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आज मेरे भैया बन गए मेरे सैयां

Brother sister fuck kamukta sex story, Train incest sex story, Deflowering sister sex story: मित्रों नमस्कार! मेरा नाम सुनील (बदला हुआ) है। मेरी उम्र 26 साल है। हाइट 5 फीट 11 इंच, गठा हुआ मजबूत बदन और आकर्षक चेहरा। मैं दिल्ली के मयूर विहार में परिवार के साथ रहता हूं। हमारे घर में चार लोग हैं – पापा 48 साल के, एमएनसी में जॉब करते हैं, मम्मी 45 की गृहिणी हैं। मैं एक मेडिकल कंपनी में काम करता हूं और अभी शादी नहीं की, पहले अच्छी सेटलमेंट चाहता हूं।

आज जो कहानी सुनाने जा रहा हूं वो मेरी छोटी बहन सुनिधि (बदला हुआ) के साथ हुई सच्ची घटना है। सुनिधि की उम्र 19 साल है, कॉलेज में पढ़ती है। हाइट 5 फीट 4 इंच, पतली कमर, सुराहीदार गर्दन, गोरा रंग, बड़ी-बड़ी काली आंखें, तीखे नैन-नक्शे और डार्क होंठ। वो बेहद सेक्सी और खूबसूरत लगती है।

बात उस समय की है जब हम दोनों उड़ीसा के भुवनेश्वर के पास मौसी के गांव से दिल्ली लौट रहे थे। मौसी की बेटी रूपा की मंगनी थी, उसी फंक्शन में गए थे। फंक्शन के दिन सुनिधि ने पार्लर में मेकअप करवाया और मौसी ने उसे लाल लहंगा-चोली तोहफे में दिया था। उसी लहंगे में वो मेरे साथ ट्रेन में सवार हुई।

गांव से स्टेशन के लिए निकले तो चौराहे पर ट्रैकर जीप का इंतजार कर रहे थे। धूप तेज थी, हवा में धूल उड़ रही थी। हम दोनों सड़क किनारे खड़े थे, बैग कंधे पर टंगे हुए। तभी दूर से एक कुतिया दौड़ती हुई आई, उसकी सांसें तेज चल रही थीं। वो हमारे सामने करीब 20 फीट की दूरी पर रुक गई, जीभ बाहर लटकी हुई, प्यास से हांफ रही थी। पीछे से एक कुत्ता तेजी से आया, उसकी आंखों में भूख साफ दिख रही थी।

कुत्ते ने पहले कुतिया की पूंछ सूंघी, फिर सीधे उसकी बुर की तरफ मुंह किया। कुतिया ने हल्का सा कराहा लेकिन भागी नहीं। कुत्ता उछला और दोनों आगे के पैर कुतिया की कमर पर जमा दिए। तुरंत उसने धक्का मारा। उसका लाल-गुलाबी लंड बाहर निकला हुआ था, कुतिया की बुर में तेजी से अंदर-बाहर होने लगा। धक्के इतने जोरदार थे कि कुतिया का पूरा बदन हिल रहा था। वो छोटी-छोटी सिसकारियां ले रही थी – हांफ… हांफ… जैसे आवाजें। कुत्ता लगातार 8-10 तेज धक्के मार रहा था, उसकी कमर आगे-पीछे हो रही थी, लंड पूरी तरह अंदर-बाहर हो रहा था।

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हम दोनों चुपचाप खड़े देख रहे थे। सुनिधि की आंखें नीचे टिकी थीं, चेहरा हल्का लाल हो गया था, होंठ काट रही थी। शर्म से नजरें झुकी हुई थीं मगर वो बार-बार चुपके से ऊपर देख रही थी। उसकी सांसें भी तेज हो गई थीं। मुझे लगा जैसे मेरे सीने में कुछ गरम-गरम हो रहा है। कुत्ते-कुतिया का वो जंगली सीन देखकर मेरी हवस जाग उठी। मेरा ध्यान सुनिधि की तरफ चला गया। उसका लाल लहंगा हवा में हल्का लहरा रहा था, कमर पतली, चोली में चूचियां उभरी हुईं, गर्दन गोरी और चिकनी। वो इतनी सेक्सी लग रही थी कि मेरी सांस रुक सी गई। मेरा लंड पैंट के अंदर तनकर खड़ा हो गया, दर्द करने लगा।

अचानक कुत्ता एक जोरदार धक्के के साथ पलट गया। अब दोनों पीठ से पीठ जुड़ गए थे, लंड कुतिया की बुर में फंसा हुआ था। कुत्ता अपनी तरफ खींच रहा था, कुतिया पीछे की तरफ। दोनों एक-दूसरे को कसकर पकड़े हुए थे, अलग होने का नाम नहीं ले रहे थे। कुछ देर बाद आसपास के लड़के दौड़ते हुए आए, उन्होंने कंकड़-पत्थर फेंके, चिल्लाए लेकिन वो दोनों अलग नहीं हुए। कुत्ता और कुतिया बस एक-दूसरे से चिपके रहे।

सुनिधि अब भी नीचे देख रही थी, उसके गाल लाल थे, आंखों में चमक थी। शर्म के साथ-साथ उत्सुकता साफ झलक रही थी। मैंने चुपके से उसकी तरफ देखा। उसकी सांसें तेज थीं, होंठ हल्के कांप रहे थे। मेरी हवस और बढ़ गई। सुनिधि अब मेरे लिए सिर्फ बहन नहीं लग रही थी, वो एक औरत लग रही थी – जिसे छूने, सहलाने, चूमने का मन कर रहा था। मेरा लंड इतना सख्त हो गया था कि पैंट में दबाव महसूस हो रहा था।

तभी ट्रैकर जीप आई। जगह बहुत कम थी। ड्राइवर ने कहा – “भाईसाहब, एक ही सीट बची है, लड़की गोद में बैठ जाएगी।” सुनिधि ने मेरी तरफ देखा, मैंने हामी भरी। वो मेरी गोद में बैठ गई। मैंने उसे कमर से पकड़ लिया ताकि गिरे नहीं। उसका बदन मेरे से पूरी तरह चिपक गया। लहंगे का कपड़ा पतला था, उसकी गांड मेरी जांघों पर दब रही थी। मेरी हवस और भड़क गई। मेरा खड़ा लंड सीधा उसकी गांड की दरार में चुभ रहा था। हर उछाल में वो और गहराई तक दबता जा रहा था। सुनिधि ने पीछे मुड़कर मुझे देखा। उसकी आंखों में शरारत थी। वो हल्के से मुस्कुरा दी, जैसे उसे पता था कि क्या हो रहा है। वो थोड़ा और पीछे सरकी, लंड और जोर से चुभा। मैंने उसे और कसकर पकड़ा। जीप की हर उछाल के साथ हम दोनों एक-दूसरे से और चिपकते जा रहे थे।

स्टेशन पहुंचे। राजधानी का टिकट कन्फर्म नहीं हुआ। मैंने टीटीई से बहुत मिन्नत की। आखिरकार 4000 रुपये में एसी फर्स्ट की टू-सीटर केबिन में ऊपरी बर्थ मिल गई। टीटीई ने कहा – “500 रुपये और दो, मुगलसराय के बाद नीचे वाली सीट भी खाली हो जाएगी।” मैंने 500 रुपये और दिए। वो खुश होकर चला गया।

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ट्रेन में चढ़े। ऊपर चढ़ते वक्त मैंने सुनिधि के बुर को दोनों हाथों से कसकर भींच लिया। कपड़े के ऊपर से भी उसकी गर्मी महसूस हुई। वो हल्के से सिहर गई, मुस्कुराई और ऊपर चढ़ गई। मैं भी उसके पीछे-पीछे ऊपर गया। नीचे बूढ़ी आंटी लेटी थीं। उन्होंने नींद की गोली खाई और कहा – “बेटा, केबिन बंद रखना, मैं सुबह ही उठूंगी।” हमने हामी भरी।

हम ऊपर लेट गए। सुनिधि करवट लेकर लेटी, मैं उसके पास। कम्बल ओढ़ लिया। उसका मुंह मेरी तरफ था, चूचियां मेरी छाती पर दब रही थीं। मैंने खुद को और करीब खींच लिया। उसकी सांसें मेरे गाल पर लग रही थीं।

सुनिधि बोली – “भैया लेटोगे नहीं?”

मैंने कहा – “कहां लेटूं? जगह कम है।”

उसने करवट ली और धीरे से कहा – “इधर आ जाओ मेरे पास।”

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मैं उसके बगल में लेट गया। हम दोनों पूरी तरह चिपक गए। उसने अपनी जांघ मेरी जांघ पर चढ़ा दी। हमारे गाल एक-दूसरे से सट गए। आंटी गहरी नींद में सो चुकी थीं, हल्की खर्राटे ले रही थीं।

धीरे-धीरे बात शुरू हुई।

मैंने कान में फुसफुसाया – “सुनिधि, जीप में कुत्ते-कुतिया देखकर मुस्कुरा क्यों रही थी?”

वो शरमाकर बोली – “हां भैया… वो कुत्ता कुतिया को बहुत जोर से मार रहा था।”

मैंने पूछा – “पता है वो क्या कर रहे थे?”

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वो बोली – “हां भैया… चुदाई। मैंने गांव में कई बार देखा है।”

मैंने और करीब आकर कहा – “जब जीप में मेरी गोद में बैठी थी तो मेरा पप्पू चुभ रहा था… मुस्कुराई क्यों?”

वो और शर्मा गई, नजरें नीचे कर लीं। मैंने धीरे से उसके गाल पर होंठ रख दिए। वो सिहर गई। फिर उसने भी मेरे गाल पर हल्का सा चूम लिया। मैंने अपना गाल उसके गाल से रगड़ना शुरू किया। उसकी नरम त्वचा, उसकी सांसों की गर्मी… मेरा लंड फिर से पूरी तरह तन गया। पैंट में दबाव बढ़ रहा था।

मैंने हाथ उसकी कमर पर रखा, उंगलियां धीरे-धीरे उसकी नाजुक, गरम त्वचा पर फिराने लगा। कम्बल के नीचे अंधेरा था, मगर उसकी सांसों की गर्मी और बदन की हल्की कंपकंपी मुझे सब कुछ महसूस हो रहा था। मेरी उंगलियां उसके पेट पर गोल-गोल घूमने लगीं, नाभि के आसपास रुककर हल्का दबाव डाला। वो गुदगुदी से सिहर उठी, शरीर सिकुड़कर मेरे से और ज्यादा चिपक गया। उसकी सांसें तेज और गर्म हो गईं, कान के पास से हल्की-हल्की आह निकल रही थी – उम्म्म… भैया… गुदगुदी हो रही है…

मैंने उसका लहंगा बहुत धीरे-धीरे कमर से ऊपर सरकाना शुरू किया। कपड़े की सरसराहट कम्बल के नीचे दबी हुई थी, जैसे कोई राज़ छुपा रहा हो। लहंगा अब उसकी कमर से ऊपर था, पेट और नाभि पूरी तरह खुले थे। मेरी उंगलियां अब उसकी पैंटी पर पहुंच गईं – पतली, हल्की गुलाबी पैंटी, जो पहले से ही गीली हो चुकी थी। मैंने पैंटी के बाहर से ही उसकी बुर को सहलाना शुरू किया, उंगली से दरार के बीच में हल्के-हल्के दबाव डालते हुए, ऊपर-नीचे सरकाते हुए। क्लिटोरिस पर पहुंचते ही वो थरथरा उठी – आह्ह… भैया… वहां… मत छुओ… बहुत संवेदनशील है…

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पैंटी पर गोल-गोल नम दाग फैल चुके थे, कपड़ा चिपचिपा हो गया था। मैंने उंगली से थोड़ा सा रस उठाया, चिपचिपा और गरम। बिना सोचे मैंने उसे जीभ पर रख लिया और चाट लिया – नमकीन-मीठा, थोड़ा सा कसैला स्वाद, जो मेरे पूरे बदन में बिजली दौड़ा गया। हवस और बढ़ गई।

फिर मैंने पैंटी के किनारे से हाथ अंदर डाला। अंदर का माहौल गरम और गीला था, जैसे कोई गर्म झरना बह रहा हो। बुर के होंठ फूले हुए, नरम और चिकने। मैंने बीच की दरार में उंगली सरकाई, क्लिटोरिस को हल्का छुआ, फिर धीरे से छेद पर रखकर अंदर डाली। वो तुरंत सिसकारी – आह्ह… भैया… अंदर… कितना अच्छा लग रहा है…। उसकी बुर ने मेरी उंगली को कसकर दबाया, जैसे और गहराई में खींच रही हो। मैंने उंगली धीरे-धीरे अंदर-बाहर करना शुरू किया, हर बार थोड़ा और गहराई तक। उसकी सांसें तेज हो गईं, कमर हिलने लगी।

मैंने दूसरी उंगली भी साथ में डाली। अब दो उंगलियां उसके अंदर थीं, चिकनाई से आसानी से सरक रही थीं। मैंने उंगलियां थोड़ी चौड़ी कीं, अंदर घुमाईं, दीवारों को सहलाया। वो कसमसाने लगी – आह्ह… भैया… आ… उम्म… और अंदर… हल्का दर्द मिक्स मजा… मत रुको…। उसकी बुर से और रस बहने लगा, उंगलियां पूरी चिकनी हो गईं।

मैंने दूसरा हाथ उसकी चोली के अंदर डाला। ब्रा के ऊपर से चूचियां दबाईं – नरम, भरी हुई, संतरे जैसी गोल और टाइट। निप्पल ब्रा के कपड़े से उभरे हुए थे। मैंने ब्रा के हुक खोले, ब्रा ऊपर सरकाई। अब छोटे-छोटे काले निप्पल मेरे सामने थे, सख्त और उभरे हुए। मैंने मुंह नीचे करके एक निप्पल मुंह में लिया, जीभ से गोल-गोल घुमाया, फिर हल्के से चूसा। वो सिहर उठी – आह्ह… भैया… दूध निकल जाएगा… कितना मजा आ रहा है…। मैंने निप्पल को जीभ से दबाया, हल्के से दांत लगाए, फिर दूसरी चूची हाथ से मसली। दोनों चूचियां बारी-बारी चूसीं, मसलीं, चाटीं। उसकी सांसें अब और तेज थीं।

कान में फुसफुसाया – चोली के नीचे क्या है? पैंटी के अंदर क्या है?

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वो शरमाकर, धीमी आवाज में बोली – भैया… आप अपनी छोटी बहन से ऐसे पूछते हो?

मैंने कहा – बोल न रानी… मुझे तेरे मुंह से सुनना है…

वो थोड़ा और शरमाई, फिर बोली – चोली में मेरी चूचियां… पैंटी में मेरी बुर…

मैंने कहा – आज अपने भैया को देगी?

वो शर्मा कर बोली – किसी को बताओगे तो नहीं ना?

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मैंने कहा – कभी नहीं। मैं तुझे बहुत प्यार करता हूं। मेरी गर्लफ्रेंड बनेगी?

वो बोली – पुच्च पुच्च आई लव यू भैया…

फिर वो थोड़ा रुककर बोली – गर्लफ्रेंड को कैसे प्यार करते हैं?

मैंने कहा – चूमते हैं, चूचियां दबाते हैं, चूसते हैं, बुर चूसते हैं, लंड मुंह में लेती है, फिर बुर में डालकर चुदाई…

वो बोली – मतलब आप अपनी बहन को चोदना चाहते हो?

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मैंने कहा – हां बेबी, आज मौका है। देगी?

वो बोली – क्या चाहिए मेरे बाबू को?

मैंने कहा – जो चोली के नीचे है, पैंटी के अंदर है…

उसने खुद लहंगा और कम्बल के नीचे कमर से ऊपर कर लिया, पैंटी थोड़ी नीचे सरकाई। मैंने चोली के बाकी हुक खोले, ब्रा पूरी तरह हटा दी। संतरे जैसी टाइट, गोरी चूचियां पूरी तरह खुले थे। निप्पल काले और सख्त। मैंने एक चूची मुंह में भरी, जीभ से निप्पल को घुमाया, जोर से चूसा, दूसरी हाथ से मसली। वो सिसकारी ले रही थी – आह्ह… भैया… कितना अच्छा लग रहा है… और जोर से चूसो…

मैंने एक हाथ नीचे रखा, पैंटी पूरी साइड की। अब तीन उंगलियां उसकी बुर में डालीं – पहले धीरे, फिर तेज। बुर से रस बह रहा था, उंगलियां पूरी भीग गईं। वो कमर हिला रही थी – आह्ह… भैया… कुछ हो रहा है… पानी निकल रहा है…

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उसने मेरी जिप खोली, हाथ अंदर डाला और 9 इंच का तना हुआ लंड बाहर निकाला। सुपाड़ा गरम, चिपचिपा और फूला हुआ था। उसने हल्के से सहलाया, फिर मुट्ठी में पकड़कर ऊपर-नीचे किया – भैया… कितना मोटा और लंबा है…। मैंने तीन उंगलियां उसकी बुर में तेज चलाईं, वो जोर से पानी छोड़ने लगी – आह्ह… भैया… मैं… मैं झड़ गई…

फिर मैं उसके ऊपर आया। कम्बल पूरी तरह ओढ़ लिया ताकि कुछ दिखे नहीं। पैंटी को पूरी तरह साइड किया, लंड का सुपाड़ा उसकी बुर की दरार पर रखा। हल्का धक्का मारा – सुपाड़ा अंदर चला गया। वो तुरंत बोली – आह्ह… धीरे… दर्द हो रहा है… भैया…

मैंने रुककर उसके होंठ चूमे, जीभ अंदर डाली, चूसा। एक हाथ से चूचियां दबाईं। फिर धीरे-धीरे कमर हिलाई, चौथाई लंड अंदर गया। पैंटी के किनारे से घर्षण हो रहा था, जो मजा दोगुना कर रहा था। वो भी कमर हिला रही थी – आह्ह… भैया… अब ठीक लग रहा है… और अंदर डालो…

मैंने गति बढ़ाई, लंड अंदर-बाहर। हर धक्के के साथ उसकी बुर कसकर दबा रही थी। जल्दी ही जोश चढ़ गया, मैंने उसकी कमर कसकर पकड़ी, एक जोरदार धक्का मारा और पानी छोड़ दिया – गरम-गरम वीर्य उसकी बुर में भर गया, बाहर तक बहने लगा। वो सिसकारी – आज से आप मेरे सैयां बन गए भैया… आई लव यू…

आपको कहानी कैसी लगी? क्या आगे की कहानी सुनना चाहते हो? कमेंट में जरूर बताना।

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