Sister in law fucking sex story, family sex story, first time chudai sex story, hidden sex story: हमारी कहानी अपनी बहन की ननद के साथ सेक्स की है. उस वक्त हमारी उम्र 30 साल और उसकी उम्र 20 साल की होगी, वो कॉलेज में पढ़ रही थी, जवानी में ताज़गी भरी, चेहरा गुलाबी, आँखें बड़ी-बड़ी, और बदन ऐसा कि देखते ही मन डोल जाए. एक दिन सर्दियों में हम रजाई में बैठे हुए थे, घर में सब सो रहे थे, सिर्फ़ ठंड की वजह से हम दोनों एक ही रजाई में घुस आए थे. हम अक्सर एक-दूसरे के पैरों से अपने पैर गर्म कर लेते थे, वो पैरों को रगड़ते हुए हल्का-हल्का दबाते, जैसे कोई मसाज हो रही हो. ऐसे ही एक बार किसी के पैर हमारे साथ लगने लगे, पहले तो लगा गलती से है, लेकिन जब हमने गौर किया तो वो रुबाब के थे, उसके पैर नरम, गर्म, और वो धीरे-धीरे हमारे पैरों को सहला रही थी, उंगलियों से खेल रही थी, और मुस्कुरा-मुस्कुरा कर हमें देख रही थी, जैसे कोई राज़ बता रही हो.
दूसरे दिन फिर वही रजाई, लेकिन इस बार उसने हिम्मत कर ली. रजाई के अंदर अंधेरा था, सब सो रहे थे, उसने आहिस्ता से अपना हाथ हमारी कमर पर रखा, फिर धीरे-धीरे नीचे सरकाया और हमारे लंड पर हाथ रख दिया, हल्के से दबाया, सहलाया, जैसे कोई नया खिलौना मिल गया हो, पहले हल्के से टोपा छुआ, फिर पूरे लंड को मुट्ठी में लिया, ऊपर-नीचे हिलाया, हमारी सांसें तेज़ हो गईं. हम चौंक गए लेकिन मन में आग लग गई, हमने भी हिम्मत कर के उसकी शलवार के ऊपर से चूत को सहलाना शुरू कर दिया, उंगली से दबाया, गोल-गोल घुमाया, क्लिट पर रगड़ा, वो सांसें तेज़ हो गईं, “आह… धीरे…” वो फुसफुसाई, उसकी जांघें कस गईं, चूत गर्म होने लगी. कुछ देर में उसकी शलवार पूरी गीली हो गई, चूत का रस बाहर आने लगा, और हमारे लंड ने भी मणि निकाल दी, वो गर्म-गर्म महसूस हो रहा था, दोनों थर-थर कांप रहे थे, रजाई में गर्मी बढ़ गई.
अब हम दोनों अक्सर ये खेल खेलने लगे, हर मौके पर रजाई में, कभी टीवी देखते वक्त, कभी रात को. एक दोपहर जब उसका भाई करीब ही सोया हुआ था, हमने हिम्मत करके उसकी कमीज़ थोड़ी ऊपर की, उसके मलाई जैसे दूधों पर छोटे-छोटे निप्पल दिखे, गुलाबी, सख्त, हमने एक को मुँह में लिया, जीभ से चाटा, गोल-गोल घुमाया, हल्के से काटा, वो सिसकारी, “आह… इह्ह… ओह्ह… चूसो… लेकिन धीरे, कोई जाग न जाए.” हमने एक हाथ से दूसरा दूध दबाया, हल्के से मसला, निप्पल को उंगलियों से खींचा, घुमाया, वो कांप रही थी, उसकी चूत गीली होने लगी, हमारा लंड सख्त, और कुछ देर में हम दोनों झड़ गए, बिना लंड घुसाए ही, सिर्फ़ सहलाने और चूसने से, वो कांप कर शांत हो गई.
अब हम दोनों अक्सर खूब किसिंग करने लगे. कपड़ों के साथ ही एक-दूसरे के लंड और चूत को सहलाते, मसलते, और झड़ जाते. वो ज़माना था जब वीसीआर पर हम लोग फिल्में देखा करते थे, ब्लू फिल्में, वो अक्सर हमारे करीब बैठ जाती, शलवार के अंदर हाथ डाल कर लंड को सहलाती, ऊपर-नीचे करती, कभी टोपे को नाखून से खुरचती, हल्के से दबाती, जब तक हम झड़ ना जाते, मणि उसके हाथ पर गिरती. हम भी अब उसकी शलवार के अंदर हाथ डाल कर उसकी चूत को मसलते, क्लिट को उंगली से रगड़ते, अंदर उंगली डालते, बाहर निकालते, धीरे-धीरे स्पीड बढ़ाते, जब तक वो झड़ ना जाती, उसकी सिसकारियां दबाकर, “आह… ह्ह… इह्ह… और अंदर… उफ्फ…”, उसकी चूत संकुचित होकर रस छोड़ती.
एक रात हम फिल्म देखने के बाद सो गए. रुबाब भी पास ही सोफे पर सो गई थी. आहिस्ता-आहिस्ता जब सब गहरी नींद में सो गए तो वो चुपके से उठी, हमारे पास आई, लेट गई. हमारी शलवार का अज़रबंद खोल कर लंड बाहर निकाला, सहलाने लगी, हल्के से मुट्ठी में लिया, ऊपर-नीचे हिलाया, चूमने लगी, “कितना सख्त हो जाता है…” वो फुसफुसाई. हमने भी उसकी शलवार उतार दी, कमीज़ भी, अब हम दोनों बिलकुल नंगे हो चुके थे, उसका बदन चाँदनी रात में चमक रहा था, दूध उभरे हुए, चूत पर हल्के बाल. वो हमारे ऊपर चढ़ गई, लंड को अपनी चूत पर रख कर रगड़ने लगी, गीला-गीला महसूस हो रहा था, क्लिट पर रगड़ती, “ओह्ह… आह… कितना गरम है तेरा लंड.” हमने नीचे से उसकी चूत में हल्के-हल्के लंड घुसेड़ना शुरू कर दिया, पहले टोपा रखा, हल्का दबाव दिया, फिर थोड़ा अंदर धकेला, वो दांत दबा कर, “आह… दर्द हो रहा है… लेकिन मत निकालना… और अंदर.” उसको थोड़ी-थोड़ी तकलीफ़ हो रही थी मगर चुदवाने के शौक में वो शोर नहीं मचा रही थी, सिर्फ सिसकारियां ले रही थी. अब हमारा 6 इंच का लंड पूरा घुस चुका था, उसकी चूत फट चुकी थी, कुछ ख़ून भी निकला, लेकिन दोनों को बहुत मज़ा आ रहा था, चूत की दीवारें लंड को कस रही थीं. वो ऊपर-नीचे होने लगी, धीरे-धीरे स्पीड बढ़ाई, हम नीचे से धक्के लगा रहे थे, “उफ्फ्फ… आह… रुबाब, कितनी टाइट है तेरी चूत… मज़ा आ रहा है.” हम दोनों ने जल्दी-जल्दी धक्के लगाने शुरू कर दिए, पच-पच की आवाज़ें, वो सिसकारियां, “आह्ह्ह… ह्ह्ह… आऊ… ऊऊ… ऊउइ… ऊई… उईईई… आ रहा है… चोदो मुझे… तेज़.” एक्साइटमेंट इतना ज़्यादा था कि हम दोनों जल्दी झड़ गए, वो कांपती हुई, हम उसके अंदर गरम-गरम छोड़ दिए, चूत से रस बह रहा था.
फिर थोड़ी देर में उसने हमारे लंड को चूसना शुरू किया, घुटनों के बल बैठी, पहले जीभ से टोपा चाटा, गोल-गोल घुमाया, फिर पूरा मुँह में लिया, अंदर-बाहर करती, ग्ग्ग्ग… ग्ग्ग्ग… गी… गी… गी… गों… गों… गोग… उसकी लार बह रही थी, लंड चमक रहा था, हम उसके बाल पकड़ कर गाइड कर रहे थे. हमारा लंड फिर से सख़्त हो गया, हमने उसे लिटाया, टांगें फैलाईं, चूत पर जीभ फिराई, क्लिट चाटी, जीभ अंदर डाली, चूसी, वो चिल्लाई, “आह… इह्ह… ओह्ह… चाटो… अंदर जीभ डालो… उफ्फ…”, उसकी जांघें कांप रही थीं. फिर लंड घुसेड़ा, इस बार ज़ोर से, पहले आधा, फिर पूरा, हर धक्के पर वो उछलती, “पच… पच… पच…” हमने पोज़िशन बदली, उसे घोड़ी बनाया, पीछे से घुसेड़ा, कमर पकड़ कर तेज़-तेज़ धक्के, गांड पर थप्पड़ मारा, वो लाल हो गई, “आह्ह… ह्ह… आऊ… ऊऊ… ऊउइ… ऊई… उईईई… और ज़ोर से… चोदो अपनी रुबाब को.” हमने उंगली भी डाली चूत में साथ में, क्लिट रगड़ी, वो झड़ गई, “ओह्ह्ह… आ रहा है… मत रुको.”, फिर हमने स्पीड बढ़ाई और झड़ गए. उस रात हमने तीन दफ़ा उसे चोदा, हर बार अलग पोज़िशन, कभी वो ऊपर चढ़ कर उछलती, कभी हम ऊपर से धक्के लगाते, कभी साइड में लेट कर, पसीना बहता, सिसकारियां गूंजती, गर्मी से रजाई हट गई, सब कुछ, थक कर लेट गए.
उस दिन के बाद से तो हमारा रास्ता ही खुल गया. अब दिन में भी जब हम टीवी देखते वो बराबर के कमरे में लेट जाती थी. हम पेशाब के बहाने कमरे में जा कर उसे चोद देते थे, दरवाज़ा बंद करके, उसे बिस्तर पर लिटाया, शलवार नीचे सरकाई, चूत चाटी, जीभ अंदर-बाहर की, क्लिट चूसी, वो दबाकर, “आह… इह्ह… ओह्ह… कोई सुन लेगा… लेकिन चाटते रहो.” फिर लंड घुसेड़ा, धीरे से टोपा डाला, फिर पूरा, ज़ोर-ज़ोर से धक्के, “पचाक… पचाक…” वो बोली, “धीरे… लेकिन मत रुको… आह्ह… ह्ह… आऊ… ऊऊ…” हमने मुँह पर हाथ रखा और धक्के लगाते रहे तक वो झड़ गई, कांप कर. हाय क्या दिन थे. रातों को भी हम दोनों ने खूब चुदाई की, कभी सोफे पर बैठ कर, कभी फर्श पर लेट कर, कभी खिड़की के पास खड़े होकर, हर बार नई-नई हरकतें, वो कभी हिचकिचाती, “कहीं कोई देख न ले…” लेकिन फिर मज़े लेती, “पहले डर लगता था लेकिन अब तेरे बिना नहीं रह पाती.” अब उसकी शादी हो चुकी है और वो दो लड़कों की मां है.
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