संस्कारी से रंडी बनने की यात्रा – 4
गाड़ी में यूसुफ के बगल में बैठी मैं खिड़की से बाहर देख रही थी, बाहर का नजारा बदलता जा रहा था, लेकिन मेरे मन में सिर्फ मीटिंग्स की बातें घूम रही थीं। यूसुफ चुपचाप गाड़ी चला रहा था, कभी कभी मेरी तरफ देखकर मुस्कुराता, और मैं शर्मा कर सिर झुका लेती। कहानी का पिछला भाग: …