाने लगे—धीरे-धीरे, गोल-गोल। मैंने सिसकारी भरी, “आह्ह… रमेश… और…” उन्होंने होंठों से क्लिट को पकड़ा, हल्का सा चूसा। मेरी कमर उठ गई। फिर जीभ को नीचे ले गए—चूत के मुंह पर फेरा, फिर अंदर डालने की कोशिश की। जीभ अंदर-बाहर होने लगी, मेरे रस को चूसते हुए। मैं दोनों हाथों से उनकी सिर पकड़कर दबा रही थी— “और अंदर… जीभ डालो… आऊ… हां ऐसे ही…”

मेरा बदन कांप रहा था। निप्पल्स सख्त, चूचियां भारी हो गई थीं। उन्होंने बिकनी का ऊपरी हिस्सा ऊपर सरका दिया, एक चूची मुंह में ले ली—जोर से चूसी, दांतों से हल्का काटा। मैं चीखी, “आह्ह… रमेश…”

फिर उन्होंने अपना लंड निकाला। पहले से ही खड़ा था, लेकिन छोटा होने की वजह से ज्यादा मोटा नहीं। उन्होंने मेरी टांगें कंधों पर रखीं, लंड को चूत के मुंह पर रगड़ा। फिर एक झटके में अंदर डाल दिया। मैंने कराहा, “आह्ह… हां…” वे धीरे-धीरे अंदर-बाहर करने लगे। हर थ्रस्ट के साथ उनकी सांसें तेज होती गईं। फिल्म में भी चुदाई जोरों पर थी।

कुछ ही मिनटों में वे झड़ गए। गरम माल मेरी चूत में भर गया। लेकिन वे रुके नहीं—नीचे झुककर फिर चूत चाटने लगे। अपनी ही माल और मेरे रस को मिलाकर चूस रहे थे। जीभ क्लिट पर तेजी से फेर रहे थे। मैंने अपनी टांगें उनके सिर के चारों ओर जकड़ लीं। कुछ ही देर में मैं भी झड़ गई—जोर से कराहते हुए, “आऊऊ… रमेश… हां…!” पूरा बदन कांप गया, चूत से रस बहकर बिस्तर पर गिरा।

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वे ऊपर आए, मुझे चूमने लगे। फिल्म अभी भी चल रही थी। तभी उन्होंने कहा, “क्यों ना हम भी कुछ ऐसा ट्राई करें?” मैंने झट से मना कर दिया।

फिर भी रमेश ने मुझे फिर से चोदा, फिर चूत चाटी। लेकिन वो बात उनके दिमाग में अटक गई। अब हर सेक्स के बाद वे यही कहने लगे, और मैं मना करती रही। लेकिन अंदर ही अंदर मुझे भी मन करने लगा कि किसी मजबूत, मोटे लंड से चुदवाऊं। जब रमेश घर पर न होते, तो मैं बिस्तर पर लेटकर उंगली डाल लेती—पहले एक, फिर दो। कल्पना करती किसी अनजान मर्द की— “आह्ह… और गहरा… हां… ऐसे ही… जोर से…”

जनवरी की रात थी। हम फिर चुदाई कर रहे थे। रमेश मेरे ऊपर थे, लंड अंदर-बाहर कर रहे थे। तभी उनका फोन बजा। बैंगलोर से ऑफिस का कॉल था—तीन दिन का इमरजेंसी काम। वे जल्दबाजी में झड़े—माल चूत में डालकर उठ गए। इस बार चाटकर संतुष्ट भी नहीं किया। जल्दी-जल्दी तैयार होकर चले गए।

मैं अकेली रह गई। चूत में उनका माल था, लेकिन संतुष्टि नहीं। मैंने उंगली डाली—धीरे-धीरे रगड़ने लगी। क्लिट पर अंगूठे से दबाया, अंदर दो उंगलियां डालीं। “आह्ह… रमेश… काश तू यहां होता…” तेजी से हिलाई, फिर जोर से झड़ गई। बदन थककर बिस्तर पर गिर पड़ी।

तीन दिनों में वीडियो कॉल पर सेक्स किया। वे लंड हिलाते, मैं उंगली डालती। लेकिन असली चुदाई की कमी खल रही थी। रमेश के आने का दिन था, लेकिन उन्हें तीन दिन और रुकना पड़ा। गुस्से में फोन काट दिया, फोन बंद करके सो गई।

सुबह की ठंडी हवा कमरे में घुस रही थी। मैं बिस्तर पर लेटी हुई थी, रजाई के नीचे गर्माहट महसूस कर रही थी। नींद अभी पूरी नहीं हुई थी, लेकिन चूत में हल्की सी खुजली हो रही थी। हाथ खुद-ब-खुद नीचे चला गया। उंगलियां धीरे से चूत के होंठों पर फिसलने लगीं। क्लिटोरिस पर हल्का सा दबाव डाला तो सिहरन सी हुई। एक उंगली अंदर डाल ली, गीला रस महसूस हुआ। धीरे-धीरे अंदर-बाहर करने लगी। सांसें तेज हो गईं, लेकिन ज्यादा देर नहीं की। उठकर काम में लग गई।

दोपहर को रमेश को फोन किया। आवाज में थोड़ी हिचकिचाहट थी, लेकिन फैसला पक्का था। “जो तुम बोलते थे, वो करने को तैयार हूं।” वे एकदम हैरान हो गए। “सच में? मुझे थोड़ा समय दो, प्लान बनाना पड़ेगा।” आधा घंटा बाद फिर फोन आया। उनकी आवाज में उत्साह था। “एक शर्त पर – सब कुछ वीडियो में रिकॉर्ड करना। शुरू से अंत तक, सब दिखाना होगा।” मेरे सीने में आग लग गई। दिल जोर-जोर से धड़क रहा था। मैंने बिना सोचे हां कर दी। उन्होंने प्लान बताया – शाम को साड़ी पहनकर तैयार रहना। ड्राइवर अमन कागज लेने आएगा। उसे रोकना है और सब रिकॉर्ड करना है।

मैंने नहाने का फैसला किया। गरम पानी से नहाई, बॉडी पर साबुन की झाग फैलाया। चूत की सफाई बहुत अच्छे से की – शेवर से बाल साफ किए ताकि चिकनी, गुलाबी और मुलायम लगे। नहाने के बाद बॉडी लोशन लगाया, हर जगह मसाज की तरह फैलाया। फिर वो खुशबू वाली परफ्यूम छिड़की जिसकी महक रमेश को पागल कर देती है। पूरी नंगी खड़ी होकर आईने में खुद को देखा – चूचियां भरी हुई, कमर पतली, गांड गोल और ऊपर उठी हुई। मोबाइल कैमरा ट्राइपॉड पर सेट किया। रिकॉर्डिंग शुरू की। लाल बटन दबाते ही दिल की धड़कन और तेज हो गई।

सबसे पहले रेड लेस ब्रा पहनी। पतली स्ट्रैप्स कंधों पर चिपकीं, कपड़े इतने पतले कि निप्पल्स की आउटलाइन साफ दिख रही थी। फिर मैचिंग रेड थोंग पैंटी – आगे सिर्फ छोटा सा त्रिकोण, पीछे सिर्फ एक पतला धागा जो गांड की दरार में गायब हो रहा था। पैरों में रेड नेट स्टॉकिंग्स चढ़ाईं। स्टॉकिंग्स जांघों के ऊपर तक आईं और गार्टर से बंध गईं। कैमरे के सामने घूमकर दिखाया, कमर मटकाई। “देखो रमेश, तुम्हारी बीवी आज कितनी तैयार है। तेरे लिए नहीं, किसी और के लिए।”

फिर हॉट रेड सिल्क साड़ी पहनी। कपड़ा बॉडी पर चिपक रहा था, हर कर्व साफ उभर रहा था। ब्लैक बैकलैस ब्लाउज पहना – पीठ पूरी नंगी, सिर्फ दो पतली पट्टियां। आगे गहरा गला, चूचियां आधी-आधी बाहर झांक रही थीं। साड़ी का पल्लू कंधे पर डाला, लेकिन जानबूझकर थोड़ा ढीला रखा ताकि सरके तो मजा आए। मेकअप किया – स्मोकी आंखें, काजल से आंखें और गहरी, गहरी रेड लिपस्टिक से होंठ चमकदार और गीले। आखिर में पांच इंच की रेड हाई हील सैंडल पहनीं। एड़ी ऊंची होने से गांड और ऊपर उठ गई, चाल में लहर आ गई। आईने में देखा – हाई क्लास, सेक्सी, पूरी तरह तैयार औरत।

फोटो खींचकर रमेश को भेजी। तुरंत रिप्लाई आया – “फाड़ डालूंगा तुझे आज रात!” मैं हंस पड़ी, लेकिन अंदर से कंपकंपी सी हो रही थी। कैमरा अभी भी रिकॉर्ड कर रहा था। अब इंतजार था।

सात बजे घंटी बजी। दिल धक-धक करने लगा। रिकॉर्डिंग चेक की – सब ऑन था। दरवाजा खोला। सामने अमन खड़ा था – छह फुट लंबा, गोरा, जवान, मसल्स भरा हुआ। नीली शर्ट में छाती चौड़ी लग रही थी, काली पैंट में जांघें मोटी। मन में एकदम लड्डू फूट गए। “नाम क्या है?” मैंने पूछा, आवाज में थोड़ी मिठास डालकर। “अमन,” उसने कहा, थोड़ा शरमाते हुए। “अंदर आओ ना।”

अंदर आया। “सर ने कागज देने को कहा होगा!” मैंने मुस्कुराकर कहा, “रुको जरा, पानी लाती हूं।” किचन से ठंडा पानी लाई। गिलास देते हुए जानबूझकर झुकी – ब्लाउज का गला और खुल गया, चूचियां आधी से ज्यादा बाहर। अमन की नजरें वहीं अटक गईं। कागज दिया। वो पढ़ने लगा, लेकिन बार-बार नजर ऊपर उठ रही थी, मेरी चूतड़ की तरफ, चूचियों की घाटी में।

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टीवी ऑन करने के बहाने पल्लू सरकने दिया। पल्लू धीरे से गिरा, ब्लाउज में चूचियां साफ नजर आईं। अमन देखता रह गया, मुंह खुला रह गया। मैंने धीरे से पल्लू ठीक किया, लेकिन उसके बगल सोफे पर बैठ गई। पल्लू फिर थोड़ा नीचे खींचा – अब दोनों चूचियां आधी-आधी बाहर, निप्पल्स ब्रा के किनारे से झांक रहे थे। वो घबराया, लेकिन आंखें हटा नहीं पा रहा था।

वो उठने लगा तो मैंने कहा, “अरे रुको ना, खाना खाकर जाओ। भूखे कैसे जाओगे?” वो रुक गया। सोफे पर बैठे। “मैडम, बाहर जा रही हो क्या?” मैंने कहा, “नहीं, क्यों?” “इतनी तैयार हो, सर भी घर पर नहीं हैं।” मैंने मुस्कुराकर पूछा, “अच्छी नहीं लग रही क्या?” वो बोला, “बहुत खूबसूरत लग रही हो मैडम, कोई भी देखे तो फिसल जाए!” मैंने आंख मारकर कहा, “तुम तो नहीं फिसले?”

वो हंस पड़ा। गर्लफ्रेंड के बारे में पूछा तो शरमा गया। मैंने खाना लगाया। झुककर परोसते हुए चूचियां फिर से दिखीं, ब्रा का किनारा नीचे सरका। “क्या देख रहे हो अमन?” मैंने पूछा। वो सीधे बोला, “जो आम देख रहा हूं, उन्हें चूसने का मन हो रहा है!” मैंने होंठ चाटते हुए कहा, “तो चूस लो ना, मना किसने किया है!”

वो झपटकर पास आ गया। पहले होंठों पर किस किया – धीरे-धीरे, होंठों को चूसते हुए। फिर जीभ अंदर डाली, मेरी जीभ से खेलने लगा। हाथ चूचियों पर – ब्लाउज के ऊपर से मसलने लगा, निप्पल्स को उंगलियों से दबाया। मैं सिसकारियां लेने लगी – “आह्ह… अमन… जोर से दबाओ… आऊ…” वो पागलों की तरह – गर्दन चूमी, कान में जीभ फेरी, काटा। फिर नीचे आकर ब्लाउज के गले से चूचियां चाटने लगा। ब्रा ऊपर सरकाई, निप्पल मुंह में लिया, जोर से चूसा। मैं चीखी – “आह्ह… हां… और जोर से…”

कपड़े उतारने लगा। मैंने साड़ी का पल्लू खींचकर अलग किया। साड़ी धीरे-धीरे खोली, जमीन पर गिराई। अब पेटीकोट और ब्लाउज में थी। उसे सोफे पर बिठाया। उसकी शर्ट के बटन एक-एक करके खोले – छाती चौड़ी, हल्के बाल, निप्पल्स सख्त। पैंट उतारी – बॉक्सर में लंड खड़ा था, बड़ा सा उभार। बॉक्सर नीचे किया – आठ इंच लंबा, मोटा, काला, नसें फूली हुईं, सुपाड़ा चमक रहा था, पहले से ही प्रीकम निकल रहा था। मैंने आंखें फाड़कर देखा – रमेश से डबल मोटा, इतना मोटा कि हाथ में भी पूरा नहीं आ रहा था।

मैंने ब्लाउज खोला। ब्रा में चूचियां हिलाईं। वो पकड़ने को हुआ, मैं पीछे हटी। खड़ी होकर पेटीकोट नीचे किया। अब सिर्फ रेड थोंग, स्टॉकिंग्स और ब्रा में। अमन बोला, “आज तक ऐसे कपड़े सिर्फ वीडियो में देखे, रियल में सोचा भी नहीं था।”

फिर मुझे खींचकर किस किया। धीमे-धीमे बदन चूमने लगा – कंधे, पेट, नाभि में जीभ डाली। जांघों के अंदरूनी हिस्से चाटे, स्टॉकिंग्स के ऊपर से दांत गड़ाए। मैंने उसका सिर पकड़कर चूत पर लगाया। “चूसो अमन, अच्छी तरह चूस लो। मेरी चूत में जितना रस भरा है, सब पी जाओ हनी।”

वो घुटनों पर बैठ गया। थोंग एक तरफ सरकाई। चूत पूरी खुल गई – गीली, फूली हुई क्लिट, होंठ चमक रहे थे। जीभ से क्लिट पर गोल-गोल घुमाया। मैं सिहर गई – “आह्ह… हां… ऐसे ही…” फिर होंठों से क्लिट चूसा, हल्का काटा। जीभ अंदर डाली, चूत के अंदर-बाहर। रस चूस रहा था, आवाज आ रही थी – चट-चट। मैं चीखी – “और अंदर… जीभ डालो… आऊ…” वो तेजी से कर रहा था, उंगलियां भी डाल दीं – दो उंगलियां अंदर, बाहर। मैं कमर उठा रही थी।

फिर बोला, “रंडी साली, तेरी चूत में इतना पानी है कि चार लोग आ जाएं तो भी बहेगी!” गाली सुनकर और गर्म हो गई। “अब जल्दी लंड चूत में डाल दो!”

वो बोला, “और मेरा लंड कौन चूसेगा!” मैं घुटनों पर बैठ गई। लंड मुंह में लिया – मोटा था, मुश्किल से अंदर जा रहा। सुपाड़ा जीभ पर रगड़ा, धीरे-धीरे गले तक लेने की कोशिश। वो सिर पकड़कर धक्के मारने लगा – “आह… अनीता… चूस रंडी… गहरा ले…” मैं ग्ग्ग… गी… गों… कर रही थी। लार बह रही थी, मुंह से निकलकर लंड पर गिर रही थी।

पांच मिनट बाद थोंग निकाली। लंड चूत के मुंह पर रखा। धीरे से रगड़ा, सुपाड़ा क्लिट पर दबाया। फिर एक जोरदार धक्का – पूरा अंदर। “आह्ह… अमन… फाड़ दिया… दर्द हो रहा है… उईई…” वो रुका, चूमने लगा, होंठ चूसे, चूचियां दबाई। दर्द कम होने पर मैंने कमर हिलाई – हरी झंडी। वो आगे-पीछे करने लगा। पट-पट… हर धक्के पर चूत भरी हुई लग रही, लंड की नसें महसूस हो रही थीं। “आह्ह… अमन… और जोर से… हां… चोदो… आऊ… ऊई…”

वो बोला, “रंडी, लगता है बहुत प्यासी है, तभी इतना तैयार होकर बैठी थी।” उसकी आवाज में हंसी और गर्मी दोनों थी। मैंने उसकी आंखों में देखते हुए कहा, “रमेश का लंड बहुत छोटा है, उससे प्यास नहीं बुझती। वो दो-चार धक्के मारता है और झड़ जाता है। कभी पूरी तरह संतुष्ट नहीं करता। चोदो मुझे… आह… और जोर-जोर से चोदो! तुम्हारा लंड तो अलग ही लेवल का है, इतना मोटा, इतना लंबा… रमेश तो बस नाम का ही है, असल में कुछ नहीं दे पाता।”

कुछ देर बाद उसने मुझे पलटकर घोड़ी बनाया। मैं घुटनों और हाथों के बल झुकी हुई थी, स्टॉकिंग्स वाली टांगें फैली हुईं, ब्रा अभी भी चूचियों को ढके हुए थी। अमन ने पीछे से मेरी कमर पकड़ी, एक हाथ से गांड को थपथपाया, फिर लंड को चूत के मुंह पर रगड़ा। सुपाड़ा गीला था, मेरे रस से चमक रहा था। फिर उसने एक झटके में पूरा अंदर डाल दिया। “आह्ह…” मैं चीखी, लेकिन दर्द की जगह अब मजा था। वो पीछे से धक्के मारने लगा – पट-पट-पट… हर धक्के के साथ उसका पेट मेरी गांड से टकरा रहा था, आवाज कमरे में गूंज रही थी। चूत पूरी भरी हुई लग रही थी, लंड की मोटाई से दीवारें खिंच रही थीं। रस बह-बहकर स्टॉकिंग्स पर गिर रहा था, गीला और चिपचिपा। मैं सिसकारियां ले रही थी – “हां… अमन… और तेज… फाड़ दो मुझे… आऊ… रमेश कभी ऐसा नहीं कर पाता, वो तो बस हल्के-हल्के करता है और थक जाता है। तुम्हारा लंड तो मुझे अंदर तक पहुंचा रहा है, हर जगह छू रहा है… आह्ह… रमेश की वजह से कितने सालों से प्यासी हूं मैं!”

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वो और जोर से धक्के मारने लगा, हाथ से मेरी कमर पकड़कर खींच रहा था। मैंने दो बार झड़ दिया – पहली बार चूत सिकुड़ गई, पूरा बदन कांप उठा, “आह्ह… जा रही हूं… हां… ऊईई… रमेश कभी मुझे दो बार भी नहीं झड़वा पाता!” दूसरी बार और तेज आई, चूत से रस की धार निकली, स्टॉकिंग्स पूरी भीग गईं। वो बोला, “ब्रा न निकालूं, ऐसे ज्यादा सेक्सी लग रही हो।” ब्रा में चूचियां हिल रही थीं, निप्पल्स सख्त होकर ब्रा के कपड़े को चुभ रहे थे। मैंने कराहते हुए कहा, “हां… ब्रा मत निकालना… रमेश तो हमेशा जल्दी-जल्दी सब उतार देता है, मजा ही नहीं आता। तुम्हारे साथ तो हर पल अलग लग रहा है।”

फिर उसने तेल की बोतल उठाई। मेरी गांड पर तेल डाला, ठंडक महसूस हुई। उंगली से तेल फैलाया, फिर धीरे से एक उंगली अंदर डाली। मैं कुलबुलाई – “उफ्फ… अमन…” दर्द और मजा दोनों था। वो धीरे-धीरे अंदर-बाहर करने लगा, दूसरी उंगली भी डालने की कोशिश की। मैंने मना कर दिया, “इतना मोटा लंड गांड में नहीं लूंगी, दर्द होगा बहुत। रमेश ने कभी कोशिश भी नहीं की, वो तो बस चूत तक सीमित रहता है।” वो हंसकर मान गया, “ठीक है, अगली बार तैयार करना।” फिर वापस चूत में लंड डाला। इस बार धक्के और तेज थे। पट-पट-पट… कमरे में सिर्फ हमारी सांसें और चूत की गीली आवाजें थीं। मैं कराह रही थी – “आह्ह… अमन… रमेश की चुदाई तो बस नाम की होती है, पांच मिनट में खत्म। तुम तो मुझे घंटों तक रख सकते हो… हां… ऐसे ही चोदते रहो!”

वो झड़ने वाला था, उसकी सांसें तेज हो गईं। मुझे घुटनों पर बिठाया। लंड मुंह के सामने था – गीला, चमकदार, मेरे रस से सना हुआ। मैंने मुंह खोला, वो सिर पकड़कर धक्के मारने लगा – “आह… ले रंडी… पूरा गले तक…” लंड गले तक गया, मैं गग्ग… कर रही थी, लार बह रही थी। फिर उसने जोर से झटका मारा और माल मुंह में डाला – गरम, गाढ़ा, नमकीन स्वाद। मैंने सब निगल लिया, जीभ से साफ किया। फिर बोली, “रमेश का माल तो बस थोड़ा-सा निकलता है, तुम्हारा तो इतना ज्यादा… पूरा मुंह भर गया।”

हम दोनों थककर बाथरूम में गए। गरम पानी चालू किया। वो मेरे पीछे खड़ा हो गया, साबुन से मेरी चूत और चूचियां धोने लगा। हाथों से मसाज कर रहा था, निप्पल्स को उंगलियों से दबा रहा था। फिर गांड में उंगली डालकर फिर खेलने लगा। तेल और साबुन से फिसलन थी, उंगली आसानी से अंदर जा रही थी। मैं कुलबुलाई – “बस करो अमन, अब नहीं…” लेकिन वो हंस रहा था। मैंने फिर मना किया। हम साफ होकर बाहर आए। सोफे पर लेट गए। बदन अभी भी गर्म था, पसीना सूख रहा था। तभी रमेश का कॉल आया। मैंने फोन उठाया, आवाज में थकान थी। “सुबह बताऊंगी,” बस इतना कहा और फोन रख दिया। मन में सोच रही थी – रमेश को पता चलेगा तो क्या कहेगा, लेकिन अब मुझे फर्क नहीं पड़ता। उसकी कमी तो आज पूरी हो गई।

रात अमन रुका। हम सोफे पर ही लेटे थे। फिर से चुदाई शुरू हुई – इस बार धीमी, लंबी। वो ऊपर आया, लंड धीरे से अंदर डाला। हर धक्के को महसूस करते हुए – लंड की नसें, सुपाड़ा चूत की दीवारों से रगड़ खा रहा था। मैंने उसकी पीठ पर हाथ फेरा, नाखून गड़ाए। वो धीरे-धीरे अंदर-बाहर करता रहा, कभी गहरा धक्का, कभी बाहर निकालकर क्लिट पर रगड़ता। मैंने कई बार सिसकारियां लीं – “हां… ऐसे ही… धीरे… मजा आ रहा है… रमेश कभी इतना समय नहीं देता, वो तो बस जल्दबाजी में करता है। तुम्हारे साथ तो हर पल अलग है, हर धक्का अलग महसूस हो रहा है।” रात भर ऐसे ही चुदाई होती रही, बीच-बीच में रुककर किस करते, चूमते। सुबह होने पर हमने नंबर एक्सचेंज किए। वो तैयार होकर चला गया।

फिर मैंने रमेश को फोन किया। सारी बात विस्तार से बताई – कैसे अमन आया, कैसे सब हुआ, कैसे मैंने उसका लंड लिया, कैसे वो मुझे संतुष्ट कर गया जहां रमेश कभी नहीं कर पाया। “वापस आओ तो वीडियो देखना।” उन्होंने मेरी बात सुनकर खुश होकर कहा, “तूने कमाल कर दिया, अब जल्दी आ रहा हूं।” उनकी आवाज में उत्साह था, और मुझे लगा कि ये नई शुरुआत है। लेकिन अंदर ही अंदर सोच रही थी – अब रमेश को पता चलेगा कि उसकी बीवी को कितनी कमी थी, और वो कमी उसकी अपनी कमजोरी, उसके छोटे लंड और उसकी जल्दबाजी की वजह से थी। अब शायद वो भी कुछ सीखे, या फिर मैं आगे बढ़ जाऊं।

अब आगे की कहानी कभी लिखूंगी। अभी के लिए इतना ही।

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